MP News: जीतू पटवारी पर FIR, जयवर्धन सिंह ने लगाया सत्ता के दुरुपयोग का आरोप, SP कार्यालय घेराव की दी चेतावनी
MP News: मध्य प्रदेश में सियासी तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया, जब अशोकनगर के मुंगावली थाने में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ प्रकरण क्रमांक 0233/2025 दर्ज किया गया। इस FIR को लेकर पूर्व मंत्री और राघोगढ़ से कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है।
उन्होंने इसे सत्ता के दबाव में की गई कार्रवाई करार देते हुए चेतावनी दी कि यदि पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष जांच नहीं की और झूठी FIR वापस नहीं ली, तो कांग्रेस कार्यकर्ता अशोकनगर में एसपी कार्यालय का घेराव करेंगे। यह मामला एक दलित युवक गजराज लोधी के आरोपों से जुड़ा है, जिसके वीडियो को जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इस घटना ने मध्य प्रदेश में कानून-व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द, और राजनीतिक दबाव के मुद्दों पर तीखी बहस छेड़ दी है।

FIR का पूरा मामला
मुंगावली थाना TI जोगेंद्र यादव ने 29 जून 2025 को स्वसंज्ञान लेते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ FIR दर्ज की। यह प्रकरण गजराज लोधी नामक एक फरियादी के उस वीडियो से जुड़ा है, जिसे जीतू पटवारी ने 25 जून 2025 को अपने सोशल मीडिया हैंडल Jitu Ptwari पर पोस्ट किया था। इस वीडियो में गजराज लोधी ने दावा किया था कि गांव के सरपंच के बेटे विकास यादव और उसके साथियों ने उसके भाई को मानव मल खिलाया। जीतू पटवारी ने इस वीडियो के साथ बीजेपी सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की।
हालांकि, 26 जून को गजराज लोधी ने अशोकनगर कलेक्टर को एक शपथ पत्र सौंपकर अपने आरोप वापस ले लिए और दावा किया कि उसने कांग्रेस नेताओं के दबाव में झूठा आरोप लगाया था। इसके आधार पर पुलिस ने जीतू पटवारी और उनके सहयोगियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश), 196(1)(a) (शत्रुता भड़काना), 197(1)(c) (सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बयान), 229(2) (झूठे साक्ष्य गढ़ना), 237 (झूठा बयान), और 353(1)(c) (सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस का दावा है कि जीतू पटवारी ने इस वीडियो को पोस्ट करके सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की।
जयवर्धन सिंह का तीखा हमला
जयवर्धन सिंह ने भोपाल में पत्रकारों से बातचीत में इस FIR को सत्ता के दुरुपयोग का ज्वलंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा, "जीतू पटवारी ने एक गरीब दलित युवक की आवाज उठाई, जो प्रशासन में सुनवाई न होने के कारण उनके पास मदद मांगने आया था। यह FIR सत्ता के दबाव में दर्ज की गई है। अगर पुलिस ने निष्पक्ष जांच नहीं की और यह झूठी FIR वापस नहीं ली, तो हम अशोकनगर में एसपी कार्यालय का घेराव करेंगे।"
जयवर्धन सिंह ने चार बिंदुओं के आधार पर FIR को गलत ठहराया:
मामला पहले से सार्वजनिक था: गजराज लोधी ने 10 जून 2025 को ही सरपंच के बेटे पर मानव मल खिलाने का आरोप सार्वजनिक रूप से लगाया था। प्रशासन में सुनवाई न होने पर उसने जनसुनवाई के दिन पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया था, जो प्रदेश और जिले के सभी प्रमुख अखबारों और मीडिया चैनलों में छाया था। जयवर्धन ने कहा, "यह कहना कि जीतू पटवारी ने गजराज को साइड में ले जाकर समझाया, पूरी तरह असत्य है।"
सामाजिक सौहार्द का सवाल नहीं: जीतू पटवारी ने अपने 8 मिनट 36 सेकंड के वीडियो में स्पष्ट कहा कि यह व्यक्तिगत मामला है, न कि किसी जाति विशेष से जुड़ा। वीडियो में ऐसा कोई शब्द नहीं है जो सामाजिक सौहार्द को बिगाड़े। जयवर्धन ने सवाल उठाया, "जब वीडियो में कोई आपत्तिजनक बात नहीं, तो सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आधार क्या है?"
फरियादी के बार-बार बयान बदलने का सवाल: गजराज लोधी ने बार-बार अपने बयान बदले, जिसके कई वीडियो सामने आए हैं। जयवर्धन ने कहा, "जब फरियादी खुद बयान बदल रहा है, तो इसमें जीतू पटवारी की क्या भूमिका? उन्होंने केवल एक गरीब को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन से बात की और वीडियो सोशल मीडिया पर डाला।"
पुलिस की भूमिका पर सवाल: मल खिलाने के मामले में आरोपी को पुलिस ने धारा 151 (निवारक कार्रवाई) के तहत गिरफ्तार किया, जो पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाता है। जयवर्धन ने इसे साजिश करार देते हुए कहा, "यह संयोग नहीं, बल्कि शासन की नाकामयाबी छिपाने की साजिश है।"
कांग्रेस का विरोध और सियासी तनाव
FIR दर्ज होने के बाद कांग्रेस ने इसे सत्ता के दबाव में की गई कार्रवाई करार दिया। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया, जिसमें कार्यकर्ताओं ने कागज की तलवारें लहराकर बीजेपी सरकार के "कमजोर शासन" का प्रतीकात्मक विरोध किया। NSUI के प्रदेश अध्यक्ष अशुतोष चौकसे ने कहा, "हर बार जब जीतू पटवारी दलितों और वंचितों की आवाज उठाते हैं, सरकार उनकी आवाज दबाने के लिए ऐसी कार्रवाई करती है।" प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 12 NSUI कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, लेकिन बाद में नोटिस देकर छोड़ दिया।
जीतू पटवारी ने भी इस FIR का स्वागत करते हुए कहा, "मैं दलितों और किसानों पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाता रहूंगा, चाहे कितनी भी FIR दर्ज हों। यह मामला सरकार के दबाव में उलट दिया गया, जो सत्ता के दुरुपयोग को दर्शाता है।" उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी विकास यादव बीजेपी विधायक बृजेंद्र यादव का समर्थक है, जिसके कारण पुलिस और सरकार कार्रवाई से बच रही है। @JituPtwari ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, "एक दलित के साथ अत्याचार हुआ, मैंने उसकी आवाज उठाई। अगर यह अपराध है, तो मैं बार-बार यह अपराध करूंगा।"
बीजेपी का पलटवार
बीजेपी ने इस मामले को कांग्रेस की साजिश करार दिया। मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा ने कहा, "कानून सबके लिए समान है। जीतू पटवारी पर गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने झूठ बोलकर समाज में अशांति पैदा करने की कोशिश की। कानून अपना काम करता है, और यह कोई पाप नहीं, बल्कि न्याय है।" बीजेपी प्रवक्ता आशीष अग्रवाल ने कहा, "कांग्रेस ने झूठे आरोपों के जरिए बीजेपी सरकार की छवि खराब करने की कोशिश की, जो अब बेनकाब हो चुकी है।"
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुना में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, "कांग्रेस का मूल सिद्धांत झूठ बोलना है। जीतू पटवारी ने झूठे आरोप लगाकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की।" @OfficeofJScindia ने अपने पोस्ट में लिखा, "कानून के सामने कोई बड़ा या छोटा नहीं। जीतू पटवारी को अपनी गलती का अहसास होगा।"
पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
इस मामले में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। गजराज लोधी के मामले में पहले कोई ठोस कार्रवाई न करना और फिर जीतू पटवारी पर FIR दर्ज करना पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। सामाजिक कार्यकर्ता और वकील रमेश शर्मा ने कहा, "यह स्पष्ट है कि पुलिस ने सत्ता के दबाव में यह FIR दर्ज की। गजराज के बयान बदलने के पीछे भी दबाव की आशंका है। इस मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है।"
अशोकनगर के एसपी विनोद कुमार सिंह ने कहा, "FIR नियमानुसार दर्ज की गई है। हम सभी साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच करेंगे।" हालांकि, कांग्रेस ने इस जांच पर संदेह जताया है और मांग की है कि FIR वापस ली जाए।
Patwari का आगे क्या?
जीतू पटवारी पर FIR ने मध्य प्रदेश में सियासी तनाव को और बढ़ा दिया है। जयवर्धन सिंह की एसपी कार्यालय घेराव की चेतावनी से आने वाले दिनों में बड़े प्रदर्शन की आशंका है। कांग्रेस ने इस मामले को विधानसभा में भी उठाने की योजना बनाई है।
इस बीच, पुलिस ने गजराज लोधी के मामले में जांच तेज कर दी है। गजराज के बयान बदलने के पीछे के कारणों और वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है। यदि पुलिस इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं करती, तो यह सामाजिक और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है।












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