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Bhopal News: कॉलेज रेप कांड, पांचवीं पीड़िता सामने, लव जिहाद और ब्लैकमेलिंग का जाल, SIT की जांच में नए खुलासे

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रायसेन रोड स्थित TIT निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्राओं के साथ रेप, ब्लैकमेलिंग, और लव जिहाद के मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। हर दिन इस मामले में नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, जो 1992 के कुख्यात अजमेर रेप कांड की याद दिला रहे हैं। मंगलवार को इस संगठित गिरोह की शिकार हुई पांचवीं पीड़िता सामने आई, जिसने अपने परिजनों के साथ बागसेवनिया थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज की।

पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पीड़िता के बयान दर्ज किए और भारतीय न्याय संहिता (BNS), POCSO एक्ट, IT एक्ट, और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धाराओं के तहत FIR दर्ज की।

Fifth victim comes forward a web of love jihad and blackmailing new revelations in SIT investigation

इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, और पुलिस को संदेह है कि दो और पीड़िताएं जल्द सामने आ सकती हैं। आरोपियों के मोबाइल फोनों से 7 छात्राओं के एक दर्जन से अधिक अश्लील वीडियो बरामद हुए हैं, जो इस सनसनीखेज अपराध की गहराई को उजागर करते हैं।

पांचवीं पीड़िता का खुलासा: भोपाल की छात्रा की आपबीती

मंगलवार को बागसेवनिया थाने में एक और पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए अपनी शिकायत दर्ज की। भोपाल की रहने वाली इस युवती ने बताया कि वह भी इस संगठित गिरोह का शिकार बनी। पुलिस को मुख्य आरोपी फरहान खान उर्फ फराज के मोबाइल से इस पीड़िता का वीडियो भी मिला था, जिसके आधार पर पुलिस ने उसे बयान दर्ज करने के लिए बुलाया। कड़ी सुरक्षा के बीच पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाई, जिसमें उसने बताया कि फरहान ने उसे दोस्ती के जाल में फंसाया, फिर उसका शारीरिक शोषण किया और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि फरहान ने उसे धर्म परिवर्तन और अपनी कम्युनिटी में शादी के लिए दबाव डाला।

डीसीपी जोन-2 संजय अग्रवाल ने बताया, "पांचवीं पीड़िता की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली गई है। उसके बयानों के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। फरहान के मोबाइल से मिले वीडियो और अन्य सबूतों की फॉरेंसिक जांच चल रही है। हमें संदेह है कि दो और पीड़िताएं जल्द सामने आ सकती हैं।" पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सात छात्राओं के वीडियो मिले हैं, जिनमें से कुछ इतने भयावह हैं कि पीड़िताएं सामाजिक बदनामी के डर से सामने आने को तैयार नहीं हैं। पुलिस ने इन छात्राओं को काउंसलिंग का भरोसा दिया है और उन्हें FIR दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

चार गिरफ्तार, अली का स्पॉट वेरिफिकेशन

पुलिस ने इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है: फरहान खान उर्फ फराज, मोहम्मद साद, अली खान उर्फ अबरार, और साहिल खान। मंगलवार को पुलिस ने अली खान का स्पॉट वेरिफिकेशन किया, जिसमें घटनास्थल से कपड़े, बेल्ट, और अन्य सामान जब्त किए गए। डीसीपी संजय अग्रवाल ने बताया, "अली इन चीजों का इस्तेमाल पीड़िताओं के साथ मारपीट और धमकाने में करता था। हमने फरहान की बाइक पहले ही जब्त कर ली थी, और अब अली की बाइक भी जब्त की जाएगी।"

पुलिस ने अली को निजामुद्दीन कॉलोनी में एक लड़की के घर से गिरफ्तार किया था, जहां वह छिपा हुआ था। गिरफ्तारी के दौरान अली भागने की कोशिश में गिर गया, जिससे उसका पैर टूट गया। उसे पांच दिन की रिमांड पर लिया गया है, और उससे रेप, ब्लैकमेलिंग, और ट्रैफिकिंग के आरोपों पर पूछताछ चल रही है। फरहान को दो दिन की अतिरिक्त रिमांड मिली है, क्योंकि उसकी पूछताछ अभी पूरी नहीं हुई है। साहिल को जेल भेज दिया गया है, जबकि साद की रिमांड भी जारी है।

परिवारजनों की भूमिका पर सवाल

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि आरोपियों के परिवारजनों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जांच में पता चला कि फरहान ने अपने ही घर में एक छात्रा के साथ रेप किया था, और इसकी जानकारी उसकी बड़ी बहन जोया को थी। जोया और उसके पति के खिलाफ भी पुलिस ने केस दर्ज किया है, और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।

इसी तरह, जून 2024 में अली ने एक नाबालिग छात्रा के साथ अपने घर में सुबह 4 बजे रेप किया था। उस समय अली का बड़ा भाई और मां घर में मौजूद थे, लेकिन दोनों कथित तौर पर सो रहे थे। डीसीपी अग्रवाल ने कहा, "हम आरोपियों के परिवारजनों की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं। यह संभव नहीं कि इतने बड़े अपराध घर में हों और परिवार को पता न हो।" पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या परिवारजनों ने इन अपराधों को छिपाने या सहयोग करने में कोई भूमिका निभाई।

अपराध का पैटर्न: अजमेर कांड जैसी साजिश

यह मामला 1992 के अजमेर रेप कांड से कई मायनों में मिलता-जुलता है। उस कांड में भी एक संगठित गिरोह ने स्कूली छात्राओं को दोस्ती के जाल में फंसाया, उनके अश्लील फोटो खींचे, और फिर ब्लैकमेल करके और लड़कियों को अपने जाल में फंसाया। भोपाल के इस मामले में भी आरोपियों ने यही तरीका अपनाया। फरहान, साहिल, अली, और उनके साथी पश्चिम बंगाल और बिहार के रहने वाले हैं। इन लोगों ने कथित तौर पर हिंदू लड़कियों को टारगेट किया, उन्हें हिंदू नामों से दोस्ती की, और फिर रेप, ब्लैकमेलिंग, और धर्म परिवर्तन का दबाव डाला।

पुलिस को फरहान के मोबाइल से मिले वीडियो में कई भयावह दृश्य हैं। कुछ वीडियो में पीड़िताओं को सिगरेट से जलाया गया, कुछ में हथियारों से धमकाया गया, और कुछ में ड्रग्स देकर उनकी इच्छा के खिलाफ शोषण किया गया। एक पीड़िता ने बताया कि फरहान ने उसे मांस खाने और मादक पदार्थ लेने के लिए मजबूर किया, जो उसकी धार्मिक आस्था के खिलाफ था। पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा ने कहा, "यह बहुत ही संवेदनशील और गंभीर मामला है। वीडियो में आरोपियों को पीड़िताओं की धार्मिक भावनाओं का अपमान करते हुए भी सुना गया है। SIT इसकी गहराई से जांच कर रही है।"

Bhopal News: पुलिस की जांच, SIT का गठन, वित्तीय स्रोतों की तलाश

भोपाल पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चार सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसकी निगरानी डीसीपी संजय अग्रवाल कर रहे हैं। SIT को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह इस गिरोह के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करे। पुलिस को संदेह है कि यह गिरोह भोपाल के अलावा इंदौर और अन्य शहरों में भी सक्रिय हो सकता है।

पुलिस अब आरोपियों के वित्तीय स्रोतों की भी जांच कर रही है। जांच में पता चला कि फरहान और उसके साथी पीड़िताओं पर लग्जरी कारों, होटलों, और रेस्तरां में खर्च करते थे, लेकिन इनमें से कोई भी आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है। फरहान का पिता टैक्सी ड्राइवर है, और बाकी आरोपी छोटे-मोटे काम करते हैं या बेरोजगार हैं। पुलिस को शक है कि ये लोग अवैध गतिविधियों या किसी बाहरी फंडिंग से पैसा जुटा रहे थे। फरहान के मोबाइल और बैंक खातों की जांच की जा रही है, और यह भी देखा जा रहा है कि क्या इन लोगों ने अश्लील वीडियो डार्क वेब पर बेचने की कोशिश की।

कोर्ट में हंगामा, वकीलों ने की पिटाई

मंगलवार को चारों आरोपियों को भोपाल कोर्ट में पेश किया गया, जहां वकीलों ने जमकर हंगामा किया। जैसे ही आरोपी कोर्ट परिसर में पहुंचे, गुस्साए वकीलों ने उनकी पिटाई कर दी। पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए छह थानों से अतिरिक्त बल और क्विक रिस्पॉन्स फोर्स (QRF) बुलानी पड़ी। वकीलों ने नारे लगाए और आरोपियों को उनके हवाले करने की मांग की। स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी कि आरोपी शाम 8:15 तक कोर्ट में ही बंद रहे।

साहिल को जेल भेज दिया गया, जबकि फरहान की रिमांड दो दिन और बढ़ा दी गई। अली को पांच दिन की रिमांड मिली, और साद की पूछताछ भी जारी है। कोर्ट परिसर में हुए इस हंगामे ने मामले की गंभीरता और जनता के गुस्से को और उजागर कर दिया।

सियासी तूफान, लव जिहाद और धार्मिक कोण

इस मामले ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। भोपाल से बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने इसे "केरल स्टोरी जैसी साजिश" करार देते हुए आरोपियों के लिए सार्वजनिक सजा की मांग की। उन्होंने कहा, "यह हिंदू बेटियों के खिलाफ जिहादी साजिश है। ऐसे लोगों को खुले में सजा देनी चाहिए।" मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा, "लव जिहाद जैसे कृत्य मध्य प्रदेश में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। SIT हर पहलू की जांच कर रही है।"

विपक्षी कांग्रेस ने इस मामले में सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस प्रवक्ता जेपी धनोपिया ने कहा, "बीजेपी सरकार में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। पुलिस ने शुरुआत में इस मामले को दबाने की कोशिश की। अगर पीड़िताएं हिम्मत न दिखातीं, तो यह गिरोह अब भी सक्रिय होता।" X पर #BhopalRapeCase और #LoveJihad जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां लोग इस मामले पर अपनी राय और गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "भोपाल में हिंदू बेटियों को जाल में फंसाकर उनका जीवन बर्बाद किया गया। यह लव जिहाद नहीं, सनातन पर युद्ध है।"

Bhopal News: सामाजिक प्रभाव, पीड़िताओं का डर, समाज का गुस्सा

इस मामले ने भोपाल में सामाजिक तनाव को बढ़ा दिया है। कई पीड़िताएं सामाजिक बदनामी के डर से सामने नहीं आ रही हैं। पुलिस ने बताया कि फरहान के फोन में 10-15 लड़कियों के वीडियो मिले हैं, लेकिन ज्यादातर लड़कियां शिकायत दर्ज करने से डर रही हैं। कुछ पीड़िताओं ने पढ़ाई छोड़ दी है, और उनके परिवार सदमे में हैं।

स्थानीय लोग और छात्र संगठन इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। TIT कॉलेज के एक छात्र ने कहा, "हमारे कॉलेज की बदनामी हो रही है। लेकिन असल मुद्दा यह है कि लड़कियां अब सुरक्षित नहीं हैं। कॉलेज प्रशासन को भी जवाब देना चाहिए।" कुछ अभिभावकों ने कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि यह गिरोह कॉलेज परिसर और आसपास सक्रिय था।

पुलिस की चुनौतियां और आगे की जांच

SIT के सामने कई चुनौतियां हैं। पहली, कई पीड़िताओं का सामने न आना, जिससे गिरोह का पूरा नेटवर्क उजागर करना मुश्किल हो रहा है। दूसरी, आरोपियों के वित्तीय स्रोतों का पता लगाना, क्योंकि पुलिस को शक है कि यह गिरोह बाहरी फंडिंग से चल रहा था। तीसरी, परिवारजनों की भूमिका की जांच, जो इस मामले को और जटिल बना रही है।

पुलिस अब फरहान की दो बहनों, जोया और एक अन्य, की भूमिका की भी जांच कर रही है, जो उसी कॉलेज की छात्राएं थीं। यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह गिरोह डार्क वेब पर वीडियो बेच रहा था। पुलिस ने कोलकाता और बिहार में दो अन्य फरार आरोपियों, नबील और अबरार, की तलाश के लिए टीमें भेजी हैं।

Bhopal News: अजमेर कांड से सबक, क्या होगा न्याय?

1992 के अजमेर कांड में 250 से ज्यादा स्कूली छात्राएं शिकार बनी थीं, लेकिन सामाजिक दबाव और प्रभावशाली आरोपियों की वजह से ज्यादातर पीड़िताएं सामने नहीं आईं। उस मामले में 18 आरोपियों में से केवल 8 को सजा हुई, और कई बाद में बरी हो गए। भोपाल पुलिस और SIT के सामने चुनौती है कि इस बार ऐसा न हो।

पुलिस कमिश्नर मिश्रा ने कहा, "हम हर पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। SIT दिन-रात काम कर रही है, और हम इस गिरोह के हर सदस्य को पकड़ेंगे।" लेकिन सवाल यह है कि क्या सामाजिक दबाव और सियासी हस्तक्षेप इस मामले को प्रभावित करेंगे?

भोपाल की गंगा-जमुनी तहजीब पर सवाल

यह मामला भोपाल की गंगा-जमुनी तहजीब पर भी सवाल उठा रहा है। एक स्थानीय निवासी, रमेश वर्मा, ने कहा, "भोपाल में हिंदू-मुस्लिम हमेशा साथ रहे हैं। लेकिन ऐसे मामले सामुदायिक तनाव बढ़ाते हैं। पुलिस को जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।" वहीं, एक मुस्लिम समुदाय के नेता, मोहम्मद अली, ने कहा, "यह अपराध है, इसे धर्म से जोड़ना गलत है। दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन समाज में नफरत नहीं फैलनी चाहिए।"

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