Bhopal News: मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन: सोयाबीन के दाम में वृद्धि की मांग
मध्य प्रदेश के किसान सोयाबीन के दाम को 6,000 रुपए प्रति क्विंटल किए जाने की मांग को लेकर पिछले एक महीने से आंदोलन कर रहे हैं। सोमवार को भोपाल में करीब 16 किसान संगठनों ने नीलम पार्क में प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने विभिन्न फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने और MSP की कानूनी गारंटी देने की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कटनी के किसान नेता एके खान ने हाथ-पैरों में लोहे की बेड़ियां डालकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनका कहना है, "सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन वे हमारी आवाज सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। इसके बजाय, वे पूंजीपतियों के अनुसार फैसले ले रही हैं।"

किसान संगठनों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- सोयाबीन, गेहूं, मक्का, चना और अन्य फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाना।
- MSP की लागत के अनुसार सुनिश्चित करना।
- MSP की कानूनी गारंटी प्रदान करना।
आंदोलन का महत्व
यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि किसान अपनी परेशानियों को लेकर कितने गंभीर हैं। मध्यप्रदेश, जो कि कृषि के लिए महत्वपूर्ण राज्य है, में किसानों का यह आंदोलन अन्य राज्यों में भी किसान आंदोलनों को प्रेरित कर सकता है।
किसानों की समस्याओं का समाधान न होने पर उनका आंदोलन और भी तेज हो सकता है, जिससे राज्य सरकार के लिए चुनौती बढ़ सकती है। अगर सरकार ने उनकी मांगों को समय पर नहीं सुना, तो यह आंदोलन और भी बड़े स्तर पर फैल सकता है।
किसान आंदोलन: डॉ सुनीलम की प्रमुख बातें
पूर्व विधायक और संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय कोर कमेटी मेंबर डॉ. सुनीलम ने हाल ही में चल रहे किसान सत्याग्रह के दौरान महत्वपूर्ण बयान दिए हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल किसान संगठनों की मुख्य मांग है कि सरकार सभी कृषि उत्पादों की खरीद पूरी तरह से करे।
सरकार की खरीद नीति पर सवाल
डॉ सुनीलम ने कहा कि पिछले कुछ समय में सरकार ने खरीदी के प्रति अपनी नीतियों में कई बदलाव किए हैं। "जब से मध्य प्रदेश के किसान संगठनों ने आंदोलन शुरू किया, तब सरकार ने पहली बार कहा कि वे खरीदी करेंगे। फिर कहा गया कि वे 40% खरीदेंगे, और अंत में 20% खरीदने का आश्वासन दिया गया। इसका मतलब है कि 100 बोरे में से केवल 20 बोरे ही खरीदे जाएंगे।"
किसानों की कठिनाई
उन्होंने बताया कि इस स्थिति में किसानों को शेष 80 बोरे बेचने के लिए 3,000 से 3,500 रुपए प्रति क्विंटल पर मजबूर होना पड़ रहा है। "सरकार ने भले ही कृषि क्षेत्र में पुरस्कार प्राप्त किए हों, लेकिन असलियत यह है कि उत्पादन घट रहा है। पहले औसतन 8 से 10 बोरे निकलते थे, अब यह घटकर 4 से 6 बोरे हो गया है।"
मांग का जोर
डॉ सुनीलम ने स्पष्ट किया कि इसलिए किसान सोयाबीन का मूल्य 8,000 रुपए प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं। "संयुक्त किसान मोर्चा इस लड़ाई को लंबे समय से लड़ रहा है। हमने 300 दिन संघर्ष किया है, जिसमें 750 किसान शहीद हुए हैं। इस लड़ाई को हम और तेज करेंगे।"
आगामी रणनीति
उन्होंने आगे कहा कि इस कार्यक्रम के दौरान अलग-अलग संगठनों द्वारा जेलों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। "हम सभी किसान संगठन एकजुट हैं और आगे आंदोलन को तेज करने की रणनीति बना रहे हैं। अब किसान अपने काम को पूरा करने के बाद इस लड़ाई को और तेज करेगा।"












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