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राजगढ़ में किसानों का आक्रोश उबला: भारतीय किसान संघ के 47वें स्थापना दिवस पर धरना, ट्रैक्टर रैली और सुंदरकांड

राजगढ़ जिले में गुरुवार को भारतीय किसान संघ के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। खुजनेर रोड स्थित कृषि उपज मंडी प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष बद्रीलाल नागर के नेतृत्व में जिलेभर से बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हुए।

शुरुआत में स्थापना दिवस के उत्सव के रूप में शुरू हुआ कार्यक्रम जल्द ही किसानों की समस्याओं पर केंद्रित हो गया। किसानों ने बिजली बिलों के बढ़ते बोझ, बिना सूचना के पंप कनेक्शन के भार में वृद्धि और विभाग की लापरवाही को लेकर जोरदार नारेबाजी की।

Farmer anger boils over in Rajgarh Protest on 47th foundation day of Bharatiya Kisan Sangh

कार्यक्रम के बाद किसानों ने ट्रैक्टरों पर सवार होकर आक्रोश रैली निकाली। यह रैली कृषि मंडी से शुरू होकर शहर के मुख्य मार्गों से गुजरती हुई कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची। कलेक्ट्रेट के गेट पर किसान ज्ञापन देने के लिए डट गए। एक घंटे से अधिक समय तक किसान गेट पर बैठे रहे और जब एसडीएम निधि भारद्वाज तथा ADM मौके पर पहुंचे तो किसानों ने साफ कह दिया कि "जब तक कलेक्टर खुद यहां नहीं आएंगे, तब तक हम ज्ञापन नहीं देंगे और यहां से नहीं हटेंगे।" एसडीएम ने बताया कि कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में व्यस्त हैं, इसलिए नहीं आ सकते, लेकिन किसान इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हुए।

अब किसानों ने कलेक्ट्रेट गेट पर सुंदरकांड का पाठ शुरू कर दिया है। पाठ के बीच-बीच में नारे लग रहे हैं-"किसान को न्याय दो", "बिजली बिल कम करो", "पंप कनेक्शन का बोझ हटाओ"। किसान संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा, लेकिन जब तक कलेक्टर खुद नहीं आते या कोई लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे यहां से नहीं हटेंगे।

किसानों की मुख्य मांगें और समस्याएं

किसानों ने अपनी शिकायतों में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे उठाए हैं:

बिजली बिलों का बढ़ता बोझ: किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं दोनों पर बिजली बिलों का बोझ बहुत बढ़ गया है। बिना सूचना और बिना मीटर चेक किए पंप कनेक्शन का भार बढ़ा दिया गया है, जिससे बिल कई गुना बढ़ गए हैं।
विभाग की लापरवाही: कई बार शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग ने कोई समाधान नहीं किया। मीटर रीडिंग में गड़बड़ी, पुराने मीटर न बदलने और अनियमित बिलिंग से किसान परेशान हैं।

कर्ज और आत्महत्या का खतरा: बढ़ते बिलों से किसान कर्ज में डूब रहे हैं। कई किसानों ने बताया कि बिजली बिल चुकाने के लिए वे साहूकारों से कर्ज ले रहे हैं, जिससे आत्महत्या जैसी स्थिति बन रही है।
न्याय की मांग: किसानों ने कहा कि जब तक बिजली बिलों का बोझ कम नहीं किया जाता और पंप कनेक्शन के भार को पुरानी स्थिति में नहीं लाया जाता, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।

पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

कलेक्ट्रेट गेट पर किसानों के धरने के बाद पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। एसडीएम और ADM ने किसानों से बातचीत की और उन्हें समझाने की कोशिश की। एसडीएम ने कहा कि कलेक्टर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात कराई जा सकती है, लेकिन किसान इसे स्वीकार नहीं कर रहे। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और कोई अनुशासनहीनता नहीं बरती जा रही है, इसलिए अभी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

किसान संगठन का संकल्प

भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष बद्रीलाल नागर ने कहा कि यह केवल बिजली बिल का मुद्दा नहीं है, बल्कि किसानों की पूरी आजीविका का सवाल है। उन्होंने कहा कि यदि कलेक्टर खुद नहीं आते या लिखित आश्वासन नहीं देते, तो कल से जिले में बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। किसान संगठन ने अन्य जिलों से भी समर्थन मांगा है।

यह घटना मध्य प्रदेश में किसानों की बढ़ती निराशा और बिजली विभाग की लापरवाही को उजागर करती है। किसान संगठन लगातार बिजली बिलों में राहत और पंप कनेक्शन की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल, कलेक्ट्रेट गेट पर किसानों का धरना जारी है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

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