‘Hello..मैं सीएम ऑफिस से बोल रहा हूं’, 1.11 करोड़ नहीं दिए तो पड़ जाएगा ED का छापा

सीएम के नाम पर भोपाल के प्राइवेट हॉस्पिटल मालिक से 1.11 करोड़ रुपए की डिमांड करने का मामला सामने आया है। साइबर क्राइम ब्रांच पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया हैं।

राजधानी भोपाल में फिल्मी अंदाज में वारदात करने का मामला सामने आया है। इस मामले में सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों पढ़े-लिखे आरोपियों ने यूट्यूब से देख कर ठगी करने का प्लान तैयार किया। दरअसल भोपाल में सीएम ऑफिस के नाम पर एक निजी हॉस्पिटल के मालिक से 1.11 करोड़ पर की डिमांड का मामला सामने आया है। आरोपियों ने खुद को सीएम ऑफिस के स्टाफ का बताया। कॉल स्पूफिंग के जरिए डॉक्टर को कॉल कर धमकाया और कहा कि 1.11 करोड़ रुपए नहीं दिए तो तुम्हारे यहां ED का छापा पड़ेगा। आखिर कौन है ये दो आरोपी और क्यों सीएम ऑफिस का स्टाफ बनकर निजी अस्पताल संचालक से करोड़ रुपये की डिमांड की। नीचे पूरा मामला विस्तार से जाने...

मोबाइल पर शो हो रहे थे सीएम हाउस और ऑफिस के नंबर

मोबाइल पर शो हो रहे थे सीएम हाउस और ऑफिस के नंबर

यह पूरा मामला राजधानी भोपाल के एलबीएस हॉस्पिटल का है। यहां आरोपियों ने अस्पताल के मालिक भूपेंद्र श्रीवास्तव को कॉल करके धमकाया था और रुपयों की डिमांड की थी। सबसे हैरानी की बात ये है कि अस्पताल संचालक के मोबाइल नंबर पर आरोपियों द्वारा किए गए कॉल पर सीएम हाउस और सीएम ऑफिस के नंबर शो हो रहे थे। इसे देखकर संचालक भूपेंद्र श्रीवास्तव हैरान हो गए। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी इसके बाद साइबर क्राइम ब्रांच ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

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    सीएम हाउस और सीएस ऑफिस का फर्जी इस्तेमाल कर ठगी
    यूट्यूब से सीखी कॉल स्पूफिंग

    यूट्यूब से सीखी कॉल स्पूफिंग

    साइबर क्राइम ब्रांच पुलिस ने बताया कि इस मामले में सीहोर के एल्बम सिंह परमार और देवनारायण रघुवंशी को गिरफ्तार किया गया है पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने यूट्यूब से कॉल स्पूफिंग करना सीखा। इससे पहले उन्होंने एक्ट्रेस जैकलिन फर्नांडीस के बॉयफ्रेंड और महाठग सुदेश चंद्रशेखर के फ्रॉड करने का तरीका भी यूट्यूब पर देखा था। तभी उनके दिमाग में इस तरह से एक अस्पताल संचालक को ठगने का आइडिया दिमाग में आया। इसके बाद आरोपियों ने अस्पताल संचालक को फोन कर खुद को सीएम के स्टाफ का बताया और कहा कि ईडी का छापा पड़ सकता है। अगर रुपए नहीं दिए तो छापा पड़ जाएगा।

    कॉल के लिए चीन,ब्रिटेन और अमेरिका के सर्वर का यूज़

    कॉल के लिए चीन,ब्रिटेन और अमेरिका के सर्वर का यूज़

    आरोपियों ने फर्जी कॉल के लिए चीन, ब्रिटेन और अमेरिका के सर्वर का यूज किया था। खास बात यह है कि दोनों आरोपी अच्छे घर से हैं और पढ़े लिखे हैं। एलम सिंह परमार ने इंग्लिश में m.a. किया है। जबकि दूसरे आरोपी ने बीएससी बायोटेक किया है। आरोपी एलम सिंह परमार टीचर भी रहा है। उसने सीहोर में 2012 में कैंब्रिज कान्वेंट स्कूल को खरीदा था। इसके बाद वे शेयर मार्केट में पैसा लगाने लगा और उसकी दोस्ती देवनारायण से हो गई। देवनारायण बिजनेसमैन और हार्डवेयर का काम करता है।

    आखिर क्या वजह थी, जो ठग बनने निकल पड़े ?

    आखिर क्या वजह थी, जो ठग बनने निकल पड़े ?

    दरअसल दोनों आरोपियों ने शेयर मार्केट में जमकर पैसा लगाया जिसके कारण उन पर एक करोड़ पर का कर्जा हो गया। घाटा होने पर कर्ज बढ़ता ही गया। इस कार्य को खत्म करने के लिए दोनों ने मुंबई के महा ठग सुदेश चंद्रशेखर की करतूतों की जानकारी इंटरनेट से ली इसके बाद यूट्यूब पर फ्रॉड करने का तरीका सिखा। सीहोर के ज्वेलर को ठगा। फिर डॉक्टर को धमकाया।

    पैसे वालों को दिखाते थे ED का डर

    पैसे वालों को दिखाते थे ED का डर

    एडिशनल डीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि दोनों आरोपी पैसे वालों को फोन कर धमकियां दिया करते थे। उन्होंने भोपाल में निजी अस्पताल एलबीएस के मालिक भूपेंद्र श्रीवास्तव को फोन कर कहा कि उनके यहां ED का छापा पड़ सकता है और वो सीएम हाउस के स्टाफ से बोल रहे हैं। अगर उन्होंने 1.11 करोड़ रुपए नहीं दिए तो ईडी का छापा पड़ेगा। आरोपी जनप्रतिनिधि कार्यालय सहित मुख्य सचिव कार्यालय, CM हाउस के नंबर से स्पूफिंग कॉल कर रहे थे।

    फर्जी कॉल करने के लिए ट्रेनिंग भी ली

    फर्जी कॉल करने के लिए ट्रेनिंग भी ली

    दोनों आरोपी इतने शातिर थे कि उन्होंने ठगी करने के लिए बाकायदा फर्जी कॉल की ट्रेनिंग भी ली। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि कॉल नंबर इस फिल्म के जरिए डॉक्टर जो ज्वेलर्स को फोन किया। घर वालों को शक ना हो इसके लिए चाणक्यपुरी कंचन मार्केट भोपाल में कमरा किराए से लिया। इसी रूम में आरोपियों ने फर्जी कॉल करने की ट्रेनिंग भी ली। आरोपियों ने इंटरनेट के जरिए सीएम हाउस और दूसरे सरकारी डिपार्टमेंट के नंबर हासिल किए।

    कैसे पकड़े गए आरोपी

    कैसे पकड़े गए आरोपी

    पुलिस ने जब जांच की तो साफ हो चुका था कि सीएम ऑफिस और हाउस से डॉक्टर को कॉल नहीं किया गया। यह कॉल किसी ने डॉक्टर को ठगने के लिए किया है। इसके बाद पुलिस ने जांच के लिए चार टीमें गठित की पता चला कि आरोपियों ने कॉल नंबर स्पूफिंग के जरिए डॉक्टर को धमकी दी थी। इसके बाद नंबर ट्रेस कर पुलिस ने दोनों आरोपियों को दबोच लिया।

    क्या है कॉल स्पूफिंग

    क्या है कॉल स्पूफिंग

    स्पूफ फोन कॉल करो स्पूफ कॉल कहा जाता है। जिसमें फोन लगाने वाला व्यक्ति यह तय करता है कि जैसे वह कॉल कर रहा है उसे कौन सा नंबर दिखाई दे। स्पूफिंग मोबाइल नंबर या मैसेज स्पूफिंग कॉलर आईडी का यूज कर VIOP बेस्ड सॉफ्टवेयर या क्रेजी कॉलेज वेबसाइट के जरिए की जाती है। इसमें क्रेजी कॉलर के जरिए स्पूफ मैसेजिंग की जाती है और VOIP सॉफ्टवेयर के जरिए फेक कॉल की जाती है।

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