Indore Dussehra MP News: रावण के बजाय शूर्पणखा का दहन, सोनम और अन्य महिलाओं के क्यों जलेंगे पुतले, जानिए
Indore Dussehra MP News: दशहरा का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। हर साल लोग रावण के विशाल पुतले जलाकर यह संदेश देते हैं कि अधर्म का अंत होना ही चाहिए। लेकिन इस बार इंदौर में कुछ अलग होने वाला है। यहां रावण के बजाय शूर्पणखा का पुतला जलाया जाएगा। और यह पुतला किसी साधारण नहीं, बल्कि उन महिलाओं का प्रतीक बनेगा जिन पर अपने पतियों या परिवार के सदस्यों की हत्या का आरोप है। इसकी अगुवाई कर रही है 'पौरुष' नाम की संस्था, जो पुरुषों के अधिकारों के लिए काम करती है।
इस आयोजन का केंद्र बिंदु है राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी। लेकिन सवाल यह उठता है- आखिर रावण को छोड़कर शूर्पणखा का दहन क्यों? और यह आयोजन समाज को क्या संदेश देना चाहता है? आइए, सरल भाषा में इस पूरी घटना को समझते हैं।

पहले समझिए राजा रघुवंशी हत्याकांड: एक हनीमून जो बन गया कत्ल का प्लान
यह कहानी शुरू होती है मई 2025 से, जब इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी और उनकी नई-नई दुल्हन सोनम मेघालय घूमने गए। दोनों की शादी 11 मई को हुई थी। परिवार वालों का कहना था कि शादी से पहले सब कुछ ठीक था, कोई झगड़ा नहीं। लेकिन हनीमून के दौरान, 23 मई को वे लापता हो गए। राजा का शव 2 जून को एक गहरी खाई में मिला। सोनम गायब थी। शुरू में लगा कि शायद कोई हादसा हो गया। लेकिन पुलिस की जांच ने जो राज खोला, वह पूरे देश को हिला गया।
पुलिस ने पाया कि सोनम ने ही राजा की हत्या की साजिश रची थी। वह अपने पुराने प्रेमी राज कुशवाहा के साथ मिलकर तीन कांट्रैक्ट किलर्स को हायर किया। राज कुशवाहा सोनम के पिता की फर्नीचर फैक्ट्री में अकाउंटेंट था। शादी से पहले ही दोनों का अफेयर चल रहा था। साजिश फरवरी से शुरू हो चुकी थी। प्लान था कि हनीमून के बहाने राजा को मार दिया जाए और सोनम गायब हो जाए। किलर्स ने गुवाहाटी से हथियार खरीदा, शिलांग के पास वेई सॉडॉन्ग फॉल्स के नजदीक राजा को धक्का दे दिया। सोनम ने हत्या के बाद सिलिगुड़ी से ट्रेन पकड़ी, इंदौर पहुंची, वहां राज से मिली और फिर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में सरेंडर कर दिया।

6 जून को सोनम की गिरफ्तारी हुई। उसके बाद राज कुशवाहा और तीन किलर्स- आकाश राजपूत, विशाल सिंह चौहान और आनंद कुरमी- को भी पकड़ा गया। मेघालय पुलिस ने 5 सितंबर को 790 पेज की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सोनम और राज को मुख्य साजिशकर्ता बताया। राजा के भाई सachin रघुवंशी ने सोनम और राज पर नार्को टेस्ट की मांग की, ताकि पूरी सच्चाई सामने आए। सोनम के पिता ने बेटी को बेकसूर बताया, लेकिन सबूतों ने साजिश साफ कर दी। यह मामला इतना सनसनीखेज था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा गया। मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने पुलिस की तारीफ की, क्योंकि 7 दिनों में केस क्रैक हो गया।
शूर्पणखा दहन: रावण क्यों नहीं, महिलाओं के पुतले क्यों?
अब आते हैं दशहरे के इस अनोखे आयोजन पर। 'पौरुष' संस्था का कहना है कि रामायण में रावण अधर्म का प्रतीक है, लेकिन शूर्पणखा चालाकी, छल और बदले की आग का। वह सीता पर बुरी नजर रखती है और भाइयों को भड़काती है। आज के समय में कुछ महिलाएं भी ऐसा ही कर रही हैं- पतियों को मारकर या झूठे केस बनाकर पुरुषों को तड़पाती हैं। इसलिए इस दशहरे पर रावण के बजाय शूर्पणखा का 11 मुख वाला पुतला जलाया जाएगा। इस पुतले पर सोनम रघुवंशी की तस्वीर बीच में लगेगी, और बाकी 10 चेहरों पर अन्य महिलाओं के पोस्टर। इनमें मुस्कान रस्तोगी (जिस पर पति की हत्या का आरोप), हर्षा पडियार और अन्य शामिल हैं, जो पतियों या बच्चों की हत्या के आरोपी हैं।
संस्था के अध्यक्ष अशोक दशोरा बताते हैं, "यह आयोजन समाज को जागरूक करने के लिए है। पुरुष भी अपराधी हो सकते हैं, लेकिन महिलाओं के अपराध को अक्सर दबा दिया जाता है। हम बुराई के खिलाफ हैं, चाहे वह किसी भी रूप में हो।" कार्यक्रम 21 अक्टूबर को शाम 4 से 6:30 बजे तक महालक्ष्मी नगर मेला ग्राउंड में होगा। पहले जुलूस निकलेगा- मेला ग्राउंड से बॉम्बे अस्पताल चौराहे तक। जुलूस में राजा रघुवंशी के परिवार वाले भी शामिल होंगे। फिर मैदान में पुतला दहन होगा। दशोरा कहते हैं, "हमारा मकसद न्याय की मांग है, न कि किसी को बदनाम करना।"
विवाद की आग: धमकियां, विरोध और बहस
यह आयोजन शुरू से ही विवादों में घिरा है। कई महिला संगठनों ने इसे महिला विरोधी बताया। उनका कहना है, "एक अपराधी महिला के नाम पर पूरे महिला वर्ग को शूर्पणखा कहना गलत है। अपराध व्यक्तिगत होता है, लिंग से नहीं जुड़ा।" हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से अशोक दशोरा को धमकी भरे फोन आए। कोई कहता है, "कार्यक्रम रद्द करो वरना बवाल होगा।" लेकिन दशोरा अड़े हुए हैं। वे कहते हैं, "धमकी से डरेंगे नहीं। पुलिस सुरक्षा में कार्यक्रम होगा।"
समाज को क्या संदेश? आगे की राह
यह आयोजन पुरुषों के अधिकारों की मांग को नई दिशा दे रहा है। भारत में घरेलू हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन ज्यादातर पुरुष पीड़ित चुप रहते हैं। NCRB डेटा बताता है कि 2024 में पुरुषों पर झूठे केसों की संख्या 20% बढ़ी। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं, ऐसे आयोजन सकारात्मक जागरूकता फैला सकते हैं, बशर्ते वे हिंसा न भड़काएं। राजा के भाई विपिन रघुवंशी कहते हैं, "हम न्याय चाहते हैं, न कि बदला। लेकिन समाज को ऐसे अपराधों से सावधान रहना चाहिए।"
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