MP News: दीपक जोशी की बीजेपी में घर वापसी, पूर्व मंत्री ने दिया बड़ा बयान
पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे और पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में वापसी की है। मंगलवार, 7 नवंबर को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में उन्होंने बुधनी विधानसभा क्षेत्र के नांदनेर में भाजपा का हाथ थाम लिया। दीपक जोशी की यह घर वापसी प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम मानी जा रही है।
दीपक जोशी की वापसी कई मायनों में खास है क्योंकि उन्होंने इससे पहले, यानी डेढ़ साल पहले, कांग्रेस पार्टी में शामिल होकर बीजेपी से दूरी बना ली थी। 2023 के विधानसभा चुनाव में दीपक जोशी ने कांग्रेस के टिकट पर खातेगांव सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन वे बीजेपी प्रत्याशी आशीष शर्मा से हार गए थे।

चुनाव में उन्हें 12,542 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था, जो उनके लिए एक बड़ा झटका था। इसके बावजूद, उन्होंने पार्टी बदलने का फैसला किया और अब वापस बीजेपी में लौट आए हैं।
दीपक जोशी का बयान: 'मैंने गलती की थी'
दीपक जोशी ने बीजेपी में फिर से शामिल होते वक्त एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, "भाजपा मेरा घर है। मैं जनसंघ के जमाने के परिवार से हूं। मेरे पिताजी, मैंने और शिवराज जी ने साथ में काम किया है। पगडंडी से लेकर हवाई जहाज तक का सफर इसी पार्टी ने कराया है। इस नाते मैं कह सकता हूं कि मैंने गलती की थी। उस गलती को ठीक करके आज मैं अपनी पार्टी में वापस आ गया हूं।" दीपक जोशी के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि उन्होंने कांग्रेस में अपनी सदस्यता को एक भूल माना और अब उसे सुधारने की कोशिश की है।
कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में की थी सभा
दीपक जोशी ने भाजपा जॉइन करने से पहले, 4 नवंबर को बुधनी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार पटेल के पक्ष में एक सभा की थी। इस सभा में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के लिए वोट की अपील की थी, जो एक और संकेत था कि दीपक जोशी का कांग्रेस से कोई सशक्त संबंध था। लेकिन इसके केवल चार दिन बाद, 7 नवंबर को दीपक जोशी ने भाजपा में वापसी की और अपनी राजनीतिक दिशा बदल ली।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया: 'कोई झटका नहीं'
दीपक जोशी की वापसी के बाद कांग्रेस ने कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी। कांग्रेस के उम्मीदवार राजकुमार पटेल ने कहा, "दीपक जोशी जहां से आए थे, वहां चले गए। इसमें क्या कहा जाए। बड़ी उम्मीदों से वे कांग्रेस में आए थे, अब वापस भाजपा में चले गए। हमने तो उनके पिताजी का भी सम्मान किया है। राजनीति के संत के रूप में जो कुछ लोग जाने जाते हैं, कांग्रेस के भी अनेक नेता उसमें हैं। स्वाभाविक रूप से उनका मन नहीं लगा होगा, इसलिए वे चले गए। इससे कांग्रेस को कोई झटका नहीं है।"
राजकुमार पटेल ने यह भी कहा कि दीपक जोशी का पार्टी बदलने से कांग्रेस को कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उनके जाने से कोई बड़ी राजनीतिक नुकसान नहीं हुआ है। कांग्रेस पार्टी अपने रास्ते पर आगे बढ़ेगी और इस बदलाव से कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और भविष्य की राजनीति
दीपक जोशी की वापसी बीजेपी के लिए एक बड़ी राजनीतिक लाभ हो सकती है, क्योंकि उनका कद प्रदेश के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में काफी बड़ा है। वे जनसंघ के पुराने परिवार से आते हैं और उनके पिताजी कैलाश जोशी की राजनीतिक विरासत भी बहुत मजबूत रही है। भाजपा के लिए दीपक जोशी का साथ हासिल करना न केवल पार्टी की ताकत को बढ़ाता है, बल्कि उनके लौटने से कार्यकर्ताओं का मनोबल भी ऊंचा हो सकता है।
हालांकि, कांग्रेस में उनकी सदस्यता के समय को लेकर उठे सवाल अब भी बने रहेंगे। कांग्रेस ने उन्हें पूरी तरह सम्मान दिया था, लेकिन उनका पार्टी बदलना एक राजनीतिक रणनीति के तहत ही समझा जा सकता है। अब देखना यह होगा कि दीपक जोशी की इस घर वापसी से बीजेपी को कितना फायदा होता है, खासकर आगामी चुनावों के संदर्भ में।












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