Datia News: भाजपा पार्षदों पर भूमि अतिक्रमण का आरोप, साधु-संतों ने कलेक्टर से की सख्त कार्रवाई की मांग

Datia News: दतिया शहर के वार्ड क्रमांक-12 में शासकीय और आश्रम की भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर सियासी और सामाजिक माहौल गर्मा गया है।

साधु-संतों और स्थानीय नागरिकों ने भाजपा से जुड़े कुछ पार्षदों पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। शनिवार को बड़ी संख्या में साधु-संत और क्षेत्रवासी कलेक्टर बंगले पहुंचे और पूरे मामले को लेकर ज्ञापन सौंपा।

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प्राचीन मंदिरों और आश्रम की भूमि को लेकर विवाद

ज्ञापन में बताया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के दौरान शासकीय भूमि पर शंकर भगवान सहित अन्य देवी-देवताओं के प्राचीन मंदिरों का निर्माण किया गया था। साधु-संतों का दावा है कि यह निर्माण तत्कालीन पटवारी की पहल पर हुआ था और वर्षों से यहां नियमित पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और सेवा कार्य होते आ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थान सिर्फ आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक गतिविधियों का भी प्रमुख स्थल रहा है।

गोवंश संरक्षण और सेवा कार्य का दावा

साधु-संतों ने बताया कि आश्रम परिसर में लंबे समय से बेसहारा गोवंश की सेवा और संरक्षण किया जा रहा है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से लाए गए घायल और असहाय पशुओं की देखभाल यहां की जाती है। संतों का कहना है कि इसी आश्रम और उससे लगी शासकीय भूमि पर कथित तौर पर जेसीबी मशीन चलाकर जमीन समतल की जा रही है और अवैध रूप से प्लॉट काटने की तैयारी की जा रही है।

विरोध पर धमकी और बाड़ तोड़ने का आरोप

साधु-संतों का आरोप है कि जब उन्होंने इस अतिक्रमण का विरोध किया तो आश्रम की बाड़ तोड़ दी गई और उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गईं। संतों का कहना है कि आरोपित खुद को सत्ताधारी दल से जुड़ा बताकर डराने-धमकाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि वे आवाज न उठा सकें। इस घटना के बाद क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल है।

कलेक्टर बंगले पहुंचा प्रतिनिधिमंडल

शनिवार को साधु-संतों और स्थानीय नागरिकों का एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर बंगले पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपते हुए मांग की कि शासकीय और आश्रम की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और आश्रम, मंदिरों व गोवंश की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

प्रशासन का आश्वासन, जांच के बाद होगा खुलासा

प्रशासन की ओर से साधु-संतों को आश्वासन दिया गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और तथ्य सामने आने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और दोषी कौन हैं।

दतिया में भूमि अतिक्रमण का यह मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि आस्था, सेवा और राजनीति से जुड़ा होने के कारण और भी संवेदनशील बन गया है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।

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