डकैत ददुआ, बलखड़िया और ठोकिया के फरमान से इस गांव में बनता था सरपंच, पहली बार मतदाता अपने मन से डाल सकेंगे वोट

रीवा, 24 जून: जिले का ककरेडी गांव उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा से लगा हुआ क्षेत्र है, इसीलिए यह गांव कुछ सालों पहले तक डकैतों का गढ़ हुआ करता था, ककरेडी गांव आज भी विकास से कोसों दूर है इस गांव की जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीणों ने बताया कि ककरेडी गांव साल 2014-15 से पहले डकैतों का गढ़ हुआ करता था। इसके कारण अब तक इस गांव में विकास नहीं हो सका‌। गांव के ग्रामीण डकैतों के फरमान पर सरपंच प्रत्याशियों को मतदान किया करते थे। लेकिन इस बार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अपने मन से सरपंच प्रत्याशी को मतदान कर सकेंगे। ग्रामीणों ने बताया कि डकैतों के खात्मे के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने कुछ विकास कराने का प्रयास किया है। यह गांव ककरेडी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा से लगा एक ऐसा गांव हैं जहां पहले डकैतों का मूवमेंट हुआ करता था। जिसकी वजह से ग्रामीण हमेशा डरे सहमे रहते थे। चुनाव के लिए गांव वालों को डकैतों द्वारा फरमान भेजा जाता था। ग्रामीणों को भी फरमान का इंतजार करना पड़ता था कि कब डकैतों के द्वारा प्रत्याशी चयन कर लिस्ट भेजी जाए और ग्रामीण मतदान कर सकें।

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खत्म हुए डकैतों के मूवमेंट

सरकार के द्वारा डकैत प्रभावित क्षेत्रों में लगातार बढ़ाई गई पुलिसिंग के वजह से खत्म हुए डकैतों के कारण ग्रामीणों को इस बार अपने मत का मन से करने का अवसर मिला है। जिसकी वजह से इस गांव के ग्रामीण होने वाले पंचायत चुनाव में अपने मन की वोट डालने का इंतजार कर रहे हैं।

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गांव अभी भी विकास से कोसों दूर

ककरेडी गांव उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा के जंगली क्षेत्र से लगा हुआ क्षेत्र है। पहाड़ों के बीच में बसा यह गांव डकैतों की वजह से समस्याओं से घिरा रहा। मगर जब सरकार ने डकैतों का खात्मा किया तो इस गांव में खुशहाली आई पर फिर समस्या जस की तस बनी रही। यह गांव विकास से कोसों दूर है यहां के ग्रामीणों को आज भी कुएं से पानी भरकर पीना पड़ता है। सड़क है लेकिन स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए शहर का रुख करना पड़ता है।

विंध्य प्रदेश इन डकैतों का गढ़ था

आपको बताते चलें 2015 के पहले तक विंध्य क्षेत्र ददुआ, ठोकिया और बलखड़िया, कालीचरण, साधना पटेल, जैसे कुख्यात डकैतों का गढ़ माना जाता था। यह डकैत इसी गांव के आसपास पहाड़ के जंगली क्षेत्रों में रहते थे और अपना गुजर-बसर करते थे और जरूरत पड़ने पर ग्रामीण क्षेत्रों में दहशतगर्दी फैलाकर सरकार से अपनी मांग की भी मनवा लिया करते थे। फिर मध्य प्रदेश सरकार ने पुलिसिंग तेज करके डकैतों के गढ़ को पूरी तरह से समाप्त कर दिया।

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तीन चरणों में होंगे पंचायत चुनाव

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का मतदान 25 जून,1 जुलाई और 7 जुलाई को संपन्न होंगे। जबकि विकासखंड मुख्यालय पर मतों की गणना 28 जून, 4 और 11 जुलाई को होगी। परिणामों की घोषणा 14 व 15 जुलाई घोषित किए जाएंगे।

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