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MP News: कोल्ड्रिफ कफ सिरप कांड, 25 बच्चों की मौत पर कांग्रेस का खुलासा! जीतू पटवारी ने कर दी ये बड़ी मांग

मध्य प्रदेश में जहरीली कोल्ड्रिफ कफ सिरप से मासूम बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। अब तक 25 से अधिक बच्चों की जान जा चुकी है, लेकिन राज्य सरकार की लापरवाही ने इस त्रासदी को और गहरा दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे "सरकारी हत्या" करार दिया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल का तत्काल इस्तीफा, ड्रग कंट्रोलर पर एफआईआर और पूरे मामले की CBI जांच की मांग की।

पटवारी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के पीए आदित्य सिंह और सोनू राणा नामक व्यक्ति की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कंपनियों के बीच सेटिंग का पर्दाफाश हो। कांग्रेस ने राज्य के सभी जिलों में अस्पतालों के बाहर उपवास और धरना देने की घोषणा की है।

Congress launches scathing target on Coldrif cough syrup scandal Jitu Patwari demands resignation

यह कांड मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्णा जिलों में फैला हुआ है, जहां तमिलनाडु की श्रीसन फार्मास्युटिकल्स द्वारा निर्मित कोल्ड्रिफ कफ सिरप में 46.2% डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) - एक जहरीला औद्योगिक रसायन - पाया गया। DEG, जो एंटीफ्रीज और पेंट में इस्तेमाल होता है, किडनी फेलियर का कारण बनता है। 3 सितंबर को पहली मौत के बाद भी 8 मौतों तक कोई पोस्टमॉर्टम या विभागीय बैठक नहीं हुई। 19 सितंबर को नागपुर लैब की रिपोर्ट आने के बावजूद मंत्री त्योहार मना रहे थे। पटवारी ने कहा, "यह बीमारी नहीं, गैर-इरादतन हत्या है। सरकार सो रही है, जबकि 500 से अधिक बोतलें गायब हैं।"

घटना ने पूरे देश में सनसनी फैला दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 10 अक्टूबर को CBI जांच की याचिका खारिज कर दी, लेकिन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को नोटिस जारी किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एडवाइजरी जारी की है कि बच्चों को कफ सिरप सावधानी से दें।

घटना का पूरा घटनाक्रम: सितंबर से मौतों का सिलसिला, रिपोर्ट आने पर भी चुप्पी

यह कांड 3 सितंबर 2025 को छिंदवाड़ा के परासिया में शुरू हुआ, जब एक बच्चे की मौत हुई। डॉ. प्रवीण सोनी के क्लिनिक से इलाज कराने वाले बच्चों को कोल्ड्रिफ सिरप दिया गया, जिसके कुछ घंटों बाद उनकी किडनी फेल हो गई। शुरुआत में इसे वायरल बीमारी बताया गया, लेकिन 8 मौतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। 19 सितंबर को महाराष्ट्र की नागपुर लैब ने रिपोर्ट भेजी, जिसमें DEG की मौजूदगी की पुष्टि हुई।

तारीख,घटना

  • 3 सितंबर,"पहली मौत, परासिया में।"
  • 4-5 अक्टूबर,"11 मौतें, डॉ. सोनी गिरफ्तार। बैतूल में 2 और मौतें।"
  • 8 अक्टूबर,"20 मौतें (छिंदवाड़ा 17, बैतूल 2, पांढुर्णा 1)। कंपनी मालिक रंगनाथन गिरफ्तार।"
  • 9-10 अक्टूबर,21-25 मौतें। सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज।
  • 11 अक्टूबर,"पटवारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस का आंदोलन।"

मध्य प्रदेश सरकार ने 5 अक्टूबर को सिरप पर बैन लगाया और SIT गठित की। तमिलनाडु ने कंपनी का लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की। लेकिन पटवारी ने कहा, "158 बोतलों का रिकॉर्ड है, बाकी 500+ कहां गयीं? SIT को जवाब दो।" राजस्थान में भी 2 मौतें हुईं, कुल 18-20।

सोनू राणा और आदित्य सिंह की भूमिका: पटवारी का विस्फोटक आरोप, तस्वीरें सार्वजनिक

पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल (उपमुख्यमंत्री) के साथ सोनू राणा की तस्वीरें दिखाईं। उन्होंने दावा किया कि सोनू राणा स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कंपनियों के बीच डील फिक्स करने का काम करता है। "क्या यह संयोग है कि जहरीली दवा बिक रही है और ये लोग फोटो खिंचवा रहे हैं?" पटवारी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के पीए आदित्य सिंह का नाम भी लिया, कहा कि उनकी भूमिका की जांच हो।

हालांकि, सोनू राणा की पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी - क्या वे कोई बिचौलिया हैं या विभागीय व्यक्ति? पटवारी ने कहा, "यह भ्रष्ट तंत्र है। CBI जांच से सच्चाई सामने आएगी।" यह आरोप राजनीतिक घमासान तेज कर सकता है, क्योंकि इससे पहले कांग्रेस ने स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार के कई दावे किए हैं।

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