एक्शन मोड में सीएम शिवराज, जानिए झाबुआ एसपी के बाद कलेक्टर सोमेश मिश्रा को क्यों हटाया ?
भोपाल, 20 सितंबर: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब एक्शन मोड में नजर आ रहे है। झाबुआ के गालीबाज एसपी के अरविंद तिवारी को हटाने के बाद अब कलेक्टर सोमेश मिश्रा को भी हटा दिया गया हैं । 24 घंटे के भीतर झाबुआ जिले के दोनों अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई सियासी और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। इंदौर संभाग की राजस्व अपर आयुक्त रजनी सिंह को कलेक्टर की कमान सौंपी गई है।

प्रशासनिक महकमे में हडकंप
मप्र के प्रशासनिक गलियारों में पिछले दो दिनों में भूचाल सा आ गया हैं। इसकी वजह सीएम शिवराज सिंह चौहान का एक्शन मोड में है। शुरुआत मालवा अंचल के झाबुआ जिले से हुई है । मंगलवार को सीएम ने जिले के कलेक्टर सोमेश मिश्रा को हटा दिया है। उनकी जगह इंदौर संभाग में अपर आयुक्त राजस्व के तौर पर नियुक्त रजनी सिंह को झाबुआ कलेक्टर बना दिया गया।

एक दिन पहले एसपी को हटाया फिर सस्पेंड किया
इससे एक दिन पहले जिले के एसपी अरविंद तिवारी को पहले हटाने के आदेश दिए फिर कुछ देर बाद सीएम ने उन्हें सस्पेंड भी कर दिया था। एसपी ने एक छात्र को गाली दी थी। जिसका ऑडियो सीएम के पास पहुंचा। परीक्षण कराने पर ऑडियो में अरविंद तिवारी की ही आवाज पाई गई। बताया जाता है कि ऑडियो में एक छात्र सुरक्षा की मांग कर रहा था। जिस पर एसपी गाली देने के साथ उससे अभद्र भाषा में बोल रहे थे।

कलेक्टर के खिलाफ कई शिकायतों की चर्चा
बताया जा रहा है कि सोमवार को ही मुख्यमंत्री झाबुआ जिले के दौरे पर रहे। आदिवासी इस जिले में आम जनता से जुड़ी कई शिकायतें हुई। इसके साथ ही कई दिनों से जिले के विभिन्न विभागों के लचर रवैये की वजह से सरकार की भी किरकिरी हो रही थी। मुख्यमंत्री के झाबुआ प्रवास के दौरान शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित कई हितग्राहियों ने भी कलेक्टर की शिकायत की। अधिकारियों पर रिश्वत मांगने के भी आरोप लगाए थे।

कई और जिलों के अफसर निशाने पर
पिछले तीन महीनों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सुबह से ही विभिन्न जिलों की समीक्षा करते देखे गए है। जिसमें जहां कामियां नजर आ रही थी, उसके बारे में संबंधित विभाग के अफसरों को भी चेतावनी दी जाती रही। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के दर्जन भर से ज्यादा जिले के कई अफसर, सीएम के निशाने पर है । सरकारी योजनाओं का ठीक ढंग से क्रियान्वयन ना होना और जनता से जुड़ी लंबित शिकायतें प्रमुख है ।

पोषण आहार और यूरिया घोटाला भी आया सामने
दरअसल पिछले एक महीने में सरकारी अफसरों की हद दर्जे की लापरवाही के कई बड़े मामले सामने आए है। जिसमें हाल ही में पोषण आहार वितरण योजना से संबंधित अकाउंटेंट जनरल की र्चौकाने वाली रिपोर्ट भी रही । इसके बाद जबलपुर जिले में करोड़ों रुपए के यूरिया परिवहन में सामने आई गड़बड़ी से प्रदेश सरकार अभी तक विपक्ष के आरोपों से घिरी है। जानकर बताते है कि ऐसे ही कई बड़े मामलों के बाद सीएम ने अब तय कर लिया है कि सरकारी महकमों में लापरवाही किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।












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