MP News: हैंडीक्राफ्ट ब्रांड्स को CM मोहन यादव की बड़ी सौगात, मृगनयनी से प्राकृत तक हर जिले में शॉप

मध्य प्रदेश के ग्रामीण कारीगरों और हस्तशिल्प उद्योग के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ी सौगात का ऐलान किया है। राज्य के प्रमुख हैंडीक्राफ्ट ब्रांड्स - मृगनयनी, विंध्या वैली, कबीरा और प्राकृत - के विक्रय केंद्रों का विस्तार अब जिला स्तर तक किया जाएगा।

यह फैसला प्रदेश के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय कारीगरों को बाजार देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विस्तार से न केवल 50 हजार से अधिक रोजगार सृजित होंगे, बल्कि MP की हस्तकला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिलेगी। यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी और कारीगरों की आय में कमी की शिकायतें बढ़ रही हैं।

CM Mohan Yadav big gift to handicraft brands shops in every district from Mriganyani to Prakrit

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में एक कार्यक्रम में यह घोषणा की, जहां उन्होंने कहा, "हमारे ब्रांड्स मृगनयनी, विंध्या वैली, कबीरा और प्राकृत प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। इनके विक्रय केंद्रों को जिला स्तर तक विस्तारित कर हम ग्रामीण कारीगरों को सीधा बाजार देंगे। इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि पर्यटन और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।" यह योजना 2026 से लागू होगी और पहले चरण में सभी 52 जिलों में कम से कम एक-एक विक्रय केंद्र खोला जाएगा।

ब्रांड्स का महत्व: MP की हस्तकला की पहचान

मध्य प्रदेश सरकार के हैंडीक्राफ्ट ब्रांड्स ग्रामीण कारीगरों की मेहनत का नतीजा हैं। इनका विस्तार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगा:

  • मृगनयनी: हैंडलूम और टेक्सटाइल ब्रांड। चंदेरी, महेश्वरी साड़ियां, बैग आदि। कारीगर: 10 हजार+।
  • विंध्या वैली: विंध्य क्षेत्र की हस्तकला। लकड़ी के शिल्प, टेराकोटा, बांस उत्पाद।
  • कबीरा: आदिवासी कला पर आधारित। गोंड पेंटिंग, बैल मेटल क्राफ्ट, ट्राइबल ज्वेलरी।
  • प्राकृत: प्राकृतिक उत्पाद। हर्बल कॉस्मेटिक्स, ऑर्गेनिक फूड, आयुर्वेदिक सामग्री।

इन ब्रांड्स से 2 लाख+ कारीगर जुड़े हैं। विस्तार से जिला स्तर पर शॉप खुलने से स्थानीय बाजार मिलेगा, ट्रांसपोर्टेशन लागत कम होगी।

योजना की डिटेल: 52 जिलों में विक्रय केंद्र, 50 हजार रोजगार

  • विस्तार प्लान: हर जिले में कम से कम एक केंद्र। बड़े जिलों में 2-3।
  • लागत: 500 करोड़ का अनुमानित बजट (2026-2028)।
  • रोजगार: 50 हजार+ (कारीगर, सेल्स, लॉजिस्टिक्स)।
  • सुविधाएं: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, एक्सपोर्ट प्रमोशन, ट्रेनिंग सेंटर।
  • समर्थन: MSME, हैंडीक्राफ्ट बोर्ड से सहयोग।

मंत्री ने कहा, "कारीगरों को ट्रेनिंग और मार्केटिंग सपोर्ट मिलेगा। ई-कॉमर्स से वैश्विक पहुंच।"
कारीगरों की उम्मीद: "बाजार मिलेगा, आय दोगुनी होगी"

सीहोर के एक कारीगर ने कहा, "दूर शहर जाना पड़ता है। जिला स्तर पर शॉप से आसानी होगी।" उज्जैन की महिला कारीगर: "मृगनयनी से जुड़ी हूं, विस्तार से रोजगार बढ़ेगा।"

कांग्रेस का तंज

कांग्रेस ने कहा, "पुरानी योजनाओं का नया नाम। पहले क्यों नहीं किया?" BJP: "मोहन सरकार ग्रामीण विकास पर फोकस कर रही।"

ग्रामीण MP की नई उड़ान

CM मोहन यादव का ऐलान MP की हस्तकला को नई ऊंचाई देगा। मृगनयनी से प्राकृत तक - हर जिले में शॉप से कारीगरों की किस्मत चमकेगी। 50 हजार रोजगार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। क्या यह लक्ष्य हासिल होगा? वनइंडिया हिंदी अपडेट लाता रहेगा।

(रिपोर्ट: वनइंडिया हिंदी, भोपाल ब्यूरो।

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