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MP में प्रॉपर्टी खरीदना हुआ आसान: अब रजिस्ट्री के साथ ही होगा नामांतरण, 30 दिन में अपडेट होगा रिकॉर्ड

Buying Property: मध्य प्रदेश में मकान, दुकान, प्लॉट या जमीन खरीदने-बेचने की प्रक्रिया में अब बड़ा बदलाव आने वाला है। अप्रैल 2026 से रजिस्ट्री के समय ही नामांतरण (म्यूटेशन) का विकल्प मिलेगा। खरीदार 'हां' कहेगा तो रजिस्ट्री के साथ ही तहसील कार्यालय में प्रकरण अपने आप बढ़ जाएगा और तय समय में नामांतरण होकर राजस्व रिकॉर्ड अपडेट हो जाएगा। अलग से तहसील जाने, आवेदन देने और महीनों इंतजार करने की जरूरत नहीं रहेगी।

यह सुविधा केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के तहत लागू की जा रही है। प्रदेश सरकार ने पिछले करीब एक साल से इसकी तैयारी की है। कृषि भूमि में यह व्यवस्था पहले से शुरू हो चुकी है, अब अब गैर-कृषि (शहरी-ग्रामीण प्रॉपर्टी) में भी जमीनी काम शुरू हो रहा है। इस माह के अंत तक पूरी प्रक्रिया लागू कर दी जाएगी।

Buying property in MP Now name transfer will happen along with registry effective April 2026

कैसे होगा ऑटो नामांतरण? प्रक्रिया समझिए

रजिस्ट्री के समय सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में खरीदार से पूछा जाएगा: "क्या आप रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण भी चाहते हैं?" अगर 'हां' कहा तो रजिस्ट्री दस्तावेज तहसील कार्यालय को डिजिटल रूप से भेज दिए जाएंगे।
तहसील में प्रकरण अपने आप बन जाएगा और निर्धारित समय (अधिकतम 30-45 दिन) में नामांतरण पूरा हो जाएगा।

खसरा-खतौनी में नया मालिक का नाम अपडेट हो जाएगा।

खरीदार को अलग से फॉर्म भरने, फोटो लगाने या तहसील चक्कर लगाने की जरूरत नहीं रहेगी। आधार लिंकिंग और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन से फर्जी नामांतरण और डुप्लिकेट रजिस्ट्री रुक जाएंगे।

क्या-क्या लाभ होंगे?

समय की बचत - पहले नामांतरण में 6 महीने से 2 साल तक लग जाते थे, अब रजिस्ट्री के 30-45 दिन में पूरा। फर्जीवाड़ा रुकेगा - एक ही डेटाबेस से जुड़ने से एक ही जमीन को दो-तीन बार बेचने की घटनाएं लगभग खत्म हो जाएंगी।

विवाद कम होंगे - खसरा-खतौनी और रजिस्ट्री दस्तावेजों में अंतर खत्म होगा। जमीन के विवादों में 60-70% कमी आने की उम्मीद।

सुरक्षा बढ़ेगी - आधार और बायोमेट्रिक से असली मालिक ही सौदा कर पाएगा।
सरकार को भी फायदा - स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री फीस में पारदर्शिता आएगी, अवैध लेनदेन रुकेगा।

अभी तक की प्रगति और समयसीमा

कृषि भूमि में ऑटो नामांतरण पहले से लागू।
गैर-कृषि (शहरी-ग्रामीण प्रॉपर्टी) के लिए तहसील और सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है। अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में लागू।

2026 के अंत तक 100% तहसीलों और पंजीयन कार्यालयों को डिजिटल रूप से जोड़ दिया जाएगा। राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर केंद्र से विशेष फंड भी प्राप्त किया है।

लोगों की प्रतिक्रिया और विशेषज्ञों का मत

भोपाल, इंदौर और ग्वालियर के ज्वेलर्स और रियल एस्टेट कारोबारियों ने इसे स्वागत योग्य बताया है। उनका कहना है कि नामांतरण में देरी से अक्सर खरीदार-विक्रेता में विवाद हो जाता था। अब प्रक्रिया आसान और तेज होगी। जमीन विवाद विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में 60-70% जमीन विवाद रिकॉर्ड में अंतर के कारण होते हैं। एक ही प्लेटफॉर्म से जुड़ने से यह समस्या लगभग खत्म हो जाएगी।

यह बदलाव डिजिटल इंडिया और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में बड़ा कदम है। अप्रैल से प्रदेश में मकान-दुकान-जमीन खरीदने-बेचने की प्रक्रिया अब और आसान और सुरक्षित हो जाएगी।

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