MP News: भोपाल से बीजेपी सांसद आलोक शर्मा का विवादित बयान, बोले- ये भोपाल मुसलमानों का नहीं है
भोपाल से सांसद चुने जाने के बाद आलोक शर्मा लगातार अपने बयानों की वजह से सुर्खियों में बने हुए हैं। कभी धार्मिक कटाक्ष तो कभी विवादित टिप्पणियां-आलोक शर्मा का अंदाज बताता है कि वे बयानबाज़ी के जरिए राजनीतिक बहस को गर्माए रखना चाहते हैं। इस बार उन्होंने एक मटकी फोड़ कार्यक्रम में ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी हलचल मचा दी है।
करोंद इलाके में आयोजित मटकी फोड़ कार्यक्रम में मंच से बोलते हुए आलोक शर्मा ने कहा- "ये भोपाल मुसलमानों का भोपाल नहीं है। ये भोपाल सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य, प्रतिहार वंश, राजा भोज और रानी कमलापति का भोपाल है। हमें सनातन संस्कृति की रक्षा करनी होगी। लव जिहाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"

इस बयान के साथ उन्होंने लव जिहाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही और शारिक मछली से लेकर प्यारे मियां जैसे मामलों का जिक्र किया। इस बयान ने न केवल सियासी हलचल मचाई, बल्कि सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कांग्रेस ने इसे देश-विरोधी और विभाजनकारी करार दिया, जबकि कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने इसका समर्थन किया। यह बयान आलोक शर्मा की उन टिप्पणियों की कड़ी में है, जो पहले भी सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के लिए आलोचनाओं का शिकार हो चुकी हैं।
आलोक शर्मा का विवादों से नाता
आलोक शर्मा, जो 2024 में भोपाल से पहली बार सांसद चुने गए, इससे पहले भोपाल के मेयर रह चुके हैं। उनके बयान अक्सर सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने के लिए आलोचनाओं का शिकार होते रहे हैं। मई 2025 में उन्होंने लव जिहाद के आरोपियों की नसबंदी की मांग की थी, जिस पर भारी विवाद हुआ। इसके बाद जून 2025 में उन्होंने भोपाल के जिम ट्रेनर्स को निशाना बनाते हुए कहा था कि मुस्लिम ट्रेनर्स की सूची बनाकर पुलिस को सौंपी जाएगी, क्योंकि वे कथित तौर पर लव जिहाद में शामिल हैं।
इस बार के बयान में उन्होंने भोपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को जोड़ते हुए मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया। उन्होंने शारिक मछली और प्यारे मियां जैसे मामलों का उल्लेख किया, जो भोपाल में हाल के वर्षों में लव जिहाद के आरोपों से जुड़े रहे हैं। शारिक मछली के मामले में एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया था, और प्यारे मियां के मामले में भी कई गंभीर आरोप सामने आए थे।
कांग्रेस का तीखा पलटवार
आलोक शर्मा के इस बयान पर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "BJP की सोच देश-विरोधी है। आलोक शर्मा सांसद बने हैं या केवल बयानबाज? भोपाल सभी धर्मों और समुदायों का है। इस तरह के बयान समाज को बांटने और नफरत फैलाने का काम करते हैं।"
कांग्रेस विधायक और भोपाल सेंट्रल से विधायक आरिफ मसूद ने भी इस बयान की निंदा की। उन्होंने कहा, "भोपाल हर धर्म, हर वर्ग का है। यह सांप्रदायिक नफरत फैलाने का समय नहीं है। अपराधी का कोई धर्म नहीं होता।" मसूद ने यह भी कहा कि ऐसे बयान केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए दिए जाते हैं।
विश्वास सारंग का समर्थन
मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने आलोक शर्मा के बयान का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा, "हम सालों से कहते आ रहे हैं कि भोपाल पर मुगलों और नवाबों ने कब्जा किया था। यह शहर नवाबों का नहीं, बल्कि राजा भोज और रानी कमलापति का है। आलोक शर्मा ने सही कहा कि हमें अपनी सनातन संस्कृति की रक्षा करनी है।" सारंग ने यह भी कहा कि लव जिहाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है और राज्य सरकार इस दिशा में काम कर रही है।
पहले भी उठा है नवाबों पर विवाद
यह पहली बार नहीं है जब भोपाल में BJP नेताओं ने नवाबों को लेकर विवादित टिप्पणियां की हैं। इससे पहले भोपाल नगर निगम के सभापति ने भोपाल के नवाबों को "गद्दार" करार दिया था, जिस पर जमकर हंगामा हुआ था। इस बयान ने भी सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने का काम किया था। आलोक शर्मा का यह बयान उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जहां BJP नेता भोपाल की ऐतिहासिक पहचान को सनातन संस्कृति से जोड़ते हुए मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हैं।
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आलोक शर्मा के इस तरह के बयान BJP की उस रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत धार्मिक ध्रुवीकरण के जरिए एक विशेष वोट बैंक को मजबूत किया जाता है। प्रोफेसर अजय मिश्रा, जो भोपाल में राजनीतिक विज्ञान के विशेषज्ञ हैं, ने कहा, "ऐसे बयान तब सामने आते हैं जब कोई नेता अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना चाहता है या किसी विशेष समुदाय का वोट हासिल करना चाहता है। लेकिन यह समाज में नफरत और विभाजन को बढ़ावा देता है।"
लव जिहाद का मुद्दा और भोपाल
लव जिहाद का मुद्दा मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र रहा है। मई 2025 में आलोक शर्मा ने लव जिहाद के आरोपियों की नसबंदी की मांग की थी, जिसके बाद CPI(M) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। इसके अलावा, जून 2025 में शर्मा ने भोपाल के जिम ट्रेनर्स को निशाना बनाते हुए कहा था कि मुस्लिम ट्रेनर्स की सूची बनाकर पुलिस को सौंपी जाएगी।
इन बयानों के पीछे भोपाल में हाल के कुछ आपराधिक मामले हैं, जिनमें शारिक मछली और प्यारे मियां जैसे नाम शामिल हैं। इन मामलों में आरोपियों पर हिंदू लड़कियों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण और धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने के आरोप लगे थे। इन मामलों ने लव जिहाद के मुद्दे को और हवा दी, जिसे BJP ने अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाया।
सामाजिक प्रभाव और सवाल
आलोक शर्मा का यह बयान भोपाल जैसे शहर में, जो अपनी गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए जाना जाता है, गंभीर सवाल उठाता है। भोपाल में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, और अन्य समुदाय वर्षों से मिलजुलकर रहते आए हैं। ऐसे बयान न केवल सामाजिक एकता को खतरे में डालते हैं, बल्कि युवाओं के बीच नफरत और अविश्वास को भी बढ़ावा दे सकते हैं।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता शबाना खान ने कहा, "भोपाल का इतिहास सभी समुदायों का है। नवाबों ने भी इस शहर को अपनी संस्कृति और विकास से समृद्ध किया। इसे केवल एक समुदाय से जोड़ना गलत है।" दूसरी ओर, कुछ स्थानीय निवासियों का मानना है कि लव जिहाद जैसे मुद्दों पर सख्ती जरूरी है, लेकिन इसे सांप्रदायिक रंग देना उचित नहीं है।
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