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MP News: आखिर ऐसा क्या हुआ कि मध्य प्रदेश के मंत्री इंदर सिंह परमार को मांगनी पड़ी माफी, जानिए पूरा मामला

MP News: मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार (inder singh parmar) एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने समाज सुधारक राजा राम मोहन रॉय को 'अंग्रेजों का दलाल' बताकर राजनीतिक हंगामा मचा दिया।

बयान की कड़ी आलोचना होने के बाद रविवार को उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर सार्वजनिक माफी मांगी। इस घटना ने न केवल राज्य की राजनीति को गरमा दिया है, बल्कि इतिहास की व्याख्या और समाज सुधारकों की भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है।

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बिरसा मुंडा जयंती कार्यक्रम में विवादित बयान

शनिवार को आगर मालवा जिले के शुजालपुर में बिरसा मुंडा की जयंती पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया था। आदिवासी नायक बिरसा मुंडा को समर्पित इस आयोजन में हजारों लोग जुटे थे। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने संबोधन में बिरसा मुंडा के संघर्ष को रेखांकित करते हुए ब्रिटिश काल की शिक्षा नीतियों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने मिशनरी स्कूलों के माध्यम से धर्मांतरण का दुष्चक्र चलाया था, और राजा राम मोहन रॉय जैसे लोग इसमें सहयोगी की भूमिका निभाते थे।

मंत्री परमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "राजा राम मोहन रॉय अंग्रेजों के दलाल थे। उन्होंने बंगाल में अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा देकर समाज को बांटने का काम किया। बिरसा मुंडा ने इस साजिश को पहचाना और मिशनरी शिक्षा को त्यागकर अपने समुदाय की रक्षा की।" यह बयान वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया। कई यूजर्स ने इसे इतिहास की तोड़-मरोड़ वाली व्याख्या बताया, जबकि कुछ ने भाजपा की 'इतिहास पुनर्लेखन' की कोशिश करार दिया।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने आगे कहा कि देश को गलत इतिहास पढ़ाया गया है, और मूल कथाओं को तोड़ा-मरोड़ा गया है। उन्होंने बिरसा मुंडा को 'भगवान' कहकर उनकी स्वदेशी शिक्षा और आदिवासी संस्कृति की रक्षा के प्रयासों की सराहना की। लेकिन राजा राम मोहन रॉय पर यह टिप्पणी उनके पूरे संबोधन को विवादास्पद बना दिया।

कांग्रेस और सामाजिक संगठनों का तीखा विरोध

बयान के वायरल होते ही विपक्ष ने हमला बोल दिया। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इसे 'शर्मनाक' बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार इतिहास के महान सुधारकों को बदनाम कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता ने ट्वीट किया, "सती प्रथा, बाल विवाह और जातिवाद जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ लड़ने वाले राजा राम मोहन रॉय को 'दलाल' कहना न केवल अपमानजनक है, बल्कि भाजपा-आरएसएस की मानसिकता को उजागर करता है।

सामाजिक संगठनों ने भी निंदा की। ब्रह्म समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि रॉय ने 1829 में सती प्रथा के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, और उन्हें 'एजेंट' कहना ऐतिहासिक तथ्यों का अपमान है। इतिहासकारों ने भी मंत्री के बयान को 'एकतरफा' बताया, क्योंकि रॉय ने अंग्रेजी शिक्षा को महिलाओं और वंचितों के सशक्तिकरण के लिए इस्तेमाल किया था। एक प्रमुख इतिहासकार ने कहा, "यह बयान बिरसा मुंडा के योगदान को कमतर आंकने जैसा है, लेकिन रॉय को निशाना बनाना गलत है।"

सोशल मीडिया पर एक वायरल पोस्ट में पत्रकार काशिफ काकवी ने लिखा, "कल बिरसा मुंडा जयंती पर मंत्री ने रॉय को दलाल कहा, आज पलट गए। यह है भाजपा का इतिहास दृष्टिकोण-सावरकर देशभक्त, रॉय एजेंट।" इस पोस्ट को हजारों व्यूज मिले।

माफी का वीडियो: 'त्रुटिवश निकल गए शब्द, प्रायश्चित करता हूं'

विवाद बढ़ते देख रविवार को मंत्री परमार ने शुजालपुर से एक वीडियो जारी किया। भावुक स्वर में उन्होंने कहा, "कल आगर में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में उनके जीवन पर बोलते समय संदर्भों के कारण राजा राम मोहन रॉय जी के संबंध में त्रुटिवश मेरे मुंह से गलत शब्द निकल गए। प्रसिद्ध समाज सुधारक श्री राजा राम मोहन रॉय जी ने अपने काल में समाज सुधार का बहुत काम किया है। उनके लिए त्रुटिवश निकले शब्दों पर मुझे दुःख है। मैं प्रायश्चित करता हूं।"

वीडियो में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था, बल्कि ब्रिटिश काल की साजिशों पर चर्चा करना था। ट्विटर पर जारी इस वीडियो को भाजपा समर्थकों ने सराहा, लेकिन विपक्ष ने इसे 'दबाव में माफी' बताया।

राजा राम मोहन रॉय: विवाद के केंद्र में वह महान सुधारक

राजा राम मोहन रॉय (1772-1833) को आधुनिक भारत का जनक कहा जाता है। उन्होंने ब्रह्म समाज की स्थापना की, सती प्रथा के खिलाफ मुहिम चलाई, महिलाओं की शिक्षा और संपत्ति अधिकारों की वकालत की। अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा देने के कारण कुछ राष्ट्रवादी उन्हें 'वेस्टर्नाइजर' मानते हैं, लेकिन उनके योगदान को अमूल्य माना जाता है। बिरसा मुंडा (1875-1900) आदिवासी विद्रोह के प्रतीक थे, जिन्होंने 'उलगुलान' आंदोलन से ब्रिटिश शोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ी। मंत्री का बयान इन दोनों की तुलना को जन्म देता है, जहां बिरसा को स्वदेशी नायक और रॉय को 'सहयोगी' बताया गया।

इंदर सिंह परमार: विवादों से घिरे हिंदुत्ववादी नेता

मंत्री परमार कट्टर हिंदूवादी नेता के रूप में जाने जाते हैं। बचपन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े, वे 2013 में कालापीपल से और 2018 में शुजालपुर से विधायक बने। पिछली शिवराज सरकार में स्कूल शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। इससे पहले उन्होंने 'भारत की खोज वास्को डा गामा ने नहीं, बल्कि व्यापारी चंदन ने की' जैसे बयान दिए थे, जो विवादास्पद रहे। उच्च शिक्षा विभाग में वे 'इतिहास पुनर्लेखन' पर जोर देते हैं, जिसे विपक्ष 'सांप्रदायिक एजेंडा' कहता है।

भाजपा पर सवाल, विपक्ष को मौका

यह विवाद मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार के लिए चुनौती बन गया है। चुनावी साल में आदिवासी और दलित वोट बैंक को देखते हुए बिरसा मुंडा जैसे नायकों का सम्मान महत्वपूर्ण है, लेकिन रॉय जैसे सुधारकों पर हमला विपक्ष को हथियार देता है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भी भाजपा को घेरा। मुख्यमंत्री कार्यालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन भाजपा आंतरिक रूप से मंत्री को फटकार चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना 'इतिहास की राजनीति' को उजागर करती है, जहां राष्ट्रवाद की परिभाषा पर बहस तेज हो रही है।

बहस जारी, सावधानी की जरूरत

मंत्री की माफी के बाद विवाद कुछ शांत हुआ है, लेकिन सोशल मीडिया पर चर्चा जारी है। इतिहासकारों ने अपील की कि सार्वजनिक मंचों पर तथ्यों की सत्यता जांचनी चाहिए। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि राजनीति और इतिहास का मिश्रण कितना संवेदनशील हो सकता है। मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग के अन्य कदमों पर भी अब नजर रहेगी। जय बिरसा! जय सनातन!

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