MP Election 2023: अटलबिहारी बाजपेयी के चुनाव से तय हो गया था बुधनी विधायक शिवराज का संसद का सफर
Budhni Assembly News: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपनी उम्मीदवारों की चौथी लिस्ट जारी कर दी है। एक बार फिर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधनी विधानसभा क्षेत्र से ही चुनाव लड़ेंगे।
"अंधेरा छटेगा सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा" देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी बाजपेयी के कहे इन शब्दों को सुनने के लिए अंधेरे में भी हजारों लोग जमा हो जाते थे। जी हां हम बात कर रहे हैं सन 1990 के आम चुनावों वे समय की जब अटलजी ने विदिशा-रायसेन संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था।

चुनाव प्रचार के दौरान वे क्षेत्र के रायसेन, विदिशा, गंजबासौदा, देहगांव, उदयपुरा सहित भोजपुर क्षेत्र में वे खुद आमसभा को सम्बोधित करने पहुंचे थे। तब बुधनी से विधायक शिवराज सिंह चौहान ने उनके चुनाव में सभाओं को सम्बोधित करने की मुख्य जिम्मेदारी संभाल रखी थी।ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली सभाओं में शाम के वक्त जब बिजली चली जाती थी और अंधेरा छा जाता जाता था तब भी सभा स्थल तक हजारों लोग अटल-शिवराज का भाषण सुनने पहुँच जाया करते थे। अटल जी के इसी चुनाव से शिवराज उनकी पहली पसंद बन गए थे और बाद में अटल जी के इस्तीफे से 1991 में खाली हुई सीट से शिवराज ने चुनाव लडा और उनका संसद का सफर शुरू हुआ। अटलजी के सरल-सहज व्यक्तित्व और वाक शैली से प्रभावित विपक्ष के नेता और कार्यकर्ताओं की टीम भी उनके भाषण सुनने पहुँचती थी। इन लोगों का मानना होता था कि अटलजी जैसे व्यक्तित्व कम ही होते हैं और वे क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं यह गर्व की बात है और उन्हें देखना व सुनना सौभाग्य है।
कहां मूछ का बाल और कहां पूंछ का बाल
अटल जी चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा उस समय हंसते थे जब भाषण देते समय शिवराज जी कहते थे कि अटल जी के व्यक्तित्व से किसी की तुलना सम्भव ही नहीं है। शिवराज जी जब अटल जी की तरफ इशारा करके बोलें कि कहाँ मूँछ का बाल और प्रतिद्वंद्वी दल की तरफ इशारा कर बोले कहाँ पूछ का बाल...तो अटल जी जोर से हंसे और बोले क्या बोलता है भाई

अटल के उत्तराधिकारी बने थे शिवराज
शिवराज सिंह चौहान 1990 में बुधनी से विधायक थे बाद में लोकसभा चुनाव में उन्होंने विदिशा से प्रत्याशी अटल जी के लिए खूब भाषण मंच से दिए। यहां से सीधे स्व बाजपेयी की पसंद में शामिल हर शिवराज ही बाद में उपचुनाव में प्रत्याशी बने और फिर लगातार 5 चुनाव जीते। उनके मुख्यमंत्री बनने पर उनके उत्तराधिकारी के रूप में उनके सबसे भरोसेमंद और तब सरकार में राज्य मंत्री रहे रामपाल सिंह ने उदयपुरा विधानसभा सीट से इस्तीफा देकर चुनाव लड़े और जीते।
पूर्व राष्ट्रपति के बेटे को शिवराज ने साढ़े तीन लाख से अधिक मतों से हराया
सन 91 के उपचुनाव से शिवराज सिंह की जीत का क्रम 2004 तक जारी रहा। शिवराज के विजय रथ को रोकने कांग्रेस ने 1998 में पूर्व राष्ट्रपति डॉ शंकरदयाल शर्मा के बेटे आशुतोष दयाल शर्मा को प्रत्याशी बनाया लेकिन वे शिवराज के सामने केवल 2 लाख 36 हजार वोट हासिल कर पाए जानकी शिवराज को 3 लाख 74 हजार वोट मिले। शिवराज सिंह ने इस सीट से पूर्व सांसद प्रतापभानु शर्मा, पूर्व मंत्री जसवंत सिंह को बड़े अंतरों से हराया।
लेखक- अम्बुज माहेश्वरी
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