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MP News: भोपाल के 6 अस्पतालों पर बंद होने का खतरा, लाइसेंस रिन्यू नहीं कराया तो 1 अप्रैल से लग सकता है ताला

Bhopal Health Department: भोपाल में स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों पर सख्ती बढ़ा दी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय ने शहर के 6 प्रमुख निजी अस्पतालों को नोटिस जारी किया है, क्योंकि इन अस्पतालों ने निर्धारित समय सीमा में अपने लाइसेंस का नवीनीकरण (रिन्यूअल) नहीं कराया।

अगर ये अस्पताल 31 मार्च 2026 तक रिन्यूअल नहीं कराते, तो 1 अप्रैल 2026 से ये संचालित नहीं हो सकेंगे। यानी इन अस्पतालों पर ताला लग सकता है, और बिना वैध लाइसेंस के इलाज करना कानूनी रूप से अपराध माना जाएगा।
कौन से अस्पताल प्रभावित?

Bhopal Health Department issues notice to 6 hospitals asks them to renew their licenses by March 31

सीएमएचओ कार्यालय द्वारा जारी नोटिस में इन अस्पतालों के नाम हैं:

  • जहरा अस्पताल (लालघाटी स्क्वायर क्षेत्र)
  • सरदार पटेल अस्पताल
  • राय हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर
  • हेल्थ केयर हॉस्पिटल
  • भगवती गौतम अस्पताल
  • सचिन ममता अस्पताल

ये सभी अस्पताल भोपाल के विभिन्न इलाकों में स्थित हैं और स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं, खासकर सामान्य इलाज, आपातकालीन सेवाएं और छोटी-मोटी सर्जरी के लिए।

क्यों जारी किया गया नोटिस?

मध्य प्रदेश के नर्सिंग होम एवं क्लिनिकल स्थापना (पंजीयन एवं लाइसेंसिंग) अधिनियम, 1973 के तहत हर निजी अस्पताल को हर तीन साल में लाइसेंस रिन्यू कराना अनिवार्य है। लाइसेंस आमतौर पर 1 अप्रैल से शुरू होकर तीन साल के लिए वैध रहता है। इस बार 2026 के लिए रिन्यूअल की अंतिम तिथि बीत चुकी है, लेकिन इन अस्पतालों ने आवेदन नहीं किया।

सीएमएचओ डॉ मनीष शर्मा (या वर्तमान अधिकारी) के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि बार-बार याद दिलाने के बावजूद इन अस्पतालों ने अनदेखी की। अब नोटिस में स्पष्ट चेतावनी है कि समय पर रिन्यूअल नहीं होने पर अस्पताल सील कर दिया जाएगा, और संचालन करने पर कानूनी कार्रवाई होगी-जिसमें जुर्माना, लाइसेंस रद्द करना और आपराधिक मुकदमा शामिल हो सकता है।

आम लोगों पर क्या असर?

भोपाल जैसे शहर में जहां सरकारी अस्पतालों पर बोझ पहले से ज्यादा है, इन निजी अस्पतालों का बंद होना मरीजों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। लालघाटी, जहांगीराबाद, कोहेफिजा जैसे इलाकों के निवासी इन अस्पतालों पर निर्भर हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया, "जहरा अस्पताल में मेरी मां का इलाज चल रहा था, अब क्या होगा? सरकारी अस्पतालों में बेड नहीं मिलते।" छोटे-मोटे ऑपरेशन, डिलीवरी, डायबिटीज-बीपी जैसी पुरानी बीमारियों के लिए ये अस्पताल सस्ते और सुविधाजनक विकल्प हैं।

अगर ये बंद हुए तो मरीजों को दूर के अस्पतालों में जाना पड़ेगा, खर्च बढ़ेगा और आपात स्थिति में देरी हो सकती है।
विभाग का रुख और आगे की योजना

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। फर्जी या अनियमित अस्पतालों से पहले भी कई मामलों में कार्रवाई हुई है (जैसे जाबलपुर में 5 अस्पतालों के लाइसेंस रद्द, दमोह में फेक कार्डियोलॉजिस्ट मामले में सस्पेंड)।

सीएमएचओ ने स्पष्ट किया कि अस्पताल अभी भी रिन्यूअल के लिए आवेदन कर सकते हैं-अगर वे सभी कमी पूरी करेंगे (जैसे फायर एनओसी, पीसीबी क्लीयरेंस, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट आदि)। लेकिन 31 मार्च के बाद कोई छूट नहीं मिलेगी। विभाग ने कहा कि जल्द ही अन्य अस्पतालों की भी जांच होगी, जहां लाइसेंस या अन्य नियमों का उल्लंघन हो रहा है।

क्या कहते हैं अस्पताल मालिक?

अभी तक इन अस्पतालों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। कुछ सूत्रों के अनुसार, वे रिन्यूअल प्रक्रिया में देरी या दस्तावेजों की कमी का हवाला दे सकते हैं, लेकिन विभाग सख्त रुख अपनाए हुए है। यह कार्रवाई भोपाल में निजी स्वास्थ्य क्षेत्र पर एक बड़ा संदेश है-नियमों का पालन अनिवार्य है, अन्यथा बंदी तय है। मरीजों और अस्पतालों दोनों के लिए अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण हैं।

वन इंडिया हिंदी - ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट।

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