Bhopal: गैस कांड की 41वीं बरसी, कब मिलेगा उचित मुआवजा? क्या डाउ केमिकल कंपनी देगी पैसा? जानिए पूरी कहानी
Bhopal MP News: आज भोपाल गैस कांड की 41वीं बरसी है। 2-3 दिसंबर 1984 की उस भयावह रात को याद करते हुए भोपाल की सड़कें फिर से सिसकियां ले रही हैं। यूनियन कार्बाइड फैक्टरी से रिसे मिथाइल आइसोसायनेट (MIC) गैस ने आधी रात को शहर को जहर की चादर ओढ़ा दी। आधिकारिक आंकड़ों में 3,787 मौतें, लेकिन अनुमानित 15,000 से अधिक लोग मारे गए और 6 लाख से ज्यादा प्रभावित हुए।
41 साल बाद भी पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा नहीं मिला। 1989 में 470 मिलियन डॉलर (लगभग 715 करोड़ रुपये) का समझौता हुआ, लेकिन यह राशि अपर्याप्त साबित हुई। अब सवाल उठ रहा है - क्या डाउ केमिकल कंपनी (यूनियन कार्बाइड की मालिक) कभी पैसा देगी? या सरकार फिर से न्याय की खानापूर्ति करेगी?

वनइंडिया हिंदी की विशेष रिपोर्ट में जानिए इस कांड की पूरी कहानी, मुआवजे की लड़ाई, डाउ केमिकल का रुख और 2025 की ताजा अपडेट। पीड़ित संगठनों का कहना है, "41 साल बाद भी हम जहर पी रहे हैं। मुआवजा तो दूर, साफ पानी तक नहीं मिला।"
भोपाल गैस कांड: 41 साल पुरानी जख्म, जो आज भी रिस रहा है
3 दिसंबर 1984 की रात करीब 12:40 बजे यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (UCIL) की कीटनाशक फैक्टरी से 40 टन MIC गैस रिस गई। यह गैस इतनी जहरीली थी कि आधे शहर की आबादी सांस लेने लगी। अस्पताल भर गए, सड़कें लाशों से पट गईं। गैस ने आंखें जला दीं, फेफड़े सिकुड़ गए, त्वचा झुलस गई। अगले कुछ दिनों में हजारों की मौत हुई। लंबे समय में कैंसर, सांस की बीमारियां, जन्म दोष और मानसिक विकलांगता जैसी समस्याएं बढ़ीं।
फैक्टरी अमेरिकी कंपनी यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन (UCC) की सहायक थी, जो 50.9% हिस्सेदार थी। भारत सरकार UCC की 22% साझेदार थी। कारण: सुरक्षा लापरवाही - टैंक में पानी घुस गया, वाल्व फेल हो गए। लेकिन UCC ने इसे 'सबोटाज' बताया। तत्कालीन CEO वॉरेन एंडरसन को गिरफ्तार किया गया, लेकिन राजीव गांधी सरकार ने उन्हें जमानत पर रिहा कर अमेरिका भेज दिया। एंडरसन 2014 में मरा, लेकिन कभी मुकदमा न चला।
मुआवजे की शुरुआत: 470 मिलियन डॉलर का समझौता, जो अपर्याप्त साबित हुआ
1989 में भारत सरकार और UCC के बीच सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता से 470 मिलियन डॉलर (तब 715 करोड़ रुपये) का समझौता हुआ। यह 'पूर्ण और अंतिम' था। सरकार ने इसे 5,000 करोड़ रुपये का बताया, लेकिन वास्तव में यह कम था। प्रति मृतक 62,000 रुपये, घायल को 25,000-50,000 रुपये। लेकिन मौतें 3,787 बताई गईं, जबकि वास्तविक 15,000+ थीं।
वितरण: भोपाल गैस त्रासदी राहत विभाग ने 5.7 लाख दावों पर 1,549 करोड़ (मूल) + 1,517 करोड़ (प्रो-राटा) वितरित किए।
समस्या: मुद्रास्फीति के हिसाब से आज यह 4,000 करोड़ हो जाती। पीड़ितों को पर्याप्त नहीं मिला। कई ने 5,000 रुपये भी नहीं लिए, क्योंकि फॉर्म भरना मुश्किल था।
2001 में डाउ केमिकल ने UCC को खरीदा। डाउ ने कहा, "सभी दावे सेटल हो चुके।" लेकिन पीड़ितों का कहना है कि डाउ जिम्मेदार है, क्योंकि UCC की देनदारी उसके पास आई।
डाउ केमिकल का रुख: 'हम जिम्मेदार नहीं', लेकिन भारत में कारोबार जारी
डाउ केमिकल ने हमेशा इनकार किया। उनकी वेबसाइट पर लिखा है: "डाउ ने कभी फैक्टरी नहीं चलाई। 470 मिलियन सेटलमेंट से सब खत्म।" लेकिन पीड़ित संगठन (जैसे भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संघ) कहते हैं, "डाउ UCC की संपत्ति और देनदारी ले चुकी। वे भारत में कीटनाशक बेच रही हैं, जो MIC से जुड़े हैं।"
मांगें: 5 गुना मुआवजा (लगभग 3,500 करोड़ रुपये), साफ पानी, मेडिकल केयर।
डाउ का कारोबार: मोदी सरकार में डाउ का टर्नओवर बढ़ा। कोर्टेवा (डाउ की स्पिनऑफ) भारत में कीटनाशक बेच रही।
कानूनी लड़ाई: सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में 7,844 करोड़ की मांग खारिज की
पीड़ितों ने कई मुकदमे लड़े:
भोपाल जिला कोर्ट: UCC के खिलाफ आपराधिक मुकदमा (कुल हत्या) चल रहा। डाउ को समन, लेकिन वे आते नहीं।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट: पर्यावरण सफाई के लिए डाउ पर केस। 'पॉल्यूटर पे' सिद्धांत पर मुआवजा मांग।
सुप्रीम कोर्ट: 2023 में सरकार की याचिका खारिज, जो UCC/डाउ से अतिरिक्त 7,844 करोड़ मांग रही थी। कोर्ट ने कहा, "1989 समझौता अंतिम।"
2025 में अपडेट:
- जनवरी 2025: 337 टन विषैला कचरा पिथौरा भेजा गया, लेकिन अवशेष (900 टन राख) का क्या? पर्यावरण प्रदूषण की आशंका।
- दिसंबर 2025: राज्य सरकार हाईकोर्ट में नया समाधान पेश करने वाली। राख के निपटान पर सुनवाई।
- सुप्रीम कोर्ट: एंडरसन पर मुकदमा (मृत्यु के बाद) और डाउ की जिम्मेदारी पर सुनवाई जारी।
41वीं बरसी पर हंगामा: मोमबत्ती मार्च में BJP कार्यकर्ताओं से झड़प
3 दिसंबर को भोपाल में मोमबत्ती मार्च निकला। पीड़ितों ने UCC, डाउ और BJP की पुतला दहन किया। BJP कार्यकर्ताओं ने विरोध किया, झड़प हुई। संगठनों ने BJP पर 'चार्जशीट' जारी की: "शिवराज सरकार ने एम्पावर्ड कमीशन बंद किया, मोदी राज में डाउ का कारोबार बढ़ा।"
पीड़ित नेता रचना धिंगरा (इंटरनेशनल कैंपेन फॉर जस्टिस) ने कहा, "डाउ कोर्ट में नहीं आती, लेकिन भारत में कमाई कर रही। 5 गुना मुआवजा दो।" नवाब खान (भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा) ने कहा, "BJP राज में डाउ को संरक्षण मिला।"
स्वास्थ्य संकट: जहर आज भी पीढ़ियों को निगल रहा
- 1,50,000 से अधिक लोग आज भी बीमार।
- बच्चों में जन्म दोष, कैंसर, सांस की बीमारी।
- पानी प्रदूषित: फैक्टरी का कचरा मिट्टी-जल को जहर बना रहा।
- चिंगारी ट्रस्ट जैसे संगठन इलाज कर रहे, लेकिन फंडिंग कम।
सरकार का रुख: 'समाधान ढूंढेंगे', लेकिन पीड़ित निराश
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बरसी पर श्रद्धांजलि दी, लेकिन मुआवजे पर चुप्पी। राहत विभाग के अधिकारी ने कहा, "हाईकोर्ट में नया प्रस्ताव लाएंगे।" लेकिन पीड़ित कहते हैं, "वादे पुराने हैं। डाउ से पैसा दिलाओ।"
न्याय का इंतजार कब तक? पीड़ितों की पुकार
41 साल बाद भोपाल गैस कांड सिर्फ इतिहास नहीं, जीता जख्म है। 470 मिलियन का समझौता अपर्याप्त था, डाउ जिम्मेदारी से भाग रही, सरकारें वादों पर टिक। क्या हाईकोर्ट का नया समाधान न्याय देगा? या पीड़ितों को फिर इंतजार करना पड़ेगा? वनइंडिया हिंदी पीड़ितों की आवाज बनेगा। क्या आपको लगता है डाउ को मजबूर करना चाहिए? कमेंट में बताएं। जय भोपाल के शहीदों!(
( रिपोर्ट: वनइंडिया हिंदी संवाददाता LN Malviya )
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