सावन में भोजपुर मंदिर में क्यों उमड़ती है लाखों की भीड़? जानिए दुनिया के सबसे बड़े प्राचीन शिवलिंग का रहस्य
Bhopal Bhojpur Temple: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से महज 30 किलोमीटर दूर बसा भोजपुर शिव मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अनूठी वास्तुकला और इतिहास के लिए भी दुनियाभर में मशहूर है। खासकर सावन के सोमवार को यहां लाखों श्रद्धालु भोजेश्वर महादेव के दर्शन के लिए उमड़ते हैं।
इस मंदिर में स्थापित 2.03 मीटर ऊंचा शिवलिंग दुनिया का सबसे बड़ा और प्राचीन पाषाण शिवलिंग माना जाता है। सावन के पहले सोमवार यानी 14 जुलाई 2025 को भी यहां भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है। 15 क्विंटल फूलों से सजा यह मंदिर और इसका अलौकिक श्रृंगार हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है। आइए, वन इंडिया हिंदी की इस विशेष रिपोर्ट में आपको इस मंदिर की खासियत, सावन की रौनक और इसके पीछे की कहानी को सरल और आम भाषा में बताते हैं।

भोजपुर मंदिर: एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर
भोजपुर शिव मंदिर, जिसे भोजेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, 11वीं शताब्दी में मालवा के परमारवंशी राजा भोज ने बनवाया था। पुरातत्व विभाग के अनुसार, यह मंदिर अपनी वास्तुकला और विशालता के लिए दुनिया में अनूठा है। हालांकि, मंदिर का शिखर (गुंबद) अधूरा रह गया, लेकिन इसके बावजूद यह मंदिर अपने विशाल प्रवेशद्वार और शिवलिंग की वजह से दुनियाभर में प्रसिद्ध है।
मंदिर के गर्भगृह में स्थापित 2.03 मीटर ऊंचा शिवलिंग चमकदार बलुआ पत्थर से बना है। पुरातत्व विभाग के शिलालेख के मुताबिक, यह भारत के किसी भी मंदिर में स्थापित सबसे ऊंचा और विशाल शिवलिंग है। मंदिर का प्रवेशद्वार भी किसी हिंदू मंदिर के दरवाजों में सबसे बड़ा माना जाता है। इसकी भव्यता और प्राचीनता के कारण इसे उत्तर भारत का सोमनाथ भी कहा जाता है।

सावन में क्यों खास है भोजपुर मंदिर?
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। खासकर सावन के सोमवार को भक्तों में भारी उत्साह देखा जाता है। भोजपुर मंदिर में इस दौरान लाखों श्रद्धालु भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। 14 जुलाई 2025 को सावन के पहले सोमवार पर भी मंदिर में भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है।
मंदिर के महंत पवन गिरी ने बताया, "सावन के लिए खास तैयारियां की गई हैं। मंदिर को 15 क्विंटल फूलों से सजाया जाएगा, जो भोपाल से मंगवाए गए हैं। पहले सोमवार को सुबह महारुद्राभिषेक और महाआरती होगी, फिर भोलेनाथ का अलौकिक श्रृंगार किया जाएगा।"
मंदिर की सजावट और श्रृंगार का काम महंत पवन गिरी और उनकी टीम खुद करती है। इस बार गुलाब, मोगरा, चमेली, और गेंदे के फूलों से मंदिर को सजाया जाएगा, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। महंत जी ने कहा, "सावन में भोजेश्वर महादेव के दर्शन का पुण्य अवर्णनीय है। भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।"
भीड़ और सुरक्षा की तैयारियां
सावन के सोमवार को भोजपुर मंदिर में लाखों भक्त पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि और मकर संक्रांति की तरह ही सावन में भी यहां मेले जैसा माहौल होता है। जिला प्रशासन और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।
- सुरक्षा व्यवस्था: 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। मंदिर के आसपास CCTV कैमरे और ड्रोन से निगरानी होगी।
- यातायात प्रबंधन: भोपाल से भोजपुर तक विशेष बसें चलाई जाएंगी। पार्किंग और रास्तों को व्यवस्थित किया गया है।
- स्वास्थ्य सुविधाएं: मंदिर परिसर में मेडिकल कैंप और एंबुलेंस की व्यवस्था होगी।
भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा, "हमने भोजपुर मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए पूरी तैयारी की है। भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।"
भोजपुर मंदिर का इतिहास और महत्व
भोजपुर मंदिर को परमारवंशी राजा भोज ने 1010-1055 ईस्वी के बीच बनवाया था। पुरातत्वविदों का मानना है कि यह मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए अनूठा है। मंदिर की दीवारों पर बारीक नक्काशी और विशाल संरचना इसे खास बनाती है। हालांकि, मंदिर का शिखर अधूरा रह गया, जिसके कारणों का आज तक पता नहीं चल सका। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि युद्ध या आर्थिक कारणों से काम रुक गया।
मंदिर का शिवलिंग 2.03 मीटर ऊंचा और 1.8 मीटर चौड़ा है, जो एकल पत्थर से बना है। इसे बनाने के लिए बलुआ पत्थर को बेतवा नदी के किनारे से लाया गया था। मंदिर का प्रवेशद्वार 8 मीटर ऊंचा है, जो इसे हिंदू मंदिरों में सबसे बड़ा बनाता है।

पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. रमेश यादव ने कहा, "भोजपुर मंदिर 11वीं शताब्दी की भारतीय वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। इसका शिवलिंग और संरचना इसे विश्व धरोहर की श्रेणी में लाती है।"
सावन में भोजपुर की रौनक
सावन का महीना भगवान शिव के भक्तों के लिए खास होता है। भोजपुर मंदिर में सावन के हर सोमवार को महारुद्राभिषेक, जलाभिषेक, और महाआरती होती है। भक्त जल, दूध, दही, घी, और शहद से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। 15 क्विंटल फूलों का श्रृंगार मंदिर को और भव्य बनाता है। स्थानीय निवासी रमेश परमार ने कहा, "सावन में भोजपुर मंदिर का माहौल देखते ही बनता है। फूलों की खुशबू, भजनों की गूंज, और भक्तों की भीड़ से लगता है जैसे भोलेनाथ खुद यहां विराजमान हैं।"
राजा भोज और मंदिर से जुड़ी किवदंतियां
माना जाता है कि राजा भोज को कुष्ठ रोग हो गया था, और उन्होंने नर्मदा नदी के जल से स्नान कर स्वास्थ्य लाभ पाया। इसी स्थान पर उन्होंने यह शिव मंदिर बनवाया। कुछ मान्यताओं के अनुसार, राजा भोज ने अपने राज्य को वास्तुशास्त्र और ज्योतिष के आधार पर पुनः विकसित करने के लिए इस मंदिर का निर्माण करवाया।
मंदिर की दीवारों पर मिले शिलालेख और रेखाचित्र बताते हैं कि यहां निर्माण कार्य की योजनाएं आज भी खुदी हुई हैं। यह प्राचीन काल की इंजीनियरिंग की झलक है।
कैसे पहुंचें भोजपुर मंदिर?
- स्थान: भोजपुर, रायसेन ज़िला, भोपाल से लगभग 30 किमी।
- निकटतम स्टेशन: भोपाल रेलवे स्टेशन (32 किमी)
- बस और टैक्सी: भोपाल से भोजपुर के लिए नियमित बस और टैक्सी सेवा उपलब्ध है।
क्या आपने देखा है भारत का 'उत्तर का सोमनाथ'?
भोजपुर शिव मंदिर को उत्तर भारत का सोमनाथ भी कहा जाता है-इतना ही नहीं, यूनेस्को हेरिटेज साइट में शामिल कराने की मांग भी लंबे समय से चल रही है।
सावन के महीने में भोजपुर का यह मंदिर भक्ति, परंपरा और ऐतिहासिक गौरव का संगम बन जाता है। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का हिस्सा है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु एक अलग ऊर्जा, एक अलग अनुभव लेकर लौटता है-मानो शिव की छाया में आत्मा को शांति मिल गई हो।
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