MP News: भोपाल का '90 डिग्री' वाला ब्रिज: ट्रोल से लेकर रीडिजाइन तक, कैसे बनेगा अब सुरक्षित रास्ता?
MP news: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ऐशबाग इलाके में बना रेलवे ओवरब्रिज (RoB) अपने अनोखे 90 डिग्री मोड़ के कारण पिछले एक हफ्ते से पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। 18 करोड़ रुपये की लागत से बना यह ब्रिज, जो ऐशबाग स्टेडियम के पास ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए बनाया गया था, उद्घाटन से पहले ही सोशल मीडिया पर मीम्स और ट्रोल्स का शिकार हो गया।
लोग इसे "इंजीनियरिंग का अजूबा" से लेकर "टेम्पल रन गेम का रास्ता" तक कहकर मजे ले रहे हैं। लेकिन अब, जनता के आक्रोश और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए, इस ब्रिज को रीडिजाइन करने का फैसला लिया गया है। आइए, इस सनसनीखेज कहानी के हर पहलू को रोचक और विस्तार से जानते हैं-कैसे एक ब्रिज ने पूरे देश को हंसा दिया, और अब इसे सुरक्षित बनाने की क्या योजना है?

ब्रिज की कहानी: 90 डिग्री का "इंजीनियरिंग चमत्कार"
भोपाल के ऐशबाग इलाके में बना यह रेलवे ओवरब्रिज 648 मीटर लंबा और 8.5 मीटर चौड़ा है। इसका उद्देश्य था महामाई का बाग, पुष्पा नगर, स्टेशन क्षेत्र, और न्यू भोपाल जैसे घनी आबादी वाले इलाकों को जोड़ना, ताकि ऐशबाग रेलवे क्रॉसिंग पर होने वाली लंबी प्रतीक्षा और ट्रैफिक जाम से लोगों को राहत मिले। सरकार का दावा था कि यह ब्रिज रोजाना करीब तीन लाख यात्रियों को फायदा पहुंचाएगा। लेकिन जब इसकी तस्वीरें और ड्रोन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, तो लोगों ने देखा कि ब्रिज में एक ऐसा 90 डिग्री का तीखा मोड़ है, जो किसी रेसिंग गेम या "टेम्पल रन" की तरह लगता है।
क्यों बना 90 डिग्री का मोड़?
पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) के चीफ इंजीनियर (ब्रिज डिपार्टमेंट) वीडी वर्मा ने शुरुआत में इस डिजाइन का बचाव किया। उन्होंने कहा, "मेट्रो स्टेशन और जमीन की कमी के कारण हमारे पास और कोई विकल्प नहीं था। इस ब्रिज का मकसद दो कॉलोनियों को जोड़ना है।" अधिकारियों का कहना था कि ब्रिज केवल हल्के वाहनों, जैसे कार और बाइक, के लिए है, और भारी वाहनों को इस पर चलने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि इंडियन रोड कांग्रेस (IRC) के दिशानिर्देशों के अनुसार गति सीमा और सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा।
लेकिन यह तर्क जनता और विशेषज्ञों को नहीं भाया। ड्राइवरों ने शिकायत की कि इस तीखे मोड़ पर गाड़ी चलाना मुश्किल है, खासकर रात में या बारिश के दौरान। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि 35-40 किमी प्रति घंटे से ज्यादा गति पर वाहन पलट सकते हैं या रेलिंग से टकरा सकते हैं। कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरोलिया ने इसे "वीडियो गेम जैसा" और "बेहद खतरनाक" करार दिया।
सोशल मीडिया का तूफान: मीम्स और ट्रोल्स
11 जून 2025 को जब इस ब्रिज की तस्वीरें और वीडियो X पर वायरल हुए, तो यह पूरे देश में हंसी का पात्र बन गया। लोग इसे "PWD का रत्न" और "आर्किटेक्चरल हॉल ऑफ फेम" का दावेदार बताने लगे। एक यूजर ने लिखा, "यह ब्रिज भोपाल का नहीं, टेम्पल रन गेम का हिस्सा है!" एक अन्य ने मजाक में कहा, "मैं BJP और मोदी जी से माफी मांगता हूं। मुझे भोपाल के 90 डिग्री ब्रिज की आलोचना करने वाली विपक्षी प्रचार पर भरोसा नहीं करना चाहिए था। यह ब्रिज तो भविष्य की कारों के लिए बनाया गया है!"
कांग्रेस केरल ने तो भोपाल के बाद आंध्र प्रदेश के एक और विचित्र "जिगजैग" ब्रिज की तस्वीर शेयर कर तंज कसा, "भोपाल ने 90 डिग्री का फ्लाईओवर बनाया, आंध्र ने कहा-होल्ड माय चाय!" इन मीम्स ने न केवल भोपाल के ब्रिज को ट्रोल किया, बल्कि देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर डिजाइन की खामियों पर भी सवाल उठाए।
जांच और रीडिजाइन का फैसला
वायरल विवाद के बाद PWD मंत्री राकेश सिंह ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से ब्रिज की सुरक्षा जांच कराने का आदेश दिया। NHAI की टीम ने 12 जून को स्थल का निरीक्षण किया और अपनी तकनीकी रिपोर्ट में कहा कि 35-40 किमी प्रति घंटे से ज्यादा गति पर हादसे का खतरा है। इस रिपोर्ट के आधार पर, 18 जून को यह घोषणा की गई कि ब्रिज को रीडिजाइन किया जाएगा।
PWD सूत्रों ने बताया कि पूरा ब्रिज नहीं टूटेगा, बल्कि केवल 90 डिग्री वाला टर्निंग हिस्सा बदला जाएगा। रेलवे ने इसके लिए अतिरिक्त जमीन देने की सहमति दे दी है, जिससे मोड़ को और घुमावदार (कर्व्ड) बनाया जा सके। मौजूदा फुटपाथ को हटाया जाएगा, सेंट्रल डिवाइडर तोड़ा जाएगा, और ब्रिज की चौड़ाई को तीन फीट तक बढ़ाया जाएगा। इससे टर्निंग रेडियस बढ़ेगा, जिससे वाहन आसानी से मोड़ ले सकेंगे।
रीडिजाइन की योजना: कैसे बदलेगा ब्रिज?
- PWD और रेलवे के इंजीनियर अब मिलकर ब्रिज की नई डिजाइन तैयार कर रहे हैं। कुछ प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं:
- टर्निंग रेडियस का विस्तार: 90 डिग्री के तीखे मोड़ को हल्का और घुमावदार बनाया जाएगा। इसके लिए रेलवे की अतिरिक्त जमीन का इस्तेमाल होगा। रेलिंग को तोड़कर नया कर्व बनाया जाएगा।
- चौड़ाई में बढ़ोतरी: ब्रिज की चौड़ाई को 8.5 मीटर से बढ़ाकर 9-10 मीटर किया जाएगा, ताकि दो वाहन आसानी से मोड़ ले सकें।
- सुरक्षा उपाय: उचित साइनेज, स्पीड ब्रेकर, रिफ्लेक्टिव मार्किंग, और बेहतर लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी। गति सीमा को सख्ती से लागू करने के लिए स्पीड कैमरे भी लगाए जा सकते हैं।
- हल्के वाहनों तक सीमित: ब्रिज को केवल हल्के वाहनों (कार, बाइक, ऑटो) के लिए रखा जाएगा। भारी वाहनों (ट्रक, बस) के लिए वैकल्पिक रास्ते तय किए जाएंगे।
PWD अधिकारियों का कहना है कि रीडिजाइन का काम तीन से चार महीने में पूरा हो सकता है, और इसके लिए अतिरिक्त लागत 2-3 करोड़ रुपये तक हो सकती है। हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक लागत का खुलासा नहीं हुआ है।
जवाबदेही का सवाल: डिजाइनरों पर कार्रवाई?
इस पूरे विवाद ने PWD और रेलवे के बीच समन्वय की कमी को भी उजागर किया। ब्रिज का निर्माण मार्च 2023 में शुरू हुआ था, और इसे 18 महीने में पूरा होना था। लेकिन बिजली लाइनों को हटाने और PWD-रेलवे के बीच समन्वय की कमी के कारण प्रोजेक्ट 36 महीने से ज्यादा खिंच गया।
कांग्रेस ने इस डिजाइन को "मौत का मैदान" करार देते हुए सवाल उठाया कि PWD ने ऐसी खराब डिजाइन को कैसे मंजूरी दी? मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "तकनीकी आकलन कैसे हुआ? क्या इंजीनियरों ने अपनी आंखें बंद कर डिजाइन बनाया?" PWD सूत्रों के अनुसार, डिजाइन तैयार करने वाली टीम और ठेकेदार पर कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक बयान इस बारे में नहीं आया है।
बीजेपी vs कांग्रेस: सियासी जंग
इस ब्रिज ने बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी जंग भी छेड़ दी। जहां कांग्रेस ने इसे बीजेपी सरकार की नाकामी बताया, वहीं PWD मंत्री राकेश सिंह ने आलोचनाओं को "राजनीति से प्रेरित" करार दिया। स्थानीय बीजेपी विधायक और मंत्री विश्वास सारंग, जो निर्माण के दौरान कई बार साइट पर "इंस्पेक्शन सेल्फी" पोस्ट करते थे, अब चुप्पी साधे हुए हैं।
जनता की राय: हंसी और चिंता का मिश्रण
भोपाल के स्थानीय निवासियों में इस ब्रिज को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं। एक ऑटो चालक रमेश ने कहा, "यह ब्रिज तो खतरनाक है। रात में मोड़ पर गाड़ी मोड़ना किसी जंग से कम नहीं।" वहीं, पुष्पा नगर के निवासी संजय शर्मा ने कहा, "हमें ट्रैफिक जाम से राहत चाहिए थी, लेकिन यह ब्रिज तो और मुसीबत लाएगा।"
कुछ युवाओं ने इसे मजाक का विषय बना लिया। X पर एक यूजर ने लिखा, "भोपाल का यह ब्रिज ड्राइविंग स्कूल के लिए बेस्ट है। अगर यहां गाड़ी चला ली, तो दुनिया में कहीं भी चला सकते हो!" लेकिन ज्यादातर लोग सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और रीडिजाइन के फैसले का स्वागत कर रहे हैं।
भविष्य की राह: सुरक्षित और बेहतर ब्रिज
PWD और रेलवे अब इस ब्रिज को न केवल सुरक्षित, बल्कि भोपाल के लिए एक मॉडल प्रोजेक्ट बनाने की कोशिश में हैं। रीडिजाइन के बाद यह ब्रिज न सिर्फ ऐशबाग के तीन लाख यात्रियों को राहत देगा, बल्कि इन्फ्रास्ट्रक्चर डिजाइन में लापरवाही के सबक के रूप में भी याद रखा जाएगा।
यह मामला शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर की बड़ी चुनौतियों को भी उजागर करता है। सीमित जमीन, मेट्रो प्रोजेक्ट्स, और समन्वय की कमी जैसे मुद्दे भोपाल जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में आम हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में डिजाइन प्रक्रिया में पारदर्शिता, तकनीकी विशेषज्ञता, और जनता की राय को शामिल करना जरूरी है।
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