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MP News Satna: आर्मी चीफ जनरल द्विवेदी का भावुक बयान, 'ऑपरेशन सिंदूर धर्म युद्ध था, नमाज के समय हमला नहीं किया

भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी शनिवार को मध्य प्रदेश के सतना पहुंचे, जहां उन्होंने 53 साल बाद अपने बचपन के स्कूल सरस्वती हायर सेकेंडरी स्कूल का दौरा किया। इस दौरान आर्मी चीफ भावुक हो उठे और 'ऑपरेशन सिंदूर' पर खुलकर बोले।

उन्होंने इसे 'धर्म युद्ध' करार देते हुए कहा कि भारतीय सेना ने कभी नमाज या किसी धार्मिक प्रार्थना के समय हमला नहीं किया। यह बयान पाकिस्तान को साफ संदेश देने वाला था-भारत सिद्धांतों और तकनीक के संयोजन से लड़ता है, निर्दोषों को नुकसान नहीं पहुंचाता।

Army Chief General Dwivedi statement Operation Sindoor religious war we did not attack during namaz

ऑपरेशन सिंदूर, जो मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू हुआ, को उन्होंने 'चल रहे अभियान' बताया और 'सिंदूर 2.0' की तैयारी का ऐलान किया। यह विजिट न केवल निजी यादों का सिलसिला था, बल्कि सेना की एकता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक भी बना।

ऑपरेशन सिंदूर का बैकग्राउंड: पहलगाम हमले के 15 दिन बाद 7 मई को लॉन्च, 10 मई को स्ट्राइक समाप्त
ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य कार्रवाई का नाम था, जो 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू हुआ। हमले में 12 पर्यटक मारे गए थे, जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा ने ली। 7 मई को भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए।

चार दिनों की तीव्र झड़पों के बाद 10 मई को दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम समझौता हुआ। आर्मी चीफ ने बताया कि ऑपरेशन में केवल आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया-कोई सिविलियन या मिलिट्री इंस्टॉलेशन को नुकसान नहीं पहुंचाया। दर्जनों आतंकी मारे गए, और भारत ने पाकिस्तान को 'आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस' का संदेश दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कहा था कि 'सिंदूर' नाम भारतीय संस्कृति से प्रेरित है, जो शक्ति, समर्पण और एकता का प्रतीक है-जैसे विवाहित महिलाएं सैनिकों के लिए सिंदूर लगाकर प्रार्थना करती हैं।

आर्मी चीफ का सतना विजिट: 53 साल बाद स्कूल लौटे, भावुक होकर बोले-'यहां से मिली निर्णय क्षमता ने सिंदूर को सफल बनाया' जनरल द्विवेदी 1971-72 में चौथी कक्षा में इसी स्कूल में पढ़े थे। शनिवार को रीवा के सैनिक स्कूल (जिसकी निकटता में सतना आता है) के 'यूनिटी डे' पर पहुंचे, जहां उनके पुराने क्लासमेट और नेवी चीफ एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी मौजूद थे। दोनों 1970 के दशक में कक्षा 5A के सहपाठी थे।

आर्मी चीफ ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, "स्कूल के दिनों में सीखी निर्णय लेने की क्षमता ने मुझे सेना में कई सफलताएं दिलाईं। यहीं से मिली यह ताकत ऑपरेशन सिंदूर में निर्णायक भूमिका निभाई।" वे भावुक नजर आए, और स्कूल को अपना 'व्यक्तित्व निर्माणकर्ता' बताया। उन्होंने छात्रों से राष्ट्र सेवा का संकल्प लेने को कहा, "यह स्कूल ने मुझे राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाया, जो आज पूरे देश को प्रेरित कर रहा है।"

'नमाज के समय हमला नहीं': आर्मी चीफ ने क्यों कहा ऐसा? सिद्धांतों की जीत पर जोर, पाकिस्तान को जवाब
ऑपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया, "यह एक धर्म युद्ध था, जो आगे भी जारी रहेगा। हमने किसी निर्दोष को नुकसान नहीं पहुंचाया, न ही नमाज या किसी धार्मिक प्रार्थना के समय हमला किया।" यह बयान भारत की 'सिद्धांत-आधारित युद्धनीति' को रेखांकित करता है। आर्मी चीफ ने कहा कि सेना ने तकनीक (ड्रोन, सटीक मिसाइल) और नैतिकता (धार्मिक समय का सम्मान) का संयोजन अपनाया।

पाकिस्तान को संदेश दिया, "हम उनके जैसे नहीं हैं-हम आतंक के खिलाफ लड़ते हैं, न कि निर्दोषों के खिलाफ।" उन्होंने जोड़ा, "ऑपरेशन सिंदूर ने पूरे देश को एक सूत्र में बांधा। तीनों सेनाओं के नेतृत्व में (एयर चीफ एपी सिंह, नेवी चीफ त्रिपाठी और मैं) कोई हमें हरा नहीं सकता।" यह बयान ऑपरेशन को 'धर्म युद्ध' कहकर पाकिस्तान के 'जिहाद' नैरेटिव का जवाब था-भारत ने साफ किया कि हमारी लड़ाई आतंकवाद से है, धर्म से नहीं।

सिंदूर 2.0 की तैयारी: 'अभी ऑपरेशन समाप्त नहीं, पाकिस्तान को कायराना हरकत का जवाब देंगे'

आर्मी चीफ ने रीवा विजिट के दौरान कहा, "ऑपरेशन सिंदूर अभी चल रहा है, समाप्ति का फैसला उचित समय पर होगा। हम सिंदूर 2.0 के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यदि पाकिस्तान कोई कायराना हरकत करेगा, तो मुंहतोड़ जवाब देंगे।" उन्होंने तीनों सेनाओं की दोस्ती पर जोर दिया- "जब तीन करीबी दोस्त (मैं, एयर चीफ और नेवी चीफ) कमान संभाले, तो कोई चुनौती असंभव नहीं।" यह बयान भारत की सैन्य तत्परता को दर्शाता है, खासकर पिथौरागढ़ और अन्य बॉर्डर क्षेत्रों में। जनरल द्विवेदी ने वीक्षित भारत 2047 के लक्ष्य पर जोर देते हुए कहा, "सभी नागरिक राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। सेना न केवल लड़ती है, बल्कि राष्ट्र निर्माण की पहली स्तंभ भी है।"

क्या संदेश देता है यह बयान? सेना की नैतिकता और एकता पर फोकस

जनरल द्विवेदी का यह बयान न केवल ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का जश्न है, बल्कि भारत की सैन्य नीति का आईना भी। 'नमाज के समय हमला नहीं' कहकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि मजबूत की-हम आक्रामक हैं, लेकिन सिद्धांतवादी। स्कूल विजिट ने युवाओं को प्रेरित किया, जबकि सिंदूर 2.0 का ऐलान पाकिस्तान को चेतावनी। विशेषज्ञ कहते हैं, "यह बयान सेना को 'नैतिक योद्धा' के रूप में स्थापित करता है।" जय हिंद!

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