Lumpy Skin Disease: उमरिया में लम्पी स्किन बीमारी को लेकर अलर्ट, बांधवगढ़ के वन प्राणियों में खतरा
उमरिया, 13 अगस्त। मवेशियों की लम्पी स्किन बीमारी से उमरिया से लागे बांधवगढ़ के वन्य प्राणी भी प्रभावित हो सकते हैं। इस खतरे को देखते हुए ना सिर्फ पशुपालन विभाग बल्कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जिम्मेदारों ने भी अलर्ट हो गए हैं और गाइडलाइन जारी कर दिए हैं। मवेशियों में फैल रही लम्पी स्किन बीमारी को लेकर बांधवगढ़ में अलर्ट जारी कर दिया गया है। बांधवगढ़ से लगे गांवों में लोगों से कहा गया है कि वे अपने मवेशियों में इस बीमारी का लक्षण देखें तो इसकी सूचना पशुपालन विभाग को तुरंत दें ताकि मवेशियों के उपचार की व्यवस्था की जा सके।

बांधवगढ़ जंगल से लगे हैं कई गांव
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगल से कई गांव लगे हुए हैं जहां रहने वाले ग्रामीण पशु पालन करते हैं। यह ग्रामीण अपने पशुओं को चारा चराने के लिए पहाड़ में लेकर जाते हैं जिससे लम्पी स्किन बीमारी के संक्रमण के जंगल तक पहुंचने की आशंका बनी रहती है। बांधवगढ़ के कोर जोन में अभी भी 10-12 गांव बसे हुए हैं जहां हजारों की संख्या में पशु है। इसी प्रकार बांधवगढ़ के बफर जोन में भी 100 के बरीब गांव हैं जहां भी हजारों में पशु हैं। ग्रामीणों से कहा गया है कि वे अपने मवेशियों पर नजर रखें और उनमें अगर बीमारी के लक्षण नजर आते हैं तो पहले उसका उपचार करएं अन्यथा यह बीमारी तेजी से फैल सकती है।
पहले हो चुकी है सैंपलिंग
लम्पी स्किन बीमारी 2 वर्ष पहले साल 2020 में सबसे पहले आई थी। उसी दौरान बांधवगढ़ से लगे गांवों में पाले जाने वाले जानवरों की सैंपलिंग बांधवगढ़ प्रबंधन ने करा ली थी। उस समय जंगल से लगे किसी भी गांव के मवेशियों में लम्पी स्किन बीमारी के कोई लक्षण नहीं पाए गए थे। इस बारे में चर्चा करते हुए बांधवगढ़ के डा. नितिन गुप्ता ने बताया कि बांधवगढ़ प्रबंधन इस तरह के रोगों को लेकर हमेशा सतर्क रहता है और अभी भी पार्क के जिम्मेदारों और जंगल से लगे ग्राम पंचायतों में रहने वाले ग्रामीणों से सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
यह है लक्षण
बीमारी 1 विषाणु जनित रोग है, जो चमड़ी पर गाठों के रूप में फैलता है। इस बीमारी के मुख्य लक्षण पशुओं में , नाक से पानी, लार बहना, दुग्ध उत्पादन में गिरावट, तेज बुखार आना और लिम्फ नोंड में सूजन आ जाती है। पशुपालकों से आग्रह किया गया है कि अगर पशुओं में लम्पी स्किन बीमारी के बताए गए लक्षण पाए जाते है, तो पशुपालक तत्काल अपने नजदीक के पशु चिकित्सालय को सूचित करें। अगर पशुओं को इस बीमारी के लक्षण है, तो उन्हें अन्य स्वस्थ्य जानवरों से अलग बांधे एवं पानी, दाना चारा एवं अलग से करायें। पशुपालकों को ऐसे बीमार पशु का पशु चिकित्सक द्वारा चेकअप कराना चाहिये।
रहना चाहिए सतर्क
लम्पी स्किन बीमारी से पशु पालको को अलर्ट रहने की सलाह उप संचालक पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विभाग डा. अनुराग वर्मा ने भी दी है। उन्होंने वनइंडिया हिंदी से बात करते हुए बताया कि फिलहाल तो इस बीमारी के लक्षण उमरिया जिले के पशुओं में देखने को नहीं मिले हैं लेकिन फिर भी आवश्यकता इस बात की है कि हम सतर्क रहें और लक्षण को समझें। उन्होंने बताया कि जंगल से लगे गांवों में भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है ताकि यह बीमार जिले में कहीं भी न फैलने पाए।












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