Chardham Yatra में रिकॉर्ड भीड़! 61 दिन में पहुंचे 37 लाख श्रद्धालु, युवाओं में क्यों बढ़ रहा चार धाम का क्रेज
Chardham Yatra 2026: उत्तराखंड की पवित्र चार धाम यात्रा इस साल नए रिकॉर्ड की ओर तेजी से बढ़ती नजर आ रही है। देवभूमि में यात्रा शुरू हुए 61 दिन पूरे हो चुके हैं और श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि सिर्फ दो महीनों के भीतर ही यात्रियों की संख्या ने पिछले कई साल के आंकड़ों को चुनौती देना शुरू कर दिया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 37 लाख से अधिक श्रद्धालु केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन कर चुके हैं।

देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु चार धाम पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार यात्रा में सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवाओं और परिवारों की भागीदारी भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ी है।
Chardham Yatra 2026 Record Crowd 37 Lakh Pilgrims: 61 दिनों में 37 लाख से ज्यादा श्रद्धालु
इस साल चार धाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल 2026 को हुई थी, लेकिन ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) पहले ही शुरू हो जाने के कारण शुरुआती दिनों से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।
अब तक कुल 37,35,502 यात्रियों ने दर्शन किया है। चारों धामों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हैरानी होती है।
केदारनाथ धाम: हमेशा की तरह बाबा केदार के दर्शन के लिए सबसे ज्यादा दीवानगी देखी जा रही है। यहां अब तक सबसे अधिक 12,61,397 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।
बदरीनाथ धाम: भगवान विशाल के दर्शन के लिए 11,67,460 श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज कराई है।
गंगोत्री धाम: मां गंगा के उद्गम स्थल पर अब तक 6,17,417 भक्त पहुंचे हैं।
यमुनोत्री धाम: यमुना जी के दर पर अब तक 5,83,759 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं।
क्या टूट जाएगा 2025 का रिकॉर्ड?
अगर पिछले साल यानी 2025 की बात करें, तो पूरे सीजन में लगभग 51 लाख श्रद्धालु चार धाम यात्रा पर आए थे। इस साल सिर्फ दो महीनों (61 दिन) में ही यह आंकड़ा 37 लाख को पार कर गया है। हालांकि, अब उत्तराखंड में मानसून दस्तक देने वाला है, जिससे पहाड़ों में बारिश और भूस्खलन के कारण यात्रा थोड़ी धीमी पड़ जाती है। लेकिन जानकारों का कहना है कि सितंबर और अक्टूबर में मानसून खत्म होने के बाद यह यात्रा एक बार फिर जबरदस्त रफ्तार पकड़ेगी और पिछले साल का 51 लाख का रिकॉर्ड आसानी से टूट जाएगा।
क्यों हर साल बढ़ रहा है चार धाम यात्रा का क्रेज?
पहले के समय में माना जाता था कि चार धाम की यात्रा केवल बुजुर्ग या जीवन के आखिरी पड़ाव पर पहुंचे लोग ही करते हैं। लेकिन पिछले 4-5 सालों में यह ट्रेंड (चलन) पूरी तरह बदल चुका है। अब इस यात्रा में बुजुर्गों से कहीं ज्यादा युवाओं की टोली नजर आती है। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:
आस्था से ज्यादा सोशल मीडिया और रील्स का योगदान
आज के दौर में चार धाम यात्रा के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण सोशल मीडिया है। केदारनाथ और बदरीनाथ के बैकग्राउंड संगीत वाले वीडियो, बादलों के बीच छिपे पहाड़ और खूबसूरत घाटियों की 'रील्स' सोशल मीडिया पर हर दिन करोड़ों युवाओं तक पहुंचती हैं। इसे देखकर युवाओं में सिनेमैटिक ट्रैवल और एडवेंचर का क्रेज जागा है। कई बार युवा आस्था से ज्यादा सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने और पहाड़ों को एक्सप्लोर (घूमने) करने के लिए भी यहां पहुंच रहे हैं।
'स्पिरिचुअल टूरिज्म' का युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रहा ट्रेंड
आज का युवा मानसिक शांति और 'स्पिरिचुअल टूरिज्म' की ओर आकर्षित हो रहा है। भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल और काम के तनाव के बीच, केदारनाथ की ट्रैकिंग युवाओं के लिए एक शांत और मनोहर अचीवमेंट जैसी बन गई है। जो यात्रा कभी बहुत कठिन मानी जाती थी, उसे आज के युवा एक एडवेंचरस ट्रिप के रूप में देख रहे हैं।
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है चार धाम यात्रा
चार धाम यात्रा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा आधार भी है। यात्रा से जुड़े होटल, टैक्सी, घोड़ा-खच्चर सेवाएं, स्थानीय दुकानदार, गाइड और हजारों छोटे व्यवसाय सीधे तौर पर इससे जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि हर साल यात्रा सीजन का इंतजार सिर्फ श्रद्धालुओं को ही नहीं बल्कि स्थानीय लोगों और व्यापारियों को भी रहता है।














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