Rewa: अफ्रीकन स्वाइन फ्लू की पुष्टि,सूअर की खरीदी-बिक्री पर प्रतिबंध, इंजेक्शन देकर किया जाएगा वध
रीवा, 22 अगस्त। जिले में सुअरों की लगातार हो रही मौत ने प्रशासन और स्वास्थ्य महकमें की चिंता बढ़ा दी है। रीवा से भोपाल भेजे गए 10 सैंपल में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। सूत्रों के अनुसार रीवा शहर में 12 दिन के अंदर लगभग 1813 सुअरों की मौत हुई है। पशु चिकित्सा विभाग का अमला स्वाइन फीवर मानकर अभी तक वैक्सीनेशन कर रहा था। भोपाल से आई रिपोर्ट के बाद डोर टू डोर सर्वे कर जानकारी जुटाई जाएगी।

खरीदी-बिक्री प्रतिबंधित
शहर में सूअरों की लगातार हो रही मौतों का कारण स्पष्ट होने के बाद कलेक्टर ने इनकी खरीदी-बिक्री प्रतिबंधित कर वैज्ञानिक तरीके से बध व निष्पादन कराने के आदेश दिए हैं। डीएम ने धारा 144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर बताया, मृत सूआरों में आफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि हुई है। यह वायरस मानव व अन्य मवेशियों में अप्रभावी है, लेकिन संक्रमित सूआर का मांस सेहत पर विपरीत असर डाल सकता है। इसलिए गाइडलाइन के अनुसार, संक्रमित सूअरों को मारने अभियान चलाया जाए। डीएम मनोज पुष्प ने कहा, दो दिन में बस्तियां चिह्नित कर संक्रमित सूअरों को वैज्ञानिक विधि से मारने के लिए अभियान चलाया जाएगा।

आवाजाही प्रतिबंधित
इन्फेक्टेड जोन के सूअर पालकों व सम्पर्क में आए लोगों का आना जाना प्रतिबंध किया है। संक्रमण इलाके में आने वाले वाहनों को सेनेटाजेशन किया जाएगा। इन्फेक्टेड जोन के सभी प्रकार के सूअरों का वैज्ञानिक विधि से वध किया जाएगा। मृत सूअरों का निष्पादन करने के लिए नगर निगम द्वारा कुठुलिया वार्ड में क्षेत्र निर्धारित किया गया है।

इपी व सर्विलांस जोन भी घोषित
डीएम ने ईफेक्टेड प्वाइंट व सर्विलांस जोन घोषित किया है। इपी जोन के पहले चरण में रतहरा बस्ती से एक किमी के दायरे में सूअरों को इंजेक्शन देकर मारा जाएगा। साथ ही इस क्षेत्र से 9 किलोमीटर की परिधि को सर्विलांस जोन घोषित है। इन के अलावा जिले के अन्य क्षेत्र फ्री जोन रहेंगे। प्रिवेंशन एण्ड कंट्रोल ऑफ इंफेक्शन एण्ड कंटेजियस डिसीज इन एनिमल एक्ट 2009 के प्रावधानों के तहत अफ्रीकन स्वाइन फीवर को रोकने के लिए इन्फेक्टेड जोन में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू रहेंगे। इन्फेक्टेड जोन में पाए जाने वाले सभी सूअर आश्रयों में सूअरों की आवाजाही पूरी तरह से प्रतिबंधित की गई है। सभी सूअर पालकों से गत 30 दिनों में इनके परिवहन की जानकारी लेकर रोग के संभावित इपी सेंटर का चिन्हांकन किया जाएगा।

इंसानों में असर नहीं
पशु चिकित्सा विभाग के उप संचालक डॉक्टर राजेश मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि सुअरों की इस बीमारी से इंसानों को कोई खतरा नहीं है। यह बीमारी में सुअरों में ही फैलती है, इस बीमारी की रोकथाम के लिए जो गाइडलाइन है उसके अनुसार आवश्यक उपाय किए जाएंगे।

यहां हुई सर्वाधिक मौते
शहर में सुअरों की सर्वाधिक मौत वाला क्षेत्र धोबिया टंकी से बिछिया नदी होते हुए नारायण चक्की, पाण्डेन टोला होते हुए वापस धोबिया टंकी वाला है। इसमें वार्ड नंबर 28/ 29/ 38/ 40 /41/ 42 शामिल है। उल्लेखनीय है कि रानीतालाब और नयातालाब इलाके में बड़ी संख्या में सुअर पालन किया जाता है।












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