Bhopal News: पांचवी पास युवक ने DGP कार्यालय का अफसर बनकर पुलिसकर्मियों से की अडीबाजी
डीजीपी कार्यालय का ऑफिसर बनकर पुलिस कर्मचारियों से ट्रांसफर और विभागीय जांच के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले शातिर अपराधी को क्राइम ब्रांच पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी बचने के लिए नाले में कूद गया था।

Bhopal News: राजधानी भोपाल क्राइम ब्रांच पुलिस ने पांचवीं पास शातिर जालसाज का खुलासा किया है, जो डीजीपी कार्यालय का अधिकारी बनकर पुलिसकर्मियों को फोन पर धमकाते हुए रुपयों की मांग करता था। कई पुलिसकर्मियों को तो ट्रांसफर का हवाला देकर रुपयों की मांग की। बता दे ये आरोपी पहले भी धोखाधड़ी के मामले में रीवा की जेल में हवा खा चुका है। आरोपी के पास से 50 से भी अधिक शासकीय अधिकारी/कर्मचारी के कांटेक्ट नंबर की सूची मिली है।
50 से अधिक पुलिसकर्मियों से की रुपयों की मांग
अभी तक में 50 से अधिक पुलिसकर्मियों को रुपयों के लिए धमका चुका है इनमें से अधिकांश महिलाएं हैं हालांकि किसी ने पैसे नहीं दिए इंदौर की एक महिला उप निरीक्षक की शिकायत पर उसे भोपाल से गिरफ्तार किया गया आरोपी से पूछताछ की जा रही है। आरोपी फोन पर अधिकारी के लहजे में बात करके सस्पेंड करने की धमकी देता था।
क्राइम ब्रांच डीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि एक महिला एसआई ने शिकायत में बताया था कि एक व्यक्ति खुद को पुलिस अफसर बताते हुए सस्पेंड करने और स्थानांतरण करवाने के लिए रुपयों की मांग कर रहा है। इसके बाद धोखाधड़ी, अड़ीबाजी का केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की गई। पता चला कि जिस नंबर से फोन किए गए वे सिम रीवा के पनवार थाना इलाके के ग्राम ऑभरी निवासी बुद्धसेन मिश्रा के नाम पर जारी हुई है।
घेराबंदी की तो नाले में कूद गया आरोपी
डीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि पुलिस आरोपी की तलाश अलग-अलग लोकेशन मिलने के बाद मध्य प्रदेश के रीवा छिंदवाड़ा व छत्तीसगढ़ के कोरबा और उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में कर रही थी। हाल में उसकी लोकेशन राजधानी के निशातपुरा क्षेत्र में मिली पुलिस ने उसकी घेराबंदी की तो वे नाले में कूद गया। वहां से उसे बाहर निकाल कर गिरफ्तार कर लिया गया।
तरीका वारदात-
आरोपी होटल गुरुकृपा इंदौर में गार्ड का काम करता था। वह कभी-कभी पुलिस अधिकारी/कर्मचारी के वाहन में लगे वायरलेस सेट से पुलिस की कार्यप्रणाली के बारें में सुनता था। आरोपी ने जानकारी प्राप्त करने के बाद सोचा कि पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर कर्मचारियों को डरा धमकाकर उनसे पैसो की मांग की जा सकती है। इसी कारण आरोपी फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर गूगल से सभी पुलिस कंट्रोल रूम के नम्बर प्राप्त करके जिले में पदस्थ एसआरसी बाबू का नम्बर प्राप्त करके उनसे स्थांतरण के लिए दिए कर्मचारी की जानकारी प्राप्त करने के उपरांत कर्मचारी से सम्बंधित थाना प्रभारी को फोन करके कर्मचारियो को फोन पर बात करने का आदेश देता था।
अधिकारी/कर्मचारी द्वारा फोन करने पर उनसे उनके द्वारा दिए आवेदन पर ट्रांसफर हेतु पैसे की बात करता था एवं कुछ कर्मचारियो को उनकी शिकायत होने का बताकर उनके विरुद्ध निलंबन की कार्यवाही करने की धमकी देकर पैसो की मांग करता था। आरोपी अधिकारी के लहजे में बात करता था। इस कारण कुछ अधिकारी/कर्मचारियों को आरोपी पर शक नही हुआ, पर कुछ कर्मचारियों को शक हुआ तो उन्होने क्राइम ब्रांच भोपाल को सूचित किया।












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