यहां खरीदार भी महिला है और दुकानदार भी महिला, देखिए चंबल का अनोखा मेला
भिंड के गोरमी इलाके में एक महिला मेला लगाया जाता है, बीते 100 साल से यह मेला लगाया जा रहा है। इस मेले में किसी पुरुष को एन्ट्री नहीं दी जाती है
भिंड, 8 सितंबर। चंबल के भिंड जिले में एक अनोखा मेला लगता है। इस मेले को महिलाओं के मेले के नाम से जाना जाता है। इस मेले की खास बात यह है कि इस मेले में दुकान लगाने वाले सभी दुकानदार महिलाएं ही हैं और इस मेले में घूमने आने वाले सैलानी भी महिलाएं ही हैं। इस मेले में पुरुषों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहता है।

भिंड के गोरमी इलाके में लगाया जाता है मेला
महिलाओं का यह मेला भिंड के गोरमी के में लगाया जाता है। यह मेला जलविहार महोत्सव के तहत लगाया जाता है। इस पांच दिवसीय मेले में घूमने के लिए आसपास के सैकड़ों गांव की महिलाएं पहुंचती हैं। यह महिलाएं इस मेले में अपनी जरूरत के सामान की खरीदारी भी करती हैं। इस मेले की खास बात है कि मेले के अंदर दुकान लगाने वाले दुकानदार भी महिलाएं ही होती है और मेले के अंदर खरीदारी करने पहुंच रहे ग्राहक भी महिलाएं ही होती हैं।

महिलाओं के साथ सिर्फ बच्चों को मेले में प्रवेश की अनुमति
महिलाओं के लिए आयोजित किए जाने वाले इस मेले की खास बात है कि इस मेले में महिलाओं के साथ सिर्फ बच्चों को प्रवेश की अनुमति है। पुरुषों का इस मेले में प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंधित रखा जाता है। महिलाओं के साथ उनके छोटे-छोटे बच्चे मेले का आनंद लेते हैं। कोई सॉफ्टी खाता है तो कोई झूले पर झूलता है। कुल मिलाकर यह पूरा मेला महिलाओं के लिए ही आयोजित किया जाता है।

पुरुष प्रवेश करे तो पुलिस कर लेती है अरेस्ट
महिलाओं के इस मेले में जहां महिलाएं और बच्चे मेले का आनंद लेते हैं वहीं कोई पुरुष अगर इस मेले में प्रवेश करने का प्रयास करता है तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेती है। ऐसा कई बार हुआ है कि पुरुष मेले में प्रवेश करने का प्रयास करते हैं और पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके हवालात में बंद कर देती है। यही वजह है कि पुलिस की सख्ती के चलते अब पुरुष इस मेले में नहीं जाते हैं।

100 साल पहले हुई थी इस मेले की शुरुआत
स्थानीय जानकार बताते हैं कि इस मेले की शुरुआत 100 साल पहले हुई थी। इलाके के रहने वाले एक महंत द्वारा इस मेले की शुरुआत की गई थी। इस मेले का उद्देश्य था की महिलाएं भी चूल्हे-चौके से निकलकर घूमने का आनंद ले सकें और अपने घर गृहस्थी की जरूरत की चीजें भी खरीद सकें। इसी उद्देश्य के साथ इस मेले को शुरू किया गया था जो 100 साल बीत जाने के बाद भी आज तक जारी है।












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