सिंध और चंबल नदी में पानी छोड़े जाने से दोनों नदियां उफान पर

चंबल और सिंध नदी में पानी छोड़े जाने की वजह से नदियों का जल स्तर बढ़ गया है, नदियों किनारे बसे गांव में बाढ़ का खतरा देखते हुए अलर्ट जारी कर दिया गया है

ग्वालियर, 24 जुलाई। भिंड जिले से गुजरने वाली सिंध और चंबल नदी में पानी छोड़े जाने की वजह से दोनों ही नदियों के किनारे बसे गांव में अलर्ट जारी कर दिया गया है। सिंध नदी में मोहिनी सागर बांध और मड़ीखेड़ा बांध से पानी छोड़ा गया है जबकि चंबल नदी में कोटा बांध से पानी छोड़ा गया है। इस वजह से दोनों ही नदियां उफान पर हैं।

नदी

सिंध नदी में छोड़ा गया मड़ीखेड़ा और मोहिनी सागर बांध से पानी
लगातार हो रही बारिश की वजह से सिंध नदी में मड़ीखेड़ा और मोहिनी सागर बांध से पानी छोड़ा गया है। बताया गया है कि सिंध नदी में 10000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है इस वजह से सिंध नदी में जल स्तर बढ़ गया है। सिंध नदी का जलस्तर बढ़कर 1.80 मीटर पर पहुंच चुका है।

चंबल नदी में छोड़ा गया कोटा बांध से पानी
सिंध के बाद भिंड जिले से गुजरने वाली चंबल नदी में भी जलस्तर बढ़ गया है। चंबल नदी में कोटा बांध से पानी छोड़ा गया है। जानकारी के अनुसार कोटा बांध से चंबल नदी में 14950 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस वजह से चंबल नदी में अचानक जलस्तर बढ़ गया है। चंबल नदी का जलस्तर बढ़कर 114.06 मीटर पर पहुंच गया है।

भिंड जिले में भी हो रही है बारिश
भिंड जिले में भी बीते 3 दिन से बारिश हो रही है। हालांकि यह बारिश रुक रुक कर हो रही है, लेकिन इस बारिश की वजह से लगातार नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है जो कि नदियों के किनारे बसे ग्रामीणों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए की तैयारी
जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। भिंड कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस ने ब्लॉक लेवल पर कंट्रोल रूम बनाए जाने के निर्देश दे दिए हैं। इसके अलावा बाढ़ की स्थिति में बाढ़ पीड़ितों के लिए दवाइयां, राशन भंडार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। राहत एवं बचाव कार्य में उपयोग आने वाली बोट समेत अन्य संसाधनों की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही सभी प्रशासनिक अधिकारियों को स्थिति पर निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

बीते साल भिंड में आई थी बाढ़
बीते साल भिंड में सिंध और चंबल नदी के किनारे बसे गांव में भीषण बाढ़ आ गई थी। कई घर जमींदोज हो गए थे, कई दिनों तक लोगों को राहत शिविर में रहना पड़ा था। गांव में पानी भर गया था और लोग बेघर हो गए थे। नदी किनारे बसे गांव के लोग दाने-दाने के लिए मोहताज हो गए थे। प्रशासन ने कड़ी मशक्कत के बाद लोगों को राहत पहुंचाई थी।

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