भिंड में रात में कतार में खड़े हो जाते हैं किसान फिर भी नहीं मिल रही है खाद
भिंड में खाद की किल्लत से किसान हो रहे परेशान, लंबी लंबी कतारों में खड़े होकर कर रहे हैं अपनी बारी आने का इंतजार
भिंड, 11 सितंबर। चंबल के भिंड जिले में खाद की किल्लत से किसान परेशान हैं। किसान खाद लेने के लिए सहकारी सोसायटी पर तो पहुंच रहे हैं लेकिन उन्हें खाद नसीब नहीं हो पा रही है। लंबी-लंबी कतारों में खड़े किसान अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं लेकिन कई किसान बिना खाद लिए ही वापस लौट जाते हैं। अधिकारी खाद की किल्लत को नकार रहे हैं जबकि किसान खाद के लिए परेशान नजर आ रहे हैं।

भिंड सोसाइटी पर लग जाती है लंबी लंबी कतारें
इन दिनों किसानों को अपनी फसल में डालने के लिए खाद की जरूरत है। किसान खाद लेने के लिए सहकारी सोसायटी पर तो पहुंच रहे हैं लेकिन यहां उन्होंने खाद नहीं मिल पा रहा है। किसान बताते हैं कि वे रात के अंधेरे में आकर ही कतार में लग जाते हैं लेकिन इसके बावजूद उनका नंबर नहीं आ पाता है। कई घंटों तक कतार में खड़े रहकर खाद के लिए इंतजार करते हैं और खाली हाथ घर वापस लौट जाते हैं।

खाद नहीं मिलने से फसल हो जाएगी खराब
सहकारी सोसायटी पर कतार में खड़े किसानों का कहना है कि उन्हें अपनी फसल के लिए खाद की जरूरत है अगर समय पर खाद नहीं मिली तो उनकी फसल खराब हो जाएगी, ऐसे में किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा जो खेती में लागत लगाई है वह भी वसूल नहीं हो पाएगी इसलिए किसान हर संकट को झेलते हुए खाद लेने के लिए खड़ा हुआ है।

खाद वितरण में गड़बड़ी का भी लगाया आरोप
खाद के लिए कतार में खड़े किसानों ने खाद वितरण में गड़बड़ी का भी आरोप लगाया है। किसानों का आरोप है कि हम कतार लगाकर अपनी बारी आने का इंतजार करते रहते हैं लेकिन सोसाइटी के ऑफिस का गेट खुलता है और चुनिंदा लोगों को अंदर ले लिया जाता है और यहीं से उन्हें खाद दे दिया जाता है। किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

किसानों पर ही दोष मढ़ रहे हैं अधिकारी
एक तरफ जिले में खाद की किल्लत है, किसान एक-एक बोरी के लिए परेशान हो रहा हैं, वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों का दावा है कि जिले में खाद की किल्लत नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि किसान अपनी आदतों की वजह से ही परेशान है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को अपने खेतों में ज्यादा खाद डालने की आदत पड़ गई है इसलिए वे ज्यादा से ज्यादा खाद लेना चाहते हैं। यही वदह है कि किसान परेशान हैं।












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