एक ऐसा शख्स जिसने हारने के लिए लड़े 350 चुनाव, कभी नेहरू ने की थी टिकट की पेशकश
Bareilly news, बरेली। लोकसभा चुनाव 2019 का आगाज हो चुका है। हर पार्टी का नेता चुनाव जीतने के लिए दमखम लगा रहा है। इस मौके पर हम आपको एक ऐसी शख्सियत के बारे में बता रहे हैं जो सिर्फ हारने के लिए चुनाव लड़ते थे। जी हां, यूपी के बरेली के रहने वाले काका जोगिंदर सिंह सिर्फ हारने के लिए ही चुनाव लड़ा करते थे और उन्हानें राष्ट्रपति चुनावों सहित आम व विधानसभा चुनावों सहित 350 चुनावों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।

पंडित नेहरू ने की थी टिकट की पेशकश
बरेली के बड़ा बाजार में कपड़ों की दुकान पर हर आने जाने वाले को छुआरे, किसमिस और मिसरी देकर मुंह मीठा कराने वाले काका चुनावों में अपनी हार सुनिश्चित कराने के लिये चुनाव लड़ा करते थे। काका के बेटे अरविंदर सिंह का कहना है कि उनका यह नशा था कि वे चुनावों में खड़े होकर रिकॉर्ड कायम करें। इसी के चलते उन्होंने विधायक से लेकर राष्ट्रपति तक के 350 से ज्यादा चुनावों में अपनी उम्मीदवारी दर्ज करायी थी। एक समय वो था जब काका को बरेली से विधायकी लड़ने के लिये नेहरू जी ने अपनी पार्टी के टिकट की पेशकश की थी, लेकिन काका ने निर्दलीय होकर ही चुनाव लड़ा। उनका चुनाव लड़ने का जज्बा ऐसा कि वो हर किसी राज्य में होने वाले चुनावों में लड़ने पहुंच जाते थे।

किसी दल से टिकट लेकर लड़ना नामर्दी मानते थे
काका चुनाव में किसी भी दल के टिकट लेकर लड़ने को नामर्दी मानते थे और निर्दलीय ही मैदान में डटे रहते थे उनके पास लोगों को देने के लिये छुआरे और मिसरी उनकी पोटली में हमेशा रहते थे, जिससे लोग उन्हें छुआरे वाले काका के नाम से भी जानने लगे। अब काका तो हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके बेटे ने उनकी इस परंपरा को आज तक जिंदा रखा है। काका ने राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा और उप राष्ट्रपति के आर नारायणन के खिलाफ भी पर्चा भरा था। तब इन पदों पर चुनाव र्निविरोध होता था, लेकिन काका के चलते नहीं हो सका। दोनों प्रत्याशी चुनाव जीत गये और काका ने सर्वोच्च न्यायालय में उन्होंने वाद दायर कर दिया था और नामांकन को चुनौती दे डाली थी। काका अब दुनिया को अलविदा कह चुके हैं, लेकिन उनकी यादें आज भी लोगों के जहन में हैं।

चुनाव से पहले आती है काका की याद
काका को जानने वाले सैद का कहना है कि काका जोगिंदर सिंह उर्फ धरती पकड़ आज हमारे बीच में तो नहीं हैं, लेकिन उनकी याद चुनाव में जरूर आती है। उनकी वो मुंह मीठा करने की रिवायत भी याद आती है जो मीठे के बलबूते लोगों का दिल जीतना चाहते थे। आज जरूरत हैं ऐसे राजनेताओं की जो लोगों का दिल जीते न सिर्फ सत्ता की चाहत के लिये लोगों का इस्तेमाल करें।












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