Karnataka Golf Association RTI के दायरे में, हाईकोर्ट के फैसले से आयोग के 9 साल पुराने आदेश पर मुहर
कर्नाटक में गोल्फ एसोसिएशन सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचनाएं मुहैया कराने के लिए बाध्य है। हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में ये बात कही है। जानिए 124 एकड़ की जमीन से जुड़ा क्या है पूरा मामला

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में कहा है कि कर्नाटक गोल्फ एसोसिएशन (KGA) 2005 के सूचना का अधिकार कानून के तहत सूचनाएं मुहैया कराने के लिए बाध्य है। कोर्ट ने कहा कि गोल्फ एसोसिएशन को 124 एकड़ जमीन दी गई है।
जस्टिस एनएस संजय की कोर्ट ने 2014 में फाइल याचिका पर आदेश पारित किया। हाईकोर्ट ने गोल्फ एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिका खारिज कर दी। समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 14-10-2014 को पारित कर्नाटक सूचना आयोग के आदेश को बरकरार रखा।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सूचना के अधिकार अधिनियम -2005 के तहत बेंगलुरु में कर्नाटक गोल्फ एसोसिएशन को सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित किया गया। बता दें कि 9 साल पहले के सूचना आयोग के फैसले से नाराज क्लब ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने सूचना आयोग के निर्णय के साथ सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि क्लब को पट्टे पर दी गई 124 एकड़ भूमि पर्याप्त वित्त के लिए शुद्ध लाभ राशि का केवल 2% है।
न्यायमूर्ति एन.एस. संजय गौड़ा ने याचिका को खारिज करते हुए कहा, क्योंकि एसोसिएशन "राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त रूप से वित्तपोषित है।" संस्था RTI के दायरे से बाहर नहीं हो सकती।

गोल्फ एसोसिएशन के मामले में दी हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा, "तथ्य यह है कि 124 एकड़ भूमि को वार्षिक सकल आय के 2% पर पट्टे पर दिया गया है, यह दर्शाता है कि संघ को राज्य द्वारा पर्याप्त रूप से वित्तपोषित किया गया है।"
जस्टिस गौड़ा ने कहा, "यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि एसोसिएशन गोल्फ कोर्स तभी चला सकता है, जब उनके पास जमीन उपलब्ध हो और अगर उन्हें भारी सब्सिडी वाले किराए पर जमीन दी जाती है।"
उन्होंने कहा, आरटीआई अधिनियम के तहत अपेक्षित पर्याप्त वित्तपोषण की राशि मिल रही है, इसलिए एसोसिएशन RTI के दायरे में आएगा। केजीए ने अक्टूबर 2014 में कर्नाटक राज्य सूचना आयोग द्वारा पारित आदेश की वैधता पर सवाल उठाया था।
KGA की दलील थी कि एसोसिएशन आरटीआई अधिनियम के तहत एक 'सार्वजनिक प्राधिकरण' नहीं है। हालांकि, दलीलों को खारिज करते हुए जस्टिस गौड़ा ने अदालत के पहले के इसी तरह के फैसलों का हवाला दिया।
उन्होंने साफ किया कि बैंगलोर टर्फ क्लब लिमिटेड, मैसूर रेस क्लब लिमिटेड, लेडीज क्लब, बेंगलुरु और इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर (इंडिया), कर्नाटक राज्य केंद्र, बेंगलुरु भी आरटीआई अधिनियम के तहत 'सार्वजनिक प्राधिकरण' हैं।
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