Karnataka Cabinet expansion: 24 और मंत्री सीएम सिद्धारमैया की टीम में शामिल होंगे, शपथ 27 मई को: रिपोर्ट्स
Karnataka Cabinet expansion पर सबकी नजरें हैं। लोक लुभावन वादे कर चुकी कांग्रेस के सामने पांच वादों को पूरा करना है। ऐसे में विभागों का आवंटन बेहद अहम है। कर्नाटक की कैनिनेट में 24 और मंत्री शामिल होंगे।

Karnataka Cabinet expansion पर सबकी नजरें हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 24 और मंत्री सीएम सिद्धारमैया की टीम में शामिल होंगे। इनकी शपथ 27 मई को होगी। इससे पहले मुख्यमंत्री के साथ 8 मंत्री शपथ ले चुके हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के अलावा अब 24 और मंत्रियों को सिद्धारमैया की कैबिनेट में शामिल होने का मौका मिलेगा। गवर्नर थावरचंद गहलोत मंत्रियों को पद औऱ गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
कर्नाटक मंत्रिमंडल विस्तार के बारे में एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार में 24 और मंत्री शनिवार, 27 मई को शपथ लेंगे।
सूत्रों ने कहा है कि दिल्ली में सिद्धारमैया, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार और पार्टी के केंद्रीय नेताओं के बीच हुई बैठक में मंत्रियों के नामों को अंतिम रूप दिया गया है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को राहुल गांधी से भी मुलाकात करेंगे।
गत 20 मई को, सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री, जबकि कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इनके अलावा कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे सहित आठ विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली थी।
ये भी रोचक है कि अब तक विभागों का कोई आवंटन नहीं किया गया है। पोर्टफोलियो बंटवारे को लेकर भाजपा ने उपहास किया है। हालांकि, कोरोना महामारी के दौरान कई हफ्तों तक मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की कैबिनेट में एकमात्र मंत्री रहने को लेकर कांग्रेस ने पलटवार भी किया है।
सियासी पंडितों का मानना है कि विभिन्न समुदायों को संतुलित करने और उनका प्रतिनिधित्व करने की आवश्यकता को देखते हुए मंत्रियों की सूची तैयार करना या विभागों का आवंटन करना कांग्रेस के लिए बेहद पेचीदा मामला है।
कर्नाटक में राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण समुदाय लिंगायत ने कांग्रेस की जीत में अपने बड़े योगदान का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश किया था। लिंगायत मुख्यमंत्री की गैर-मौजूदगी में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि मंत्री पद का एक हिस्सा इसी समुदाय के विधायकों को मिलेगा।
अगले साल होने वाले आम चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस पर त्वरित परिणाम दिखाने और चुनावों से पहले किए गए वादों को पूरा करने का दबाव है। ऐसा इसलिए क्योंकि कर्नाटक से लोकसभा के 28 सांसद निर्वाचित होते हैं।
सिद्धारमैया की सरकार में युवा मंत्री प्रियांक खड़गे ने मंत्रिपरिषद विस्तार से पहले गुरुवार को स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस सरकार पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की नीतियों की समीक्षा करने और कई फैसलों को "ठीक करने" का इरादा रखती है।
ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि मुस्लिम कोटा, हिजाब प्रतिबंध और धर्मांतरण विरोधी कानून पर फैसलों को निरस्त किया जा सकता है। सिद्धारमैया की कैबिनेट में मंत्री ने इस पर स्पष्ट संकेत दिया है।
प्रियांक खड़गे के बयान पर एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, "कोई भी बिल, कार्यकारी आदेश, या सरकारी आदेश या कोई अन्य बिल जो कर्नाटक की आर्थिक नीतियों पर प्रतिकूल असर डालने वाली है, जो रोजगार पैदा नहीं करते, राज्य में वैमनस्य पैदा करते हैं, ऐसे फैसलों की समीक्षा की जाएगी या उसे खारिज कर दिया जाएगा।"
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बता दें कि कांग्रेस ने इस महीने की शुरुआत में कर्नाटक में राज्य की 224 सीटों में से 135 सीटें जीती हैं। भाजपा ने 66 और एचडी कुमारस्वामी की जनता दल सेक्युलर ने 19 सीटें जीतीं हैं। कांग्रेस ने भी अपना वोट शेयर 2018 के मुकाबले बेहतर किया है।
2018 में कांग्रेस को 38.1 प्रतिशत वोट मिले थे, इस साल 42.9 प्रतिशत वोटर का सपोर्ट मिला। जेडी(एस) को पांच साल पहले 18.3 वोट मिले थे। इस साल जेडीएस को केवल 13.3 प्रतिशत वोट मिले। भाजपा को 2018 में 36 प्रतिशत वोट मिले थे। इस बार भी शेयर में बहुत बदलाव नहीं हुआ।












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