बलरामपुरः पत्नी की अर्थी को नसीब नहीं हुआ कंधा तो पति एंबुलेंस से 1137 किमी दूरी तय कर गांव लाया शव
बलरामपुर। कोरोना माहमारी के संक्रमण काल में इंसानों को बचाने के लिये तमाम जतन जारी है। वहीं दूसरी तरफ इंसानियत को भी अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ रहा है। ऐसा ही झकझोर देने वाला मामला बलरामपुर में सामने आया है । लुधियाना में मजदूरी करने वाले एक युवक को अपनी पत्नी के लाश को कंधा देने वाले 4 लोग भी इस लॉकडाउन में न मिले तो उसने लोगों से 27 हजार रुपये कर्ज लेकर एम्बुलेंस से अपनी पत्नी की लाश को अपने गांव लाना पड़ा।

गर्भवती थी मृतक पत्नी
अंतिम संस्कार के बाद गांव पहुंचे युवक और उसके 3 मासूम बच्चों को गांव मे बनाये गए क्वारंटाइन सेंटर भेज दिया गया है । बलरामपुर के कठौवा गांव का रहने वाला दद्दन अपनी पत्नी और तीन छोटे-छोटे बच्चों के साथ लुधियाना में रहकर मजदूरी करता था । 26 अप्रैल को गर्भवती पत्नी की तबियत खराब होने पर अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया और कोरोना जांच रिपोर्ट आने तक शव देने से इनकार कर दिया ।

लोगों से उधार लेकर पहुंचा गांव
चार दिनों तक दद्दन अपने मासूम बच्चों को लेकर अपना दर्द समेटे घर और अस्पताल के बीच भटकता रहा। 4 दिन बाद कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने पत्नी गीता का शव उसे सौंपा । लॉकडाउन के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रहे दद्दन ने पहले शव का अंतिम संस्कार लुधियाना में करने को सोचा। लेकिन जब पड़ोसियों ने कोरोना और लॉकडाउन के कारण हाथ खड़े कर दिए और 4 आदमी कंधा देने की परेशानी आ गयी तो लोगों से 27 हजार रुपये कर्ज लेकर एम्बुलेंस से अपनी पत्नी की लाश लेकर 1137 किलोमीटर का सफर तय करने के लिये अपने गाँव निकल पड़ा।

पति और बच्चों को क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया
20 घंटे लगातार सफर के बाद शुक्रवार को दद्दन अपने गांव कठौवा पहुंचा । जहाँ पूरा गांव शोक में डूब गया । बूढ़े माँ बाप के साथ दद्दन को अपना छप्पर का घर भी नसीब नही हुआ । ग्राम प्रधान और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दद्दन और उसके तीन मासूम बच्चों मधु, सुमन और शिवम को गाँव में बने क्वारंटाइन सेंटर कठौवा प्राथमिक विघालय में भेज दिया है ।












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