अद्भुत: इस मंदिर की अध्यक्षता करते हैं मोहम्मद अली, मुस्लिम महिलाएं मंदिर में मानती हैं 'मनौती'
बहराइच का यह मंदिर उन तमाम लोगों को एक आइना दिखाने के काम करता है जो मजहब या धर्म के नाम पर इस देश को बांटने के मंसूबे रखते हैं। मंदिर की देख-रेख व इसकी अध्यक्षता मुस्लिम समुदाय के मोहम्मद अली द्वारा की जाती है।

मजहब के नाम पर दो समुदायों को लड़ाने वालों एवं धार्मिक उन्माद फैलाने वाले लोगों की देश में कमी नहीं है। लेकिन उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में एक ऐसा मंदिर है, जहां संप्रदायिक सौहार्द व एकता की मिसाल इबादत से लिखी जा रही है। बहराइच जिले के बावड़ी थाना क्षेत्र के घुरहरीपुर गांव में स्थित घूर देवी मंदिर सभी धर्मों के लोगों को एक ही धागे में बाँधने का काम कर रहा है। इस मंदिर पर हिंदू महिलाओं के साथ-साथ मुस्लिम महिलाएं भी पूरी श्रद्धा के साथ मां घूर देवी की पूजा अर्चना करती हैं।

मंदिर की देखरेख करते हैं मोहम्मद अली
जनपद बहराइच के महसी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत माता घूर देवी का प्राचीन मंदिर सभी धर्म के लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां नवरात्रि सहित अन्य दिनों में भी मेले का आयोजन होता है। कई प्रकार के मांगलिक कार्यक्रम भी यहां संपन्न होते हैं। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मंदिर की देख-रेख व इसकी अध्यक्षता मुस्लिम समुदाय के मोहम्मद अली द्वारा की जाती है। बताया जा रहा है कि यह मंदिर काफी जर्जर अवस्था में था, लेकिन जब से मोहम्मद अली ने मंदिर की अध्यक्षता संभाली उसके बाद से मंदिर का जीर्णोद्धार कर मंदिर का कायाकल्प करवाया है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर पूजा पाठ कर मन की मुरादे मांगते हैं।

मुस्लिम समुदाय की महिलाएं भी पूजा करती हैं
वही लोगों की माने तो नवरात्रि के दिनों में दोनों समुदाय के लोग इस मंदिर पर पहुंचकर पूजा अर्चना करते हैं। हिंदू रीति रिवाज के साथ मुस्लिम समुदाय की महिलाएं भी मां घूर देवी की पूजा करती दिखाई देती हैं। यह मंदिर जिले में गंगा जमुनी तहजीब का एक ऐसा उदाहरण है जो पूरे देश में बहुत कम देखने को मिलता है। मंदिर में पूजा करने आई मुस्लिम महिलाओं ने बताया कि आस्था अपने मन की संतुष्टि व विश्वास को लेकर किया जाता है। जिसको ईश्वर शक्ति पर विश्वास होता है, वह उसकी पूजा व उपासना करता है। मुस्लिम महिलाओं ने बताया कि जब अपनी मन्नत को पूरा करने के लिए हिंदू समुदाय के लोग दरगाह शरीफ पर चादर चढ़ाने से नहीं कतराते हैं तो हम अपनी मुराद पूरी करने के लिए मंदिर में पूजा कर रहे हैं, तो क्या गलत है?

मुस्लिम महिलाएं मंदिर में मनौती भी मानती हैं
मंदिर में पूजा करने आई क्षेत्र की कई मुस्लिम महिलाओं ने कहा कि अपनी मनौती पूरी करने के लिए मां के मंदिर में हम लोग पूजा अर्चना करने आते हैं। हमें किसी से कोई मतलब नहीं है। उनका कहना है कि जो जातिवाद, धर्मवाद करके बांटते है उनसे हम लोग बहुत दूर रहते हैं। घूर देवी मंदिर को संप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बनाने के पीछे सबसे बड़ा हाथ मंदिर के प्रबंधक मोहम्मद अली का हैं, मोहम्मद अली ने सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश करना शुरू किया जब बौडी क्षेत्र के घुर देवी मंदिर का जीर्णोद्धार करने का फैसला किया था। मंदिर के प्रबंधक मोहम्मद अली ने गांव से लेकर शहर तक चंदा इकट्ठा कर मंदिर को भव्य रूप से बनवाया, मंदिर को अयोध्या की हनुमानगढ़ी की तर्ज पर बजरंगबली का अद्भुत मंदिर भी बनवाया है।












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