UP के इस स्कूल में नहीं है एक भी छात्र, पढ़ाने के बजाय आराम करते हैं पांच शिक्षक, लेते हैं लाखों की सैलरी
UP News: सरकार द्वारा बच्चों को शिक्षित करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं और गांव-गांव में सरकारी स्कूल संचालित हो रहे हैं। अध्यापकों द्वारा हर साल गांव-गांव घूम कर स्कूल में बच्चों का नामांकन करने के लिए लोगों को प्रेरित भी किया जाता है।
यूपी के विभिन्न जनपदों में कई ऐसे सरकारी स्कूल है जहां बैठने की क्षमता ना होने के चलते छात्रों का प्रवेश नहीं लिया जाता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद में एक ऐसा स्कूल है जिसमें एक भी बच्चा नहीं पढ़ता है लेकिन पांच अध्यापकों की तैनाती की गई है।

तीन साल से विद्यालय में बच्चे ना होने के चलते अध्यापक तय समय पर स्कूल में पहुंचते हैं और फिर अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद वापस लौट जाते हैं। विद्यालय में एक भी छात्र का नामांकन ना होने के चलते तीन साल से अध्यापक विद्यालय में बैठकर ही सैलरी ले रहे हैं।
यह सरकारी स्कूल बागपत जनपद के अब्दुलपुर गांव में है। जिसे संविलियन उच्च प्राथमिक विद्यालय के नाम से जाना जाता है। बताया जा रहा है कि इस विद्यालय का निर्माण सन 1990 में कराया गया था। निर्माण कराए जाने के बाद विद्यालय में एक भी बच्चा पढ़ने नहीं आता है।
रिपोर्ट की माने तो गांव में जेल का निर्माण हो रहा था और करीब 5 साल तक जेल का निर्माण होता रहा इस दौरान निर्माण कार्य में मजदूरी करने वाले मजदूरों के बच्चे इसमें पढ़ने के लिए आते थे। पांच साल तक मजदूरों के 15 बच्चे विद्यालय में पढ़े।
हालांकि जेल तैयार हो जाने के बाद मजदूर चले गए। मजदूरों के वापस जाने के बाद साल 2021 से अब तक विद्यालय में एक भी बच्चे का नामांकन नहीं हुआ है। उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक संजय सिंह के साथ ही माहिरा, गजेंद्र सिंह, सुधीर कुमार और सोनिया धामा आदि कुल पांच लोगों की तैनाती है।
अध्यापकों का कहना है कि बच्चों का नामांकन ना होने के चलते विद्यालय के शिक्षक तय समय पर स्कूल पहुंच जाते हैं और रोजाना सुबह स्कूल खोलने के बाद उसमें बैठे रहते हैं तथा शाम को समय पूरा हो जाने के बाद वापस लौट जाते हैं।
इसलिए सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ाना चाहते अभिभावक
रिपोर्ट में यह भी बात सामने आई कि गांव में 30 लोगों का परिवार रहता है। सभी लोग आर्थिक रूप से सक्षम है और अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने की बजाय प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। विद्यालय के प्रधानाध्यापक का कहना है कि कई बार अध्यापकों और ग्राम प्रधान के साथ बातचीत की गई लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।
वहीं इस बारे में बेसिक शिक्षा अधिकारी आकांक्षा रावत द्वारा बताया गया कि गांव में 30 परिवार रहते हैं और सभी लोग सक्षम हैं। सभी लोग अपने बच्चों को अंग्रेजी मीडियम के स्कूलों में पढ़ाते हैं। यहां पर तैनात शिक्षकों को दूसरे विद्यालय से अटैच करने के लिए शासन को सूचना भेजी गई है। शासन स्तर से ही इस पर कार्रवाई की जाएगी।
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