अंबेडकरनगर में कांटों के पथ पर चलेंगे मुकुट बिहारी, आसान नहीं होगा कमल खिलाना!

अंबेडकरनगर। गठबंधन के भंवर में उलझी भाजपा ने अपनी नैया पार लगाने के लिए लंबी जद्दोजहद के बाद अपनी सरकार के सहकारिता मंत्री को मैदान में उतार दिया है। पिछड़ा कार्ड खेलकर भाजपा भले ही अपनी डूबती नैया को बचाने के फिराक में हो, लेकिन हकीकत यही है कि जातीय समीकरण में उलझी यह सीट मुकुट बिहारी के लिए फूल नहीं कांटों का पथ साबित होगी, जिले में विपक्षी राजनीतिक धुरंधरों के साथ-साथ पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी से पार पाना मुकुट बिहारी के लिए एक चुनौती भी होगी, पैराशूट से उतरे बिहारी के लिए यहां कमल खिलाना आसान नहीं होगा।

कौन हैं मुकुट बिहारी

कौन हैं मुकुट बिहारी

योगी सरकार में सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी का जन्म 28 दिसम्बर 1945 को भारत नेपाल सीमा के एक छोटे से गांव मदरिया जनपद बहराइच में हुआ था। किसान परिवार में जन्मे मुकुट बिहारी 1962 में ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सम्पर्क में आये और कई पदों पर कार्य किया। 1971 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की परीक्षा पास करने बाद बहराइच में वकालत शुरू कर दी। 1975 में आपातकाल के समय कांग्रेस सरकार के विरुद्ध मुखर रहे, वर्ष 1978 में एडीजीसी क्रिमनल के पद पर नियुक्त हुये, मुकुट बिहारी 1996 में पहली बार कैसरगंज विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा, मुकुट बिहारी 2002, 2012 और 2017 में विधायक चुने गए और वर्तमान में सरकार में सहकारिता मंत्री हैं।

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आसान नहीं होगी मुकुट बिहारी की राह

आसान नहीं होगी मुकुट बिहारी की राह

भाजपा ने अम्बेडकरनगर में पिछड़ी जाति के मतदाताओं की संख्या देखते हुए भले ही मुकुट के सहारे अपनी इस सीट को बचाने की जतन कर रही हो, लेकिन मुकुट के लिए यह राह आसान नहीं होगी। जातीय समीकरणों में उलझी इस सीट पर भाजपा मुकुट के सहारे बैकवर्ड वोटरों खासकर कुर्मी बिरादरी पर डोरा डाल रही है, तो वहीं दूसरी तरफ ब्राह्मण वोटरों का भाजपा से छिटकना भी तय माना जा रहा है। हरिओम पांडे का टिकट काटने से जहां ब्राह्मणों में नाराजगी फैल सकती है वहीं गठबंधन प्रत्याशी रितेश पांडे जिले में ब्राह्मणों का बड़ा चेहरा माने जाते है ऐसे में ब्राह्मण मतदाताओं का रुझान गठबंधन की तरफ बढ़ सकता है और इतिहास इसका गवाह है कि किस तरह भाजपा के फायर ब्रांड नेता विनय कटियार को यहां से हार मिली थी।

राजनीतिक छत्रपों और अंदरूनी गुटबाजी है एक चुनौती

राजनीतिक छत्रपों और अंदरूनी गुटबाजी है एक चुनौती

मुकुट बिहारी प्रदेश सरकार में भले ही ऊंचे ओहदे पर हों, लेकिन इस जिले के लिए नए ही हैं और एक बाहरी होने के दंश के साथ-साथ उन्हें यहां के राजनीतिक महारथियों से भी निपटना होगा। मुकुट बिहारी जिस जाति से आते हैं जिले में उस जाति के वोटरों पर बसपा विधानमंडल दल नेता लालजी वर्मा का वर्चस्व है तो सपा सरकार के पूर्व मंत्री राम मूर्ति वर्मा का भी प्रभाव है। यही नहीं भाजपा के अंदर चल रही गुटबाजी कई बार सतह पर भी आ गई, जिससे पार पाना मुकुट बिहारी के लिए टेढ़ी खीर सरीखा होगा।

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