Dinesh Khandelwal: मिलिए अनूठे राम भक्त से, 10 साल तक रोजाना आठ घंटे लिखते रहे रामचरित मानस
Ram Bhakt Dinesh Khandelwal: अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनकर तैयार हो गया। 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई है। इस मौके पर जानिए अनूठे राम भक्त दिनेश खंडेलवाल के बारे में।
राम भक्त दिनेश खंडेलवाल राजस्थान के अलवर के रहने वाले हैं। इन्होंने राम चरित मानस को अनूठे अंदाज में लिखा है। ये दस साल तक रोजाना आठ घंटे राम चरित मानस की चौपाइयों के साथ ज्यामितीय डिजाइन बनाकर असाधारण कला का प्रदर्शन किया है।

मीडिया से बातचीत में दिनेश खंडेलवाल कहते हैं कि 'मेरे दादाजी भगवान राम के परम भक्त थे। दादा रोजाना 12 घंटे राम भक्ति में लीन रहते थे। उन्हीं से प्रेरित होकर मैंने भी राम के नाम पर कुछ करने की ठानी, मगर रास्ता अलग चुना।'
दिनेश कहते हैं कि चाहता तो मैं राम भक्ति के लिए पारंपरिक पाठ या प्रार्थना कर सकता था। मैंने राम चरित मानस के अध्यायों को विभिन्न ज्यामितीय डिजाइनों में लिखना शुरू किया। प्रत्येक डिज़ाइन पर राम का पवित्र नाम अंकित किया, जो उनके अटूट समर्पण का प्रमाण था।

वर्तमान में दिनेश खंडेलवाल दिल्ली कैंट इलाके में जवाहरात का काम करते हैं। साल 1996 से अब तक करीब बारह सौ पृष्ठों की रामचरित मानस अलग-अलग डिजाइन में लिख चुके हैं। हर डिजाइन में राम का नाम है, जो अपने आप में अनूठा है।
साल 1996 में दिनेश खंडेलवाल की उम्र 20 साल थी। तब ही इन पर राम धुन सवार हुई। अनूठे अंदाज में राम चरित मानस लिखने का सिलसिला हुआ, जो साल 2006 तक चला। अनूठी रामचरित मानस लिखने में तीन से चार हजार पेन और रंगीन मार्कर लगे।

अनूठी रामचरित मानस लिखने की याद में दिनेश खंडेलवाल ने सभी पेन व मार्कर संभालकर रखे हैं, जिन्हें एक अपनी यादगार धरोहर बताते हैं। रामचरितमानस के सातों काण्डों को खण्डेलवाल ने अनूठे ढंग से बाइंडिंग करवाकर रखा है। इस काम में पत्नी कविता खंडेलवाल और दो बेटों का सहयोग मिला।

अनूठे अंदाज में रामचरित मानस लिखते-लिखते दिनेश खंडेलवाल ने शिव भक्ति में लीन रहे। शिवलिंग के आकार में सुंदरकांड लिख डाला, जो हिंदू पौराणिक कथाओं में दो प्रतिष्ठित प्रतीकों भक्ति और कलात्मकता का दिव्य मिश्रण है। इस पर दिनेश खंडेलवाल कहते हैं कि हनुमानजी भगवान शिव के अंश हैं, लेकिन भगवान राम के द्वारपाल हैं।












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