अनपढ़ मां-बाप ने बेटे को पढ़ा-लिखाकर बनाया काबिल, फिर बेटा-बहू दोनों बने कमिश्नर

अलवर। यह कहानी गरीब में जीने वाले एक परिवार की। पति पत्नी दोनों ही अनपढ़ थे, मगर इन्होंने पढ़ाई का मोल अच्छे समझा और खेती बाड़ी करके बेटे को पढ़ने लिखने का भरपूर दिया। बेटा अफसर बना और बहू भी अफसर ही लाया। आज दोनों अपने जिला मुख्यालय पर बतौर कमिश्नर कार्यरत हैं।

इस सक्सेस कहानी की शुरुआत होती है राजस्थान के अलवर जिले के मालाखेड़ा के पास स्थित गांव सोहनपुर से। सोहनपुर के किसान परिवार में बेटे का जन्म रखा। नाम रखा सोहन सिंह नरूका। सोहन सिंह के माता-पिता कभी स्कूल नहीं गए थे, मगर इन्होंने सोहन सिंह के स्कूल की ओर बढ़ते कदम कभी नहीं रोके। गांव के सरकारी स्कूल से बाहरवीं तक की पढ़ाई की। फिर अलवर के राजर्षि कॉलेज से स्तानक की पढ़ाई पूरी की।

कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही सोहन सिंह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों में जुट गए थे। राजस्थान प्रशासनिक सेवा की परीक्षा दी। दूसरे प्रयास में सफल हुए और तहसीलदार बने। वर्तमान में ये अलवर नगर परिषद के कमिश्नर हैं। इनकी पत्नी मिनाश्री चौहान सेल टैक्स में असिस्टेंट कमिश्नर पद पर कार्यरत है।

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