Umesh Pal Hatyakand: अशरफ को कभी कोर्ट में पेश कर सकती है पुलिस, सीजेएम कोर्ट ने दी छूट
बरेली जेल में बंद अशरफ से उमेश पाल हत्याकांड में पूछताछ करने और प्रयागराज लाने का रास्ता साफ हो गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बी वारंट जारी करते हुए पुलिस को सुविधानुसार अशरफ को कोर्ट में पेश करने की छूट दी है।

umesh pal hatyakand: बरेली जेल में अतीक अहमद के भाई अशरफ को प्रयागराज लाने और उमेश पाल हत्याकांड में पूछताछ करने के रास्ता साफ हो गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिनेश चंद्र गौतम ने बी वारंट जारी करते हुए पुलिस को सुविधानुसार अशरफ को कोर्ट में पेश करने की छूट दी है। इसके मुताबिक, पुलिस कभी भी अशरफ को अब कोर्ट में पेश कर सकती है।
कोर्ट ने अशरफ को पेश करने के लिए कोई तिथि पुलिस को नहीं दी है। मगर ऐसा मना जा रहा है कि पुलिस अशरफ को जल्दी ही अपनी कस्टडी रिमांड पर ले सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उमेश पाल हत्याकांड मामले में विवेचक प्रभारी निरीक्षक धूमनगंज राजेश कुमार मौर्य ने 23 मार्च को इलाहाबाद न्यायालय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने वारंट बी जारी करने की प्रार्थना की थी।
उन्होंने कोर्ट को दिए अपने प्रार्थना पत्र में लिखा कि खालिद अजीम उर्फ अशरफ उमेश पाल हत्याकांड में नामजद अभियुक्त है। वह एक कुख्यात अपराधी है,जोकि 2016 के एक मामले में बरेली जेल में निरुद्ध है। उमेश पाल हत्या मामले में नामजद अभियुक्त अशरफ के खिलाफ उमेश पाल हत्या में साजिशकर्ता के रूप में पर्याप्त सबूत मिले हैं। उक्त मामले में पूछताछ और सबूत जुटाने के लिए अशरफ को पुलिस रिमांड पर लेना आवश्यक है।
जिसके बाद कोर्ट ने बी वारंट जारी करते हुए पुलिस को सुविधानुसार अशरफ को कोर्ट में पेश करने की छूट दी है। हालांकि, कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में अशरफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश भी पारित किया है। खबर के मुताबिक, शनिवार को अशरफ के अधिवक्ताओं की ओर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पेशी करने की मांग वाली अर्जी दाखिल की गई थी, जिसे कोर्ट ने नहीं माना।
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कोर्ट ने अपने आदेश में बरेली जेल को निर्देशित भी कर दिया है। पुलिस की टीम अशरफ को लाने के लिए बरेली गई हुई है। सीजीएम कोर्ट ने अपने 23 मार्च के आदेश में कहा है कि आरोपी अशरफ को लाने वाले सभी सुरक्षाकर्मी बॉडी बॉर्न कैमरे से लैस होंगे। जिस वाहन से इसे लाया जाएगा उसका प्रति 400 किलोमीटर पर तकनीकी परीक्षण कराया जाए। किसी भी प्रकार का अमानवीय व्यवहार नहीं किया जाएगा।












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