इस्लाम धर्म छोड़कर संत बनने वाली कौन हैं भवानी मां, जिन्हें AAP ने दिया इलाहाबाद से दिया टिकट

Prayagraj news, प्रयागराज। लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद संसदीय सीट से चुनाव लड़ने मैदान में उतरी किन्नर अखाडे की महामंडलेश्वर भवानी मां ( Bhawani maa ) की चर्चाएं पिछले दिनों कुंभ मेले के दौरान हुई थीं। लेकिन अब एक बार फिर वह चर्चा में हैं और वजह है उनका लोकसभा का चुनाव लड़ना। भवानी मां को आम आदमी पार्टी ने इलाहाबाद संसदीय सीट से टिकट दिया है और अब वह बड़े दलों के प्रत्याशियों से दो-दो हाथ करने को तैयार हैं।

दिल्ली की रहने वाली हैं भवानी मां

दिल्ली की रहने वाली हैं भवानी मां

किन्नर अखाड़े की भवानी मां का असली नाम भवानी नाथ वाल्मीकि है। यह 17 नवंबर 1972 को दिल्ली के बेहद चर्चित चाणक्यपुरी इलाके में गरीब परिवार में जन्मी। अपने एक इंटरव्यू के दौरान भवानी मां ने बताया कि वह कुल 8 भाई बहन थे और गरीब परिवार होने के कारण उन सब का लालन पालन अच्छे से नहीं हो पाता था। पिता आर्थिक तंगी के बीच वह किसी तरह बच्चों को आगे बढ़ने की सीख देते थे। लेकिन सबसे बड़ा व्रजपात किशोरावस्था में पहुंचने के बाद भवानी पर उस वक्त हुआ जब 13 साल की उम्र में उन्हें पता चला था कि वह एक किन्नर हैं।

छोड़ दिया था घर

छोड़ दिया था घर

परिवार से लेकर पड़ोसी और इलाके के लोगों का व्यवहार अचानक से बदलने लगा और लोगों का नजरिया भवानी के प्रति बेहद ही अजीब होता था और उन्हें हेय दृष्टि से देखा जाता है। भवानी को पता भी नहीं था कि आखिर किन्नर क्या होता है और क्यों लोग उससे अजीब व्यवहार करते हैं। लेकिन समाज की कुरीतियों का सामना करते-करते परेशान होकर एक दिन भवानी ने अपना घर छोड़ दिया। उम्र बढ़ने के साथ भवानी को जीवन यापन में समस्या तो आ रही थी, लेकिन उन्होंने प्रकृति के इस निर्णय को स्वीकार किया।

इस्लाम धर्म कबूला

इस्लाम धर्म कबूला

भवानी के जीवन में बड़ा परिवर्तन तब हुआ जब वर्ष 2012 में भवानी ने इस्लाम धर्म अपनाने का फैसला कर लिया। भवानी के पहले गुरु जारी नूरी की प्रेरणा से वह इस्लाम धर्म कबूल कर नयी जिंदगी शुरू करने आगे बढ़ी। भावनी ने अपना नाम बदलकर शबनम रख लिया और कई सालों तक यही पहचान ही भवानी को दुनिया दिखाती रही। रोजा और नियम कानून का पालन करते हुये 2012 में भवानी ने बतौर शबनम हज की यात्रा की और दुनिया को अपने नजरिये से देखना शुरू कर दिया। लेकिन इस्लाम धर्म अपनाने के बाद वह खुद को उसके अनुरूप अभी भी पूरी तरह नहीं ढाल पा रही थीं।

2015 में हुई घर वापसी

2015 में हुई घर वापसी

मन में सनातन संस्कृति के प्रति आस्था ने उन्हें वापस हिंदू धर्म में लौटने को बाध्य किया। यही वह समय था जब भवानी की मुलाकात लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से हुई और भवानी की घर वापसी का दौर शुरू हुआ। 2015 में वह वापस हिंदू धर्म में लौट आईं। साल 2015 में लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के साथ मिलकर भवानी मां ने किन्नर अखाड़े की स्थापना की और यहीं से एक नये अध्याय की शुरुआत हो गई। साल 2016 में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के किन्नर अखाड़े में वह धर्मगुरु बनी और किन्नरों के जीवन सुधार से लेकर समाज को दिशा देने की पहल उन्होंने शुरू की।

2017 में बनी महामंडलेश्वर

2017 में बनी महामंडलेश्वर

वर्ष 2017 में शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने भवानी मां को साल 2017 में महामंडलेश्वर की उपाधि दी। किन्नर अखाड़े में भवानी मां का कद दूसरे स्थान पर आता है। सिंहस्थ कुंभ के बाद किन्नर अखाड़े का कद बढ़ना शुरू हुआ जो प्रयागराज के कुंभ में अपने विशालतम आकार में आ गया। लोगों ने किन्नर अखाड़े को हाथों हाथ लिया और मान सम्मान से लेकर संत के तौर पर जन स्वीकार्यकता भी दे दी। अत्याधिक समर्थन से उत्साहित किन्नर अखाड़े ने लोकसभा चुनाव की घोषणा हुई तो इसमें भी उतरने का फैसला लिया और बड़े दलों से संपर्क कर इलाहाबाद व फूलपुर से चुनाव लड़ने की अपनी मंशा जाहिर की। लेकिन किसी भी बड़े दल ने ना तो लक्ष्मी नारायण और ना ही भवानी मां को टिकट दिया। जिसके बाद भवानी मां ने आम आदमी पार्टी से संपर्क किया और अब उनके टिकट पर इलाहाबाद से चुनाव लडेंगीं। फिलहाल भवानी मां का चुनाव कैसा होगा और वह कितना फाइट करेंगी यह तो कुछ समय बाद पता चलेगा। लेकिन अपने भक्तों के सहारे वह बड़े दलों का कितना गणित बिगाड़ेंगी यह देखना दिलचस्प होगा। चूंकि अभी इस सीट पर केवल भाजपा ने ही अपना प्रत्याशी घोषित किया है आर अभी कांग्रेस के अलावा सपा बसपा गठबंधन का प्रत्याशी भी घोषित होने वाला है। ऐसे में भवानी को देखते हुये ही दोनों दल अपने प्रत्याशी उतारेंगे।

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