Rajasthan Chunav 2023: अजमेर में ये बागी-निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं BJP-कांग्रेस के हार-जीत के समीकरण
Assembly election Ajmer Rajasthan: राजस्थान का हृदय स्थल अजमेर जिला राजनीति का भी गढ़ है। अजमेर ने कई चुनावों में राजस्थान की सत्ता के सियासी समीकरण बनाए व बिगाड़े हैं। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में अजमेर जिले की आठ विधानसभा सीटों पर अब तक भाजपा व कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही थी, लेकिन जैसे-जैसे टिकट फाइनल हो रहे हैं, वैसे-वैसे दोनों ही पार्टियों में कई 'अपनों' ने ही बगावत कर डाली। दूसरी ओर निर्दलीय चुनाव लड़ने वालों की भी कमी नहीं है। 9 नवंबर को नाम वापसी तक अगर हालात ऐसे ही रहे तो इस बात से मना नहीं किया जा सकता कि साल 2023 के चुनाव में दोनों ही पार्टियों के लिए जीत की राह आसान नहीं रहने वाली।
अजमेर जिले की आठ सीटों की स्थिति
अजमेर जिले में विधानसभा की आठ सीट अजमेर उत्तर , अजमेर दक्षिण , नसीराबाद , किशनगढ़ , केकड़ी , ब्यावर, मसूदा व पुष्कर हैं। यूं तो आठों सीटों में से अधिकांश पर भाजपा-कांग्रेस ने अपने-अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं, मगर अजमेर उत्तर सीट से कांग्रेस व मसूदा सीट से भाजपा उम्मीदवार घोषित होना शेष हैं। खास बात यह है कि जहां दोनों ही पार्टियों ने अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं, वहां बगावत सुर भी मुखर हो रहे हैं।

1 अजमेर उत्तर विधानसभा सीट चुनाव 2023
2008 में अस्तित्व में आए अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने पूर्व शिक्षामंत्री व चार बार से लगातार विधायक वासुदेव देवनानी पर भरोसा जताया है। वहीं, कांग्रेस ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। अजमेर उत्तर के लिए ज्यों ही वासुदेव देवनानी के नाम की घोषणा हुई भाजपा में बगावत के सुर मुखर हो गए।
पिछली चार बार से नगर निगम में पार्षद ज्ञान सारस्वत ने भाजपा से बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। ज्ञान सारस्वत अगर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ते हैं तो इसका सीधा-सीधा नुकसान भाजपा के वासुदेव देवनानी को पहुंचेगा। दूसरी ओर कांग्रेस ने अभी तक अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है। भाजपा समर्थित साध्वी अनादि सरस्वती ने टिकिट नहीं मिलने की वजह से कांग्रेस का दामन थाम लिया है। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस उन्हें अपना उम्मीदवार बना सकती है।
कांग्रेस के लिए बड़ी मुश्किल यह हो गई कि अनादि सरस्वती के कांग्रेस ज्वाइन करने पर कांग्रेस का परंपरागत वोट मुस्लिम वर्ग इससे नाराज हो गया। डीसीसी की कार्यकारिणी ने भी इस नाम पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जो इंसान पिछले कई सालों से कांग्रेस को गालियां देते आ रहा है। अगर कांग्रेस पार्टी उसे अपना प्रत्याशी बनाकर चुनावी मैदान में उतारेगी तो कांग्रेस पदाधिकारी सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा दे देंगे। कांग्रेस से टिकट की आस लगाए बैठे पूर्व प्रत्याशी महेंद्र सिंह रलावता व सीएम अशोक गहलोत के खास धर्मेंद्र राठौड़ की नाराजगी भी यहां कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है।
2 पुष्कर विधानसभा सीट चुनाव 2023
पुष्कर विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा व कांग्रेस के बागी निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। यहां पर भाजपा से उम्मीदवार सुरेश रावत लगातार तीसरी बार मैदान में हैं, लेकिन इस बार भाजपा के अशोक रावत ने भी दावेदारी जताई थी। टिकट नहीं मिलने की वजह से अब बागी होकर चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस से नसीम अख्तर उम्मीदवार हैं, जो एक बार पुष्कर से चुनाव जीत चुकी हैं और पूर्व गहलोत सरकार में शिक्षा मंत्री भी रह चुकी हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. श्रीगोपाल बाहेती ने टिकट नहीं मिलने की वजह से निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं।
3 मसूदा विधानसभा सीट चुनाव 2023
मसूदा विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने एक बार फिर अपने जीते हुए उम्मीदवार राकेश पारीक पर भरोसा जताया है। यहां कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर बागियों की फेहरिस्त लंबी है। वाजिद खान चीता, ब्रह्मदेव कुमावत, हाजी कय्यूम खान जैसे बड़े कांग्रेसियों ने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। अगर ये सभी चुनाव लड़ते हैं तो कांग्रेस के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं। वहीं, इस सीट पर अभी भाजपा ने अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है ।
4 किशनगढ़ विधानसभा सीट चुनाव 2023
किशनगढ़ विधानसभा सीट पर भाजपा के अजमेर सांसद भागीरथ चौधरी को उतारा है। पिछली बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर हारे युवा नेता विकास चौधरी को टिकट नहीं मिलने से उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया और टिकट भी ले आए हैं, लेकिन इन दोनों के बीच पूर्व निर्दलीय विधायक सुरेश टांक एक बार फिर चुनावी रण में उतरेंगे। वहीं, कांग्रेस से टिकट की मांग कर रहे राजू गुप्ता व पूर्व विधायक नाथूराम सिनोदिया कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन सकते हैं।
5 केकड़ी विधानसभा सीट चुनाव 2023
केकड़ी एक ऐसी विधानसभा सीट है, जहां अभी तक भाजपा व कांग्रेस के किसी भी बागी की बगावत खुलकर सामने नही आई। भाजपा के शत्रुघ्न गौतम व कांग्रेस के डॉ रघु शर्मा की आमने-सामने की टक्कर है, लेकिन कांग्रेस के एक बागी जितेंद्र बोयत ने आजाद पार्टी से टिकट हासिल कर लिया है।
6 नसीराबाद विधानसभा सीट चुनाव 2023
बात अगर नसीराबाद विधानसभा सीट की करें तो यहां पर भाजपा के लिए राहत है। विधायक रामस्वरूप लाम्बा दूसरी बार चुनावी मैदान में हैं, लेकिन फिलहाल भाजपा की ओर से किसी ने भी बगावत नहीं की है जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार शिवप्रकाश गुर्जर के सामने बागियों की बगावत खुलकर सामने आई है। पिछले 50 साल से कांग्रेस पूर्व राज्यपाल गोविंद सिंह गुर्जर के परिवार से ही टिकट देती आई है, लेकिन इस बार कांग्रेस ने इस परिवार के इतर टिकट दिया है। जिसके बाद रामनारायण गुर्जर व महेंद्र गुर्जर के समर्थक नाराज हो चुके हैं।
7 ब्यावर विधानसभा सीट चुनाव 2023
ब्यावर विधानसभा सीट में भी कांग्रेस ने वैश्य कार्ड खेलते हुए दोबारा पारस पंच को मैदान में उतारा है। वहां भी बागी महेंद्र रावत चुनाव लड़ने की हामी भर चुके हैं। जबकि भाजपा ने चार बार से विधायक शंकर सिंह को एक बार फिर टिकट दिया है। लेकिन उनके सामने अभी किसी प्रकार की कोई बगावत नहीं है।
8 अजमेर दक्षिण विधानसभा सीट चुनाव 2023
अजमेर दक्षिण सीट पर कांग्रेस ने इस बार पार्षद व नगर निगम में प्रतिपक्ष नेता द्रोपदी कोली को टिकट दिया है, लेकिन पूर्व प्रत्याशी हेमन्त भाटी के समर्थकों ने इसका विरोध करके कांग्रेस के लिए मुसीबत पैदा कर दी है। वहीं, लगातर चार बार से भाजपा से विधायक अनिता भदेल के सामने अभी किसी बागी ने ताल नहीं ठोकी है।
क्षेत्रीय पार्टियों से भी उम्मीदवार
अजमेर की आठ विधानसभा सीटों पर भाजपा व कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर होती है, लेकिन इस बार क्षेत्रीय पार्टियां जैसे आरएलपी , आप , बसपा , सपा भी अपने-अपने उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतार सकती है। हालांकि अजमेर की इन आठ विधानसभा सीटों पर फिलहाल दोनों पार्टियां बागियों को मनाने में जुटी हैं, लेकिन 9 नवंबर को नामांकन वापसी की तारीख है। इसके बाद सूरत साफ नजर आएगी।












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