28 साल से गुजरात हाईकोर्ट में लंबित तलाक के केस पर अब फैसला आया, पत्नी को देने होंगे 17 लाख रु.
अहमदाबाद। गुजरात में एक दंपति के तलाक की याचिका पर हाईकोर्ट ने 28 साल बाद फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पति को तलाक को मंजूरी दे दी है। साथ ही निर्देश दिया है कि पति अपनी पूर्व पत्नी को गुजारा भत्ता के तौर पर 17 लाख रुपये दे। कोर्ट का यह फैसला आते ही व्यक्ति को अपनी दूसरी शादी की वैधता भी मिल गई है। हालांकि, पूर्व पत्नी से अलग होने के लिए उसे 17 लाख चुकाने होंगे। यह रकम महिला को निर्वाह-भत्ता के रूप में मिलेगा। बता दें कि, तलाक का यह मामला 33 साल पुराना है, जो कि 28 साल पहले हाईकोर्ट पहुंचा था।

जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद के रहने वाले धानजीभाई परमार की वर्ष 1978 में इंदिराबेन के साथ शादी हुई थी। उन्हें वर्ष 1983 में एक बच्चा भी हुआ, लेकिन दांपत्य जीवन ठीक-ठाक न चलने की वजह से परमार ने वर्ष 1986 में तलाक के लिए एक स्थानीय अदालत में याचिका डाल दी। अदालत ने मामले में एकपक्षीय फैसला देते हुए परमार के तलाक को मंजूरी दे दी। इसके एक महीने के अंदर ही परमार ने रामिलाबेन से दूसरी शादी कर ली। रामिलाबेन से परमार को तीन बच्चे भी हुए।
वहीं, परमार की दूसरी शादी के 7 महीने बाद इंदिराबेन ने सिविल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। वर्ष 1991 में हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। इससे परमार की दूसरी शादी खतरे में पड़ गई। फिर 28 साल तक यह केस पेंडिंग पड़ा रहा। लगभग 3 दशक लंबा चलने के बाद केस पर हाईकोर्ट में फिर सुनवाई हुई। जिसमें हाईकोर्ट ने परमार के तलाक को वैधता दे दी। साथ ही परमार को आदेश दिया कि वो अपनी पूर्व पत्नी इंदिराबेन को गुजारा भत्ता के रूप में 17 लाख रुपये दे।
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