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रोटी वाली अम्मा: 80 साल की भगवान देवी को है मदद की जरूरत, 20 रुपए में खिलाती हैं स्वादिष्ट खाना

आगरा। 'मां' जिसने 9 महीने कोख में रखकर दो बच्चों को जन्म दिया। उन्हें पाला-पोसा, खुद भूखा रही, लेकिन जिगर के टुकड़ों का पेट भरती रही। खुद प्यासी रही, लेकिन बच्चों का गला सूखने नहीं दिया। उस मां को बच्चों ने उम्र के उस पड़ाव में बेसहारा छोड़ दिया, जब उसके शरीर ने साथ देना छोड़ दिया। लेकिन बूढ़ी मां ने भी हार नहीं मानी, दूसरों के आगे हाथ नहीं फैलाए। कुछ करने की ठानी और फुटपाथ पर चूल्हा लगाकर रोटी-सब्जी बनाने लगी। चार रोटी और दो सब्जी की कीमत है 20 रुपए और दो रोटी और दो सब्जी को 10 रुपए की कीमत पर बेचकर बूढ़ी मां अपना जीवन यापन करने लगी। धीरे-धीरे बूढ़ी मां 'रोटी वाली अम्मा' के नाम से मशहूर हो गईं, लेकिन कोरोना महामारी और लॉकडाउन के चलते अम्मा का काम ठप पड़ गया। अब मुश्किल से ही ग्राहक आते हैं। अम्मा को लोगों की मदद की दरकार है।

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    रोटी वाली अम्मा: 80 साल की भगवान देवी को है मदद की जरूरत, 20 रुपए में खिलाती हैं स्वादिष्ट खाना
    'रोटी वाली अम्मा' के नाम पुकारते हैं लोग

    'रोटी वाली अम्मा' के नाम पुकारते हैं लोग

    ताजनगरी आगरा में राजामंडी से सेंट जॉन्स कॉलेज की ओर जाने वाले रास्ते पर एमजी रोड के फुटपाथ पर 'रोटी वाली अम्मा' के नाम से मशहूर बुजुर्ग महिला का नाम भगवान देवी है। भगवान देवी बाग मुजफ्फर खां की रहने वाली हैं। उनके दो बेटे हैं और दोनों की शादी भी कर चुकी हैं। भगवान देवी के पति की मौत की मौत हो चुकी है। भगवान देवी बताती हैं कि पति की मौत के बाद उन्हें खाने तक के लाले पड़ गए। बहुओं ने बेटों को इश तरह वश में किया कि रोज लड़ाई झगड़ा होने लगा।

    नहीं मानी हार, गरीबों को खाना खिलाना शुरू किया

    नहीं मानी हार, गरीबों को खाना खिलाना शुरू किया

    भगवान देवी बताती हैं कि उन्होंने अपना पेट पालने के लिए कुछ करने का मन बनाया। उन्होंने गरीबों को भोजन खिलाना शुरू किया। कुछ बर्तन लिए और घर पर ही सब्जी और चावल बना लोगों को खिलाया। फिर राजामंडी और सेन्ट जॉन्स कॉलेज के बीच में फुटपाथ पर एक चूल्हा बनाया। पिछले साल तक वह 20 रुपए में चार रोटी और दो सब्जी देती थीं, जबकि दो रोटी और दो सब्जी की कीमत 10 रुपए थी। गरीब आदमी भोजन करने उनके पास ही आता था।

    अब नहीं आते ग्राहक, अम्‍मा को मदद की है जरूरत

    अब नहीं आते ग्राहक, अम्‍मा को मदद की है जरूरत

    'अम्मा' रोज बदल-बदल कर सब्जियां बनाती थीं और गरमा-गर्म रोटियां सेंक कर लोगों को खिलाती थीं। लेकिन कोरोना महामारी ने सब चौपट कर दिया। संक्रमण का डर और लॉकडाउन की वजह से 'अम्मा' के पास ग्राहकों की कमी पड़ गई। अम्मा ने बताया कि वह पिछले 15 साल से ये काम कर रही हैं, लेकिन बिक्री नहीं हो रही है। मुश्किल से ही खाना खत्म हो पाता है।

    'बाबा का ढाबा' पर लग गई थी लोगों की भीड़

    'बाबा का ढाबा' पर लग गई थी लोगों की भीड़

    बता दें, दिल्ली के मालवीय नगर के एक ढाबे के बुज़ुर्ग मालिक कांता प्रसाद का वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद बाबा के ढाबे पर मटर पनीर खाने के लिए दिल्ली वासियों की भीड़ लग गई थी। इसके अलावा देश की कई बड़ी हस्तियों ने भी इस वीडियो शेयर करते हुए मदद के लिए हाथ बढ़ाए। सैकड़ों लोगों ने बाबा के ढाबे पर जाकर खाना खाने के बाद दूसरे लोगों से भी खाने की अपील की।

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