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बावरिया गैंग की 7 शातिर महिलाएं गिरफ्तार, जानिए 'खून से सने' इस गिरोह का 20 साल पुराना इतिहास

उत्तरी भारत में लगभग पिछले दो दशकों में बावरिया गैंग ने जमकर उत्पात मचाया है। एक खास तरीके से लूट की वारदातों को अंजाम देने वाला यह खतरनाक जनजातिये गिरोह काफी समय बाद एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। आगरा के बाह क्षेत्र में पुलिस ने बावरिया गैंग की 7 महिलाओं को गिरफ्तार किया है। इनके द्वारा सोमवती अमावस्या पर बटेश्वर के ब्रह्मलालजी मंदिर में चेन स्नेचिंग, जेबकटी से लेकर गांजे तक की बिक्री की जा रही थी।

बावरिया गैंग की 7 महिलाएं गिरफ्तार
आपको बता दें कि सोमवती अमावस्या पर बटेश्वर धाम मंदिर में भारी संख्या में कांवड़िये और अन्य श्रद्धालु पहुँचते हैं। ऐसे में यहां लोगों का हुजूम इखट्टा हो जाता है। वहीं पिछले दो सोमवार से लगातार बटेश्वर धाम मेले में चेन स्नेचिंग, पर्स चोरी, कीमती सामान चोरी, जेबकटी की घटनाए सामने आ रही थी। जिसकी सुचना पुलिस को मिल चुकी थी।

7 women arrested from Bateshwar temple in agra know the story of bawariya gang

शमसान घाट में की थी पनाह
वहीं इस सोमवार को पुलिस पहले से सतर्क थी और इन घटनाओं को अंजाम देने वाले गिरोह को रंगे हाथ पकड़ने के लिए अपना जाल बिछा चुकी थी। प्रभारी निरीक्षक बाह कुलदीप दीक्षित के अनुसार सादी वर्दी में कई पुरुष व् महिला पुलिसकर्मी भीड़ में शामिल हो गए थे, जो संदिग्ध लोगों पर नजर रख रहे थे। इसी बीच पुलिस ने दो महिलाओं की संदिग्ध गतिविधियों के चलते गिरफ्तार कर लिया। जब पकड़ी गई महिलाओं से पूछताछ की गई तो गिरोह के बटेश्वर के श्मशान घाट में होने की जानकारी मिली।

पूछताछ में हुआ चौका देने वाला खुलासा
गिरोह के शमसान में होने की सूचना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंच कर 5 और महिलाओं को 7.30 किलो गांजे के साथ पकड़ लिया। पूछताछ में जब महिलाओं ने सच्चाई बताई तब पुलिस भी हैरान रह गई। इन्होने बताया कि ये बावरिया गैंग से ताल्लुक रखती है। पुलिस के अनुसार ये सभी सभी महिलाएं खतरनाक बावरिया गिरोह के लिए मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश में कई वारदातों को अंजाम दे चुकी है।

कार से वारदात को अंजाम देने आई थी महिलाएं
पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि ये महिलाएं भरतपुर और एटा की हैं, जिनके द्वारा मंदिर में हुई चेन स्नेचिंग एवं जेबकटी की वारदातें भी कबूली गई हैं। पूछताछ में महिलाओं ने बताया कि सोमवती अमावस्या पर दो चार पहिया गाड़ियों में सवार होकर बटेश्वर आई थीं। आरोपी गुड्डी का पति गुगली उर्फ बच्चू सिंह गिरोह की सरगना है। उसके इशारे पर ही मेलों में संत समागम और मंदिरों में चेन स्नेचिंग और जेबकटी करती हैं। बुलंदशहर, मध्य प्रदेश और राजस्थान में पकड़े जाने पर जेल भी जा चुकी हैं। मंदिर क्षेत्र में नशेड़ियों को बेचने के लिए गांजा भी साथ लाती हैं।

पकड़ी महिलाओं में डिकरन (चिकसान) भरतपुर की गुड्डी देवी, गीता, सुमन, रेखा, काली, दाना मंडी (एटा) की लक्ष्मी, सपना शामिल हैं। वहीं पकड़ने वाली टीम में राजाबाबू, गोविंद राम, अवधेश कुमार, रोहित कुमार, अमित कुमार, सौरभ कुमार, आदेश कुमार, पवन कुमार, भवनुुश कुमारी, इंदू, रूबी, संध्या राजपूत आदि रहीं। एसीपी बाह रविंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि चेन स्नेचिंग और एनडीपीएस एक्ट में महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

बावरिया गैंग का सीजन
क्या आपको पता है कि इस गिरोह का भी सीजन हुआ करता था। दरअसल, बावरिया गैंग अमावस्या की रात से वारदातों को अंजाम देने की शुरुवात करते थे। दीपावली की रात से बावरिया लुटेरे सक्रिय हो जाते थे और होलिका दहन की रात तक वे लूटपाट करते थे। बावरिया लुटेरे दीपावली की रात पूजा-पाठ करने के बाद वारदात की शुरुवात करते थे। जनजातीय लुटेरों के गुरू की देखरेख में पूजा होती थी। पूजा करने के बाद गिरोह के लुटेरे पत्नी और बच्चों के साथ लूटपाट की घटनाओं को अंजाम देने के लिए निकल पड़ते थे।

घरों में घुसकर करते थे लूट
बावरिया लुटेरे आमतौर पर शहर की बाहरी कालोनियां को निशाना बनाते थे। वारदात से पहले गिरोह की महिलाएं और बुजुर्ग बनावटी फूल और खिलौने बेचने के बहाने कालोनियों में घूमकर रेकी करते थे। बाहर से ठीक-ठाक देखने वाले घर को चिह्नित करते थे। इस दौरान वे घर में रहने वाले लोगों और उनकी आय के बारे में जानकारी करते थे।

पूजा-पाठ से करते थे लूट की शुरुवात
लूट के लिए घर चिह्नित होने के बाद इस गिरोह के लोग परिवार की महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को ट्रेन से दूसरे शहर में भेज देते थे। आमतौर से रात में 12 बजे के बाद ही घटना को अंजाम देते थे। अपने अड्डे से वारदात के लिए निकलने से पहले ये लोग पूजा करते थे और शगुन और अपशगुन का विशेष ख्याल रखते थे। घर में धावा बोलने के बाद अंदर मौजूद सदस्यों के सिर पर डंडे से प्रहार कर खून बहाने के बाद ही लूटपाट करना शुरू करते हैं।

7 women arrested from Bateshwar temple in agra know the story of bawariya gang

खून से सना बावरिया गिरोह का इतिहास
इन लुटेरों का मानना है कि खून बहाने से उनकी कुल देवी प्रसन्न होती हैं और उनकी रक्षा करती हैं। यही वजह है कि वारदात की रात घर में यदि कोई व्यक्ति नहीं है तो ये लुटेरे बिना लूटपाट किए वापस चले जाते हैं। घर में चाहे कितना भी माल-असवाब क्यों न हो।

सन 2000 में हुई थी बावरिया गैंग की शुरुवात

-> 20 नवंबर 2000 की रात खोराबार (अब तारामंडल) इलाके के शिवाजीनगर कालोनी में राकेश राय के घर में धावा बोलकर बावरिया लुटेरों ने गोरखपुर में पहली बार वारदात को अंजाम दिया था। इन लुटेरों ने घर में मौजूद दो बच्चों सहित छह लोगों की हत्या कर दी थी। उनके हमले में राकेश राय की बेटी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। लंबे समय तक उनका दिमागी संतुलन बिगड़ा रहा।

-> 21 अक्टूबर 2001 की रात बावरिया लुटेरों का गोरखनाथ इलाके के वृंदावन कालोनी में कहर टूटा था। एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या और एक युवक को घायल कर इन लुटेरों ने लूटपाट की थी।

-> अक्टूबर 2010 में गुलरिहा इलाके के लक्ष्मीपुर में संजय श्रीवास्तव के घर इन लुटेरों ने धावा बोला था। इस दौरान उन्होंने गृहस्वामी, उनकी पत्नी, साली, सास और ससुर को गंभीर रूप से घायल कर दिया था।

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