अल जवाहिरी के बाद अल कायदा का नेता कौन होगा, उभरे हैं कई नाम

वाॅशिंगटन, 04 अगस्त। अमेरिका के ड्रोन मिसाइल हमले में अयमान अल जवाहिरी की मौत को ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अल कायदा के लिए सबसे बड़ा झटका कहा जा रहा है. 2011 में ओसामा बिन लादेन को अमेरिकी नेवी सील्स के कमांडो दल ने एक विशेष कार्रवाई में मार दिया था. अब संगठन का नेतृत्व कौन संभालेगा इसे लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है. विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल 3-4 लोगों के नाम उभरे हैं जो अल कायदा के अगले नेता के रूप में सामने आ सकते हैं.
सैफ अल अदेल
रहस्यमयी और आमतौर पर चर्चाओं से दूर रहने वाला मिस्र का पूर्व स्पेशल फोर्सेज का अधिकारी अल कायदा के शीर्ष कमांडरों में शामिल है. अमेरिका ने उसके बारे में जानकारी देकर उसे गिरफ्तार कराने वाले के लिये एक करोड़ डॉलर के इनाम की घोषणा कर रखी है. उसके ईरान में होने की बात भी कही जाती है.
अल अदेल 1981 में मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादत की हत्या के मामले में संदिग्ध था. इसके बाद उसने देश छोड़ा और 1988 में अफगानिस्तान में सोवियत कब्जे से लड़ रहे मुजाहिदीनों में शामिल हो गया. अल कायदा के प्रमुख सैन्य कमांडरों में से एक और अक्सर अल कायदा में तीसरे नंबर का अधिकारी कहा जाने वाले अल अदेल ने 1998 में नैरोबी और दार अस सलाम के अमेरिकी दूतावासों में बम हमले की साजिश में मदद की थी. 1990 के दशक में उसने सूडान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में ट्रेनिंग कैंप बनाये.

2004 में सऊदी अरब में एक छापे के दौरान अल अदेल की एक डायरी मिली थी. संगठन में उसकी भूमिका ट्रेनर, सैन्य कमांडर और बिन लादेन की सुरक्षा का इंतजाम करने वाले दल के सदस्य के रूप में रही है. अल कायदा में शामिल होने से पहले वह मिस्र के इस्लामिक जेहाद ऑर्गनाइजेशन का सदस्य था. मिस्र में सरकार गिराने के बाद इस संगठन का रुझान बदल गया.
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अल अदेल का संबंध 2002 में अमेरिकी पत्रकार डैनियल पर्ल की पाकिस्तान में हत्या से भी है. अमेरिकी जांच अधिकारियों ने एक रिपोर्ट में यह बात कही थी. पर्ल प्रोजेक्ट के अधिकारियों ने पता लगाया था कि अल अदेल ने खालिद शेख मोहम्मद के साथ पर्ल के अपहरण पर चर्चा की थी. खालिद मोहम्मद शेख को केएसएम के नाम से भी जाना जाता है. अमेरिका पर 11 सितंबर को हुए हमले के मास्टरमाइंड होने का आरोप केएसएम पर ही है. अल अदेल को ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अल कायदा का कार्यवाहक प्रमुख भी नियुक्त किया गया था.

येजिद मेबारेक
येजिद मोबारेक को अबू उबायदाह युसुफ अल अनाबी के नाम से भी जाना जाता है. 2020 में फ्रेंच हमले में अल कायदा के अमीर की मौत के बाद उसने यह पदभार संभाला. उसके पहले वह संगठन के नेतृत्व परिषदों में से एक की जिम्मेदारी संभाल चुका था और एक दूसरी परिषद का सदस्य था.
अल्जीरियाई नागरिक मेबारेक ने एक्यूआईएम के मीडिया ऑपरेशन भी चलाए हैं. 2013 में उसने फ्रांस के हितों वाले ठिकानों पर दुनिया भर में हमला करने की वीडियो अपील जारी की थी. तब फ्रांस ने माली में उग्रवादियों के अभियान को दबाने के लिये अपनी सेना भेजी थी.
53 साल का मेबारेक अल्जीरिया में 1990 के दशक में हुए गृहयुद्ध में शामिल था जो सरकार और इस्लामी ताकतों के बीच हुआ था. इस दौरान वह उग्रवादियों के एक धड़े जीएसपीसी में एक के बाद एक पदों पर आसीन होता गया. एक्यूआईएम ने साहेल इलाके में फैली अव्यवस्था का फायदा उठाया और ग्लोबल नेटवर्क के सबसे सक्रिय और अहम शाखाओं में एक बन गया. पश्चिमी नागरिकों का अपहरण और हमले जैसी बड़ी गतिविधियों को उसने अंजाम दिया है.
अल कायदा में एक्यूआईएम के महत्व को देखते हुए मेबारेक से पहले इसके प्रमुख रहे अब्देलमालेक द्रोउकदेल ने अल जवाहिरी के नीचे वैश्विक अभियान का नेतृत्व करने वाली टीम में भूमिका निभाई. 2020 में फ्रेंच सैनिकों के हाथों उसकी मौत हुई.

हालांकि विश्लेषक मानते हैं कि एक्यूआईएम साहेल में नये उभरे गुटों के आगे अपनी धार खो चुका है. जिहादी गतिविधियों के लिहाज से यह जगह दुनिया में काफी कुख्यात है. मेबारेक के बारे में भी कहा जाता है कि पुराने जख्मों से वह परेशान है और उसमें ड्रोउकडेल जैसा करिश्माई व्यक्तित्व नहीं है.
अब्द अल रहमान अल मगरेबी
मोरक्को में जन्मे अब्द अल रहमान अल मगरेबी के अल कायदा से सदस्यता के बारे में पूछताछ के लिए लंबे समय से अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई उसकी तलाश में है. उसने जर्मनी में सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग की पढ़ाई की और फिर अफगानिस्तान चला गया. एफबीआई का कहना है कि यहां उसे अल कायदा के मीडिया विंग को संभालने की जिम्मेदारी मिली. अल जवाहिरी का दामाद मगरेबी अल कायदा का वरिष्ठ नेता है.
ओसामा बिन लादेन को मारने के अभियान में मिले दस्तावेजों से पता चला कि अल मगरेबी कई सालों से अल कायदा का स्टार है. उसने अल कायदा के जनरल मैनेजर के तौर पर अफगानिस्तान और पाकिस्तान में भी काम किया है.
अबू अब्द अल करीम अल मसरी
अल मसरी सीरियाई जिहादियों के गुट हुर्रास अल दीन का भी नेता है और माना जाता है कि सीरिया में रह रहा है. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अल कायदा के युवा कमांडर अल मसरी को नेता के रूप में ज्यादा पसंद करेंगे. अल मसरी जमीन पर लड़ाकों को भर्ती करने और संभावित मददगारों से सीधा संपर्क जोड़ने में माहिर है. वह गृहयुद्ध वाले इस्लामी देशों में जमीनी स्तर पर होने वाली लड़ाइयों से प्रेरित है और स्थानीय स्तर पर काफी सक्रिय भी.
अल कायदा के लिए नये नेता का चुनाव इतना आसान नहीं होगा. ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद इस संगठन के अलग अलग धड़े कई इलाकों में सक्रिय हैं. नेतृत्व करने वाली टीम के कई सदस्यों ने खासतौर से सीरिया का रुख किया और इनमें से कई मारे गये.
अल जवाहिरी रोजमर्रा के कामों से जुड़े फैसले नहीं करता था लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि नेतृत्व के लिए एक ऐसे चेहरे की जरूरत होती है जो वरिष्ठता और संगठन में प्रमुखता के लिहाज से अव्वल हो. संगठन के अलग अलग धड़ों के प्रमुखों को अल कायदा प्रमुख के प्रति वफादारी और भरोसा दिखाना होता है.
एनआर/वीके (रॉयटर्स, एएफपी)
Source: DW












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