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मुजफ्फरनगर दंगे: कप्‍तान धोनी से सीख लें अखिलेश यादव

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बैंगलोर। बरेली, मेरठ, शामली और फिर मुजफ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद जिस तरह उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव पर गालियों की बौछार पड़ रही है, ठीक वैसी ही बौछारें टीम इंडिया के कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी पर तब पड़ी थीं, जब ऑस्‍ट्रेलिया, इंग्‍लैंड में बुरी तरह हारी। धोनी ने अपनी टीम की मूल शक्ति को पहचाना और फिर से वापसी की और देखते ही देखते स्‍टार बन गये। आज अखिलेश को धोनी से सीख लेने की जरूरत है। जरूरत है अपनी मूल शक्ति को पहचानने की, जो यूपी की दशा और दिशा दोनों बदल सकती है।

सच पूछिए तो अखिलेश की मूल शक्ति भी युवा नेता ही हैं, लेकिन उनका इस्‍तेमाल सही ढंग से नहीं हो रहा है। उत्‍तर प्रदेश में अराजकता की स्थिति के बीच अब जनता जानना चाहती है कि क्‍या इन हालातों का सामना करने के लिए अखिलेश की युवा टीम के पास कोई योजना है या फिर इन हालातों को बदलने के लिए क्‍या प्रयास किये जा रहे हैं, अगर किये जा रहे हैं तो इतना वक्‍त क्‍यों लगाया जा रहा है? सपा की इस सरकार में नावेद सिद्दीकी, राजीव राय, अभिषेक मिश्रा, आशीष यादव, पवन पांडे और कई युवा नेताओं को शामिल किया गया था। जिसके बाद कहा जा रहा था अखिलेश वह करने में सफल रहेंगे जो राहुल गांधी नहीं कर सके। प्रत्‍येक क्षेत्र में चाहे राजनीति हो, खेल हो या व्‍यापार हो, युवा नेतृत्‍व के आते ही उम्‍मीद की जाती है, अधिक ऊर्जा और वरिष्‍ठों के सहयोग से अच्‍छे परिणाम आएंगे, लेकिन क्‍या अखिलेश यह कर पा रहे हैं या फिर सिर्फ मुलायम सिंह के हाथों की कठपुतली बने हुए हैं।

अखिलेश को धोनी से सीख लेनी चाहिए

टीम इंडिया की कप्‍तानी संभलने के साथ ही महेंद्र सिंह धोनी ने जब देखा कि टीम के दिग्‍गज संघर्ष कर रहे हैं और उनका सर्वश्रेष्‍ठ वक्‍त जा चुका है, तब उन्‍होने युवाओं को मौका दिया, इस दौरान उन्‍होने निंदा का सामना भी किया लेकिन कुछ समय बाद युवाओं के बेहतर प्रदर्शन करते ही टीम अच्‍छे परिणाम देने लगी। वहीं टीम से बड़े नाम हटाये जाने को भी लोग भूल गये लेकिन अखिलेश यादव अपनी टीम को पार्टी के प्रभावशाली शासन से मुक्‍त नहीं कर सके, जिससे कि महत्‍वपूर्ण मौकों पर वह कोई कड़ा फैसला नहीं कर पाये।

लिहाजा उत्‍तर प्रदेश में इससे पहले कि कोई यह कहे कि अखिलेश 'लीडरशिप टेस्‍ट' पास नहीं कर पाये, सीएम को अपनी उसी टीम के युवा खिलाडि़यों को आगे करना ही होगा। और हां अखिलेश यादव इस बात को भी ध्‍यान में रखना होगा कि टीम के कप्‍तान वो खुद हैं, न कि मुलायम सिंह, आजम खां या शिवपाल सिंह यादव।

मुजफ्फरनगर की ताज़ा तस्‍वीरें

कर्फ्यू में ढील

कर्फ्यू में ढील

मुजफ्फनगर जिले में सांप्रदायिक हिंसा के बाद स्थिति में तेजी से हो रहे सुधार के मद्देनजर कर्फ्यू में ढील की अवधि को बढ़ाने का फैसला किया गया है।

मुजफ्फनगर के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बुधवार को बताया कि सिविल लाइन, कोतवाली और नई मंडी में जारी कर्फ्यू में दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक ढील देने का निर्णय लिया गया है।

हालात सामान्य

हालात सामान्य

हालात को लगातार सामान्य होता देख ढील को बढ़ाने का फैसला किया गया है। इससे पहले जिला प्रशासन ने तीनों थाना क्षेत्रों में मंगलवार को कर्फ्यू में दो घंटे की ढील दी थी। इस दौरान लोगों ने घर से बाहर निकलकर खरीदारी की थी।

नई घटना सामने नहीं आई

नई घटना सामने नहीं आई

हालात तनावपूर्ण हैं, लेकिन मंगलवार से अब तक हिंसा की कोई नई घटना सामने नहीं आई है। कर्फ्यूग्रस्त इलाकों के साथ-साथ पूरे जिले में वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हालात की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस के साथ बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बल और सेना के जवान तैनात किए गए हैं।

शांति कायम

शांति कायम

जिले के शहरी इलाकों में शांति कायम है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा बलों को स्थिति सुधारने के लिए अभी भी मशक्कत करनी पड़ रही है। उपद्रवियों से कड़ाई से निपटने के आदेश दिए गए हैं।

अब तक 38 लोगों की मौत

अब तक 38 लोगों की मौत

अब तक हिंसा में आधिकारिक रूप से 38 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। जिले के भौराकला, मीरपुर, शाहपुर और ककरौली में मंगलवार रात पांच और शव बरामद होने की सूचना है, लेकिन प्रशासन की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। उधर शामली, मेरठ और सहारनपुर में भी मंगलवार को उप्रदव की घटनाएं सामने आईं। प्रशासन द्वारा मुजफ्फरनगर के अलावा शामली और बागपत में भी स्थिति सामान्य होने का दावा किया जा रहा है।

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English summary
According to political analyst Uttar Pradesh chief minister Akhilesh Yadav could not pass the test of leadership. He can learn from Team India's captain Mahendra Singh Dhoni.
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