आडवाणी के बाद शिवराज बने मोदी की मुश्किल
नई दिल्ली। भाजपा में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का फैसला लगतार विवादास्पद और मुश्किल होता चला जा रहा है। जहां इस विषय पर कांग्रेस भाजपा पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है, वहीं भाजपा के भी कई वरिष्ठ नेता अंदर ही अंदर नरेंद्र मोदी की खिलाफत कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अभी हाल ही में पार्टी आलाकमान और मोहन भागवत से की गई बातचीत में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार न घोषित किया जाये। शिवराज के अलावा गोवा के मुख्मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भी कहा था कि गुजरात में हुए दंगे मोदी के दामन पर एक दाग की तरह हैं।
भाजपा की तरफ से इस तरह की बातें तब कही जा रही हैं जब आरएसएस प्रमुख मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के लिए अगले सप्ताह भाजपा के बड़े नेताओं से मुलाकात करने जा रहे है। हालांकि शिवराज के आफिस से मिली जानकारी के अनुसार उन्होने इस तरह की बातों से इनकार किया है। शिवराज ने हालांकि पहले मोदी का समर्थन किया था।

इस संबंध में जब कल शिक्षक दिवस के मौके पर मोदी से एक छात्रा ने पीएम पद के बारे में पूछा तो उन्होने कहा कि वह ऐसा सपना नहीं देखते। उनके इस बयान को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से उनकी नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं इस पर कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि पार्टी में मची अंदरूनी कलह को देखकर मोदी का पीएम बनने का सपना अब टूटने लगा है, उन्हें हकीकत समझ में आ गयी है, इसलिए वह ऐसे बयान दे रहे हैं।
इसके अलावा सपा नेता राम गोपाल यादव ने कहा है कि मोदी को पीएम पद के बारे में नहीं बल्कि गुजरात में अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाने के बारे में सोंचना चाहिए।












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