भाजपा-विहिप की फ्लॉप 84 कोसी यात्रा सपा के लिये हिट
लखनऊ। अयोध्या में 84 कोसी यात्रा के ऐलान के बाद अयोध्या, फैजाबाद, बस्ती, बहराइच श्रावस्ती, गोरखपुर, समेत छह जिलों में आरएएफ, पुलिस और पीएसी के जवान तैनात कर दिये गये, ताकि यह यात्रा पूरी नहीं हो सके। असल में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अंदेशा है कि अगर यह परिक्रमा पूरी हुई, तो राज्य में सांप्रदायिक दंगे हो सकते हैं। दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया है कि अयोध्या का यह मैच फिक्स है, वहीं लोग अखिलेश की इस सफलता और विहिप के इस प्रयास को फ्लॉप शो कह रहे हैं, जबकि सच पूछिए तो यह सिर्फ भाजपा के लिये फ्लॉप शो है, सपा और विहिप के लिये यह किसी हिट शो से कम नहीं।
इस चर्चा पर आगे बढ़ने से पहले हम इस यात्रा के पीछे उद्देश्य पर प्रकाश डालेंगे। इस यात्रा के पीछे विहिप का उद्देश्य अपने खोये हुए वर्चस्व और छवि को वापस लाना है, जबकि भाजपा का उद्देश्य यूपी के वोट बैंक का ध्रुवीकरण करना। भाजपा को विश्वास है कि इस यात्रा को सपा सरकार रोकेगी तो सपा का हिन्दू वोटबैंक कमजोर पड़ेगा। वहीं यात्रा को रोकने के पीछे सपा का एक मात्र उद्देश्य है प्रदेश की कानून व्यवस्था को बनाये रखना। कुल मिलाकर देखा जाये तो यात्रा को आयोजित करने वाले चाहते थे कि इसे जबर्दस्ती रोका जाये, वहीं रोकने वाले चाहते थे कि यात्रा जबर्दस्ती निकाली जाये।
सपा को बड़ा फायदा
भाजपा का यह गेम इस बार उलटा पड़ गया है। भाजपा को लग रहा है कि आज की यात्रा रोक कर सपा ने उत्तर प्रदेश के हिन्दुओं को नाराज कर दिया है, जबकि ऐसा नहीं है। प्रदेश के बहुत कम हिन्दू हैं, जो अयोध्या पर राजनीति चाहते हैं। हिन्दू हो या मुसलमान अब सभी यूपी के विकास की ओर नज़रें बिछाये बैठे हैं। उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि विवादित स्थल पर नमाज़ पढ़ी जाये या आरती हो। बल्कि सच पूछिए तो अमन और चैन चाहने वाले हिन्दुओं का वोट बैंक सपा के लिये और ज्यादा मजबूत हो गया है। रही बात मुसलमानों की तो यूपी के जो मुसलमान सपा से खफा थे, वे अब भी खफा रहेंगे, खुश थे वो खुश रहेंगे।
भाजपा को घाटा
यह हर कोई जानता है कि भाजपा इस यात्रा को सफल बनाने के प्रयास में जुटी है। यह यात्रा सफल हो या विफल, भाजपा का वोटबैंक बिगड़ गया है, इसमें कोई दो राय नहीं है। क्योंकि प्रदेश का युवा अब राम मंदिर के नाम पर राजनीति नहीं चाहता और युवा ही है, जिसने सपा को सत्ता वापिस दिलायी थी। ऐसा करके भाजपा अपना यूथ वोट खो सकती है।

विहिप को फायदा
अशोक सिंघल, प्रवीण तोगडि़या से लेकर कई बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद छोटे-छोटे कार्यकर्ता सरयु नदी तक जाने के प्रयास में जुटे थे उन्हें भी रोक दिया गया। यात्रा हो या नहीं हो, विहिप को मीडिया में बड़ी कवरेज मिल चुकी है। देश-विदेश का मीडिया विहिप की इस यात्रा को लाइव कवर कर रहा है। ऐसे में विहिप की खोयी हुई छवि और वर्चस्व दोबारा वापिस आने के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले चुनावों में विहिप अपने सहयोगी दलों के साथ भाजपा को जिताने के अलग प्रकार के प्रयास जरूर करेगी।

भगवान राम का साम्राज्य
84 कोस यात्रा इसलिये की जाती है, क्योंकि भगवान राम का साम्राज्य अयोध्या व आस-पास के जिलों में 84 कोस तक फैला हुआ था। इस परिक्रमा का कोई समय नहीं होता है, साधु-संत एक संकल्प के अंतर्गत यह परिक्रमा करते हैं।

भादो में कैसे हो रही यात्रा
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भादो और फिर पितृपक्ष ये दोनों ही महीने खराब दिन माने जाते हैं। इन दिनों कोई शुभ काम नहीं होता। यही कारण है कि विहिप की तामाम संत इस यात्रा का समर्थन करने के बजाये विरोध कर रहे हैं। इन दिनों में भगवान राम ने भी अपनी यात्रा को विराम दे दिया था।

15 दिन में पूरी करनी होती है यात्रा
यह यात्रा सरयु नदी से शुरू करके यहीं पर 15 से 20 दिन में संपन्न करनी होती है। यह यात्रा बस्ती और अयोध्या के बीच सरयु नदी के तट से शुरू होकर बस्ती, गोरखपुर, अंबेडकरनगर, गोरखपुर, गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती होते हुए वापस अयोध्या तक पहुंचती है। इस परिक्रमा में साधु संत भगवान श्रीराम के शासित स्थान की परिक्रमा करते हैं।

राम लला के नाम पर राजनीति
ऐसे समय पर जब उत्तर प्रदेश के दर्जनों जिले बाढ़ के कहर से जूझ रहे हैं, भाजपा और विहिप को 84 कोसी यात्रा याद आ रही है। अगर यह यात्रा किस निर्धारित अंतराल में होती तब तो इसका आयोजन तर्क संगत था, लेकिन यहां तो विपिह के अशोक सिंघल को तक नहीं याद कि इससे पहले विहिप ने कब यह परिक्रमा की थी। कुल मिलाकर देखा जाये तो यह मात्र राम लला के नाम पर राजनीति है, जिसका खामियाजा भाजपा को जरूर भुगतना पड़ेगा।
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