विहिप की 84 कोसी परिक्रमा को इजाजत नहीं

उप्र के प्रमुख गृह सचिव आर. एम. श्रीवास्तव ने सरकार के फैसले की जानकारी देते हुए पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बातें कहीं। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक देवराज नागर भी मौजूद थे। श्रीवास्तव ने कहा, "परम्परा के मुताबिक 84 कोसी परिक्रमा मार्च में ही निकाली जाती रही है। अगस्त में इसकी शुरुआत करने से एक नई परम्परा की शुरुआत होगी और इससे अयोध्या और आसपास के इलाकों में शांति भंग होने का खतरा है।"
श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार ने यह फैसला किया है नई परम्परा की शुरुआत करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। विहिप के नेताओं की मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद परिक्रमा मार्ग से जुड़े हुए जिलों के अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि परम्परा के मुताबिक 84 कोसी की परिक्रमा चैत मास की पूर्णिमा और वैशाख की पूर्णिमा के बीच में निकाली जाती है। अगस्त में इसकी अनुमति देना सूबे में एक नई परम्परा की शुरुआत करने जैसा होगा।
पत्रकारों ने श्रीवास्तव से पूछा कि क्या सरकार के इस फैसले के बाद विहिप और सरकार के बीच टकराव की स्थिति नहीं आएगी, तो श्रीवास्तव ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि टकराव जैसी बात सामने आएगी। मुझे उम्मीद है कि सभी लोग हमारी बात को समझेंगे और उचित फैसला लेंगे।"
उन्होंने कहा कि वर्षो से यह नीति चली आ रही है कि सूबे में धार्मिक रूप से किसी भी प्रकार की नई परम्परा की शुरुआत करने की इजाजत नहीं दी जाएगी और उसी नीति का पालन किया जा रहा है। पत्रकार वार्ता में मौजूद उप्र के पुलिस महानिदेशक देवराज नागर ने भी कहा कि नई परम्परा की शुरुआत करने से शांति भंग होने का खतरा है इसलिए इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती।
उल्लेखनीय है कि विहिप के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक अशोक सिंघल और रामजन्मभूमि न्यास से जुड़े वरिष्ठ मंहतों ने शनिवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा प्रमुख मुलायम सिंह से मुलाकात कर 84 कोसी परिक्रमा को लेकर सहयोग मांगा था। बैठक के बाद विहिप की तरफ से कहा गया था कि मुलायम और अखिलेश से सकारात्मक बातचीत हुई है। लेकिन सरकार ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर इस यात्रा को निकालने की अनुमति देने से इंकार कर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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