नमो से साधु की मुलाकात से बिहार का राजनीतिक तापमान बढ़ा
पटना। बिहार के कांग्रेसी नेता और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद के साले साधु यादव की 'नमो' यानी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात के बाद बिहार का राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। बिहार में लालू सरकार के दौरान राज्य में अपनी खास पकड़ रखने वाले साधु ने शुक्रवार को अहमदाबाद जाकर मोदी से मुलाकात की और उस मुलाकात से न केवल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के बीच चर्चा का बाजार गर्म है, बल्कि पूरे बिहार का सियासी पारा गरमा गया है।
सभी दल अपने-अपने तरीके से प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का दावा है कि पार्टी साधु और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दसई चौधरी को इस मामले में कारण बताओ नोटिस जारी करने वाली है। साधु के साथ मोदी से मुलाकात करने वालों में दसई चौधरी भी थे। साधु ने मोदी से मुलाकात के बाद उन्हें न केवल प्रधानमंत्री का योग्य प्रत्याशी बताया, बल्कि यहां तक कह दिया की पार्टी कुछ भी समझे, मगर वह डर कर राजनीति करने वालों में से नहीं हैं। सभी नेताओं की अपनी-अपनी विशेषता है।

इस मुलाकात के बाद राजद सांसद और महासचिव रामकृपाल यादव अपना पल्ला झाड़ते हुए कहते हैं कि उनसे उनकी पार्टी को कोई लेना-देना नहीं है। इस मामले पर कांग्रेस और भाजपा जाने। इधर, कांग्रेस के प्रवक्ता प्रेमचंद्र मिश्रा का कहना है कि साधु को पार्टी ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में टिकट अवश्य दिया था, परंतु उन्हें संगठन में कोई पद नहीं दिया गया है और न ही वह कांग्रेस के स्थायी सदस्य हैं।
उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर चौधरी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। वैसे उन्होंने यह भी कहा कि उनके बयान को पार्टी अच्छा नहीं मानती।
बिहार में सतारूढ़ जनता दल (युनाइटेड) के प्रवक्ता नीरज कुमार कहते हैं कि भाजपा बिहार में फिर जंगल राज लाना चाहती है। साधु जैसे नेता अगर मोदी से मिल रहे हैं तो मोदी का स्तर पता चल जाता है। वह कहते हैं कि इस मुलाकात के बाद राजद और भाजपा के नजदीकी रिश्ते का पता पूरे देश को चल गया। बहरहाल, साधु और नमो की मुलाकात के बाद बिहार का राजनीति तापमान बढ़ गया है।












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