अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं बच्चे

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के सदस्य विनोद कुमार टीकू ने शिमला में आईएएनएस को बताया, "दिल्ली के विद्यार्थियों में अपने अधिकारों के जागरूकता अन्य राज्यों की अपेक्षा अधिक है।"
विनोद कुमार टीकू बाल अधिकारों पर राज्य की नीतियों की समीक्षा के लिए यहां आए थे। उन्होंने कहा कि बाल अधिकारों के उल्लंघन की शिकायतें सबसे ज्यादा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और झारखंड से रही हैं।
विनोद ने कहा, "दिल्ली अकेला राज्य है, जहां बच्चे सीधे हमें लिख रहे हैं। वे शारीरिक दंड और शोषण की शिकायतें कर रहे हैं। यही तो हम चाहते हैं।"उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल और पूरा झारखंड बच्चों के अवैध व्यापार के लिए बदनाम रहे हैं।
हर राज्य की अपनी अलग समस्या है।
"पश्चिम बंगाल, असम, पंजाब और हरियाणा में लड़कियों को रोजगार के वादे के साथ ठगा जाता है और फिर वैश्यावृत्ति या शादी के लिए मजबूर किया जाता है।"
"झारखंड में नाबालिगों को रोजगार मुहैया कराने के नाम पर शोषण किया जाता है और अंत में इन्हें बंधुआ मजदूर बना दिया जाता है।"
आपदाग्रस्त इलाकों में बाल तस्करी का खतरा अधिक है। इन क्षेत्रों में तस्कर आम तौर पर बच्चों को आकर्षित कर रहे हैं और फिर उनमें से बहुतों को देह व्यापार में धकेल दिया जाता है और कुछ को बंधुआ मजदूर बना दिया जाता है।
हिमाचल प्रदेश के बारे में उन्होंने कहा कि यहा बाल मजदूरी की समस्या है। अधितर शिकायतें कुल्लू और सोलन जिलों से मिल रही हैं।
उन्होंने बताया कि धारा 34 के तहत उन सभी घरों का पंजीकरण आवश्यक है, जहां ऐसे बच्चे रह रहे हैं, जिन्हें देखभाल और संरक्षण की जरूरत है।
उच्चतम न्यायालय द्वारा मई में दिए गए आदेश के अनुसार बच्चों की सुरक्षा के लिए बच्चों के लापता होने की स्थिति में एक माह के अंदर प्राथमिकी दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि बच्चों के खिलाफ हो रहे अपराधों की जांच के लिए हर पुलिस थाने पर कम से कम एक किशोर कल्याण अधिकारी होना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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